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कंपा रही ठंड, गुम हो गया है प्रशासन का रैन बसेरा
Mon, 17 Dec 2018 12:51 AM IST
दुर्गेश pandey
pratapgarh
pratapgarh
Published by: दुर्गेश pandey
Updated Mon, 17 Dec 2018 12:51 AM IST
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प्रतापगढ़
- फोटो : प्रतापगढ़
ठंड ने अब तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। लोग ठंड से कांप रहे हैं मगर, प्रशासन के रैन बसेरे गायब हैं। जिला अस्पताल में बने रैन बसेरा में सीएमएस का ताला लटक रहा है तो महिला अस्पताल के रैन बसेरे में प्रसव पीड़िताओं को भर्ती कराया जा रहा है। मरीजों के साथ अस्पताल आने वाले तीमारदारों को मजबूरन में वार्डों में रहना पड़ रहा है। उधर, रात में ठंड से बस अड्डे और रेलवे स्टेशन के साथ शहर के प्रमुख चौराहों पर राहगीर कांप रहे हैं, लेकिन नगर पालिका कहीं भी अलाव नहीं जलवा रही है।
जिला व महिला अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों के तीमारदारों के ठहरने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से रैन बसेरा का निर्माण कराया गया है। जिला अस्पताल के रैन बसेरा में ताला लटकता रहता है। वहीं महिला अस्पताल में बने रैन बसेरा में प्रसव पीड़िताओं को भर्ती किया जाता है। जिला अस्पताल के अलग-अलग वार्डों में 195 मरीज भर्ती है। उनके तीमारदारों को रात में ठहरने के लिए व्यवस्था न होने के कारण कुछ वार्ड में रहते हैं तो कुछ तीमारदार जिला अस्पताल परिसर में कूड़ा और अस्पताल का कचरा जलाकर ठंड से बचने का प्रयास करते हैं। यहीं हाल जिला महिला अस्पताल का है।
महिला अस्पताल की इमरजेंसी में 24 घंटे प्रसव पीड़िताओं का आना बना रहता है। दिन में तो ठीक रहता है, मगर रात में 10 बेड का इमरजेंसी वार्ड होने के कारण प्रसव पीड़िताओं को चिकित्सक भर्ती तो कर लेते हैं मगर, उन्हें बेड नहीं दिला पाते हैं। ऐसे में प्रसव पीड़िता रैन बसेरे में पड़ी रहती हैं। उनके तीमारदार खुले मेें ठंड से कांपते रहते हैं। स्वास्थ्य विभाग के अफसर इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। नगर पालिका को भी अभी गर्मी लग रही है। तभी शहर में कहीं अलाव नहीं जलवाया जा रहा है। बस अड्डे, रेलवे स्टेशन और चौराहों पर लोग कांपते नजर आ रहे हैं। शहर में प्रशासन के रैन बसेरे भी कहीं नजर नहीं आ रहे हैं।
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रात में वार्ड के अंदर पुरुषों का प्रवेश वर्जित है। रैन बसेरा का निर्माण हुआ है, मगर इमरजेंसी कक्ष छोटा होने के कारण प्रसव पीड़िताएं खुद जाकर रैन बसेरा में बैठ जाती हैं। ऐसे में तीमारदार जरूर परेशान होते हैं। नगर पालिका अध्यक्ष को पत्र लिखकर अलाव के लिए लकड़ी गिरवाने की मांग की गई है।
रीता दूबे, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल।
जिस स्थान पर रैन बसेरा बना है, उसी से सटा शवगृह है। ऐसे में रात में रैन बसेरा में रहने से लोग डरते हैं। कोई उसमें रहना नहीं चाहता है। इसलिए ताला बंद कराया गया है। जल्द ही अस्थाई तौर पर एक रैन बसेरा बनवा दिया जाएगा।
योगेंद्र यति, सीएमएस, जिला अस्पताल।
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जिला व महिला अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों के तीमारदारों के ठहरने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से रैन बसेरा का निर्माण कराया गया है। जिला अस्पताल के रैन बसेरा में ताला लटकता रहता है। वहीं महिला अस्पताल में बने रैन बसेरा में प्रसव पीड़िताओं को भर्ती किया जाता है। जिला अस्पताल के अलग-अलग वार्डों में 195 मरीज भर्ती है। उनके तीमारदारों को रात में ठहरने के लिए व्यवस्था न होने के कारण कुछ वार्ड में रहते हैं तो कुछ तीमारदार जिला अस्पताल परिसर में कूड़ा और अस्पताल का कचरा जलाकर ठंड से बचने का प्रयास करते हैं। यहीं हाल जिला महिला अस्पताल का है।
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महिला अस्पताल की इमरजेंसी में 24 घंटे प्रसव पीड़िताओं का आना बना रहता है। दिन में तो ठीक रहता है, मगर रात में 10 बेड का इमरजेंसी वार्ड होने के कारण प्रसव पीड़िताओं को चिकित्सक भर्ती तो कर लेते हैं मगर, उन्हें बेड नहीं दिला पाते हैं। ऐसे में प्रसव पीड़िता रैन बसेरे में पड़ी रहती हैं। उनके तीमारदार खुले मेें ठंड से कांपते रहते हैं। स्वास्थ्य विभाग के अफसर इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। नगर पालिका को भी अभी गर्मी लग रही है। तभी शहर में कहीं अलाव नहीं जलवाया जा रहा है। बस अड्डे, रेलवे स्टेशन और चौराहों पर लोग कांपते नजर आ रहे हैं। शहर में प्रशासन के रैन बसेरे भी कहीं नजर नहीं आ रहे हैं।
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रात में वार्ड के अंदर पुरुषों का प्रवेश वर्जित है। रैन बसेरा का निर्माण हुआ है, मगर इमरजेंसी कक्ष छोटा होने के कारण प्रसव पीड़िताएं खुद जाकर रैन बसेरा में बैठ जाती हैं। ऐसे में तीमारदार जरूर परेशान होते हैं। नगर पालिका अध्यक्ष को पत्र लिखकर अलाव के लिए लकड़ी गिरवाने की मांग की गई है।
रीता दूबे, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल।
जिस स्थान पर रैन बसेरा बना है, उसी से सटा शवगृह है। ऐसे में रात में रैन बसेरा में रहने से लोग डरते हैं। कोई उसमें रहना नहीं चाहता है। इसलिए ताला बंद कराया गया है। जल्द ही अस्थाई तौर पर एक रैन बसेरा बनवा दिया जाएगा।
योगेंद्र यति, सीएमएस, जिला अस्पताल।