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अपने ही जाल में फंस गए फर्जी नियुक्ति कराने वाले सींचपाल
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Cinchpal who got fake appointment caught in his own web
सिंचाई विभाग में नौ साल पहले फर्जी नियुक्ति कराने वाले नौ सींचपाल अपने ही बुने जाल में फंस गए हैं। विभाग से वेतन भुगतान पर रोक लगने और निलंबित होने के बाद राहत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मगर कोर्ट ने फर्जीवाड़े को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच विजलेंस से कराने का आदेश दिया।
साथ ही नियुक्ति फर्जी मिलने पर एसी, एक्सईएन, तीन बाबू और नौ सींचपालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश भी कोर्ट ने दिया है।
वर्ष 2011 में सिंचाई विभाग के कर्मचारियों और एक्सईएन की मिलीभगत से सींचपाल के पद पर नौ कर्मचारियों की फर्जी नियुक्ति कर दी गई।
फर्जी नियुक्ति पाने वाले कर्मचारी कार्यालय में कार्यरत लिपिकों के सगे-सम्बंधी थे। फर्जी नियुक्ति पाने वाले कर्मचारियों को जब पहला वेतन मिला, तो विभाग में तैनात अन्य कर्मचारी फर्जी नियुक्ति होने का खुलासा किया।
मामला सार्वजनिक होने पर तत्कालीन अधिशासी अभियंता ने अपना बचाव करने के लिए फर्जी नियुक्ति पाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। हालांकि उस समय फर्जीवाड़े में संलिप्त तीनों लिपिकों को भी मुकदमे में नामजद किया गया था।
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जमानत मिलने के बाद तीनों कर्मचारियों का बहाल कर दिया गया। इधर, वेतन नहीं मिलने पर फर्जीवाड़े में शामिल सींचपालों ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद की खंडपीठ लखनऊ में वाद दायर करके वेतन भुगतान की मांग की। कोर्ट ने जब विभाग से जवाब मांगा, तो फर्जीवाड़े की रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर दिया।
फिर क्या था, कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए फर्जीवाड़े की जांच सतर्कता अधिष्ठान से कराने का आदेश दिया। सतर्कता अधिष्ठान में हुए जांच में एसी, एक्सईएन, तीन बाबू को दोषी माना। सोमवार को मामला जब मुख्यमंत्री के पास पहुंचा, तो फर्जी नियुक्ति पाने वाले कमलेश कुमार, सुशील कुमार, विकास सिंह, राजीव कुमार दूबे, विपुल कुमार शुक्ला, रामपूजन शर्मा, रोहित सिंह, प्रमोद कुमार सिंह और जयप्रकाश और लिपिक शिव पूजन शर्मा, राम सहाय गौतम और रवींद्र बहादुर सिंह के खिलाफ अब नया मुकदमा दर्ज होगा।
रिटायर कर्मचारियों को नहीं मिल रही पेंशन
फर्जीवाड़े में शामिल दो लिपिक रिटायर हो चुके हैं। इनमें रवींद्र बहादुर सिंह और राम सहाय गौतम के रिटायर होने के बाद भी पेंशन का भुगतान नहीं किया गया है। इन कर्मचारियों को सिर्फ जीवन निर्वाह भत्ता ही दिया जा रहा है। शिव पूजन शर्मा विभाग में कार्यरत हैं, मगर उनसे भी विशेष कार्य नहीं लिया जा रहा है।
फर्जीवाड़े में शामिल सींचपालों को नहीं किया गया बर्खास्त
सिंचाई विभाग में फर्जी नियुक्ति होने का खुलासा होने के बाद भी सींचपालों को अभी तक बर्खास्त नहीं किया गया है। तत्कालीन अधिशासी अभियंता ने न तो इस दिशा में कदम उठाया और न ही बाद में आने वाले अफसरों ने उन्हें बर्खास्त किया।
मीडिया में समाचार पढ़ने के बाद मुझे भी जानकारी हुई है, अभी शासन से कोई पत्र नहीं आया है। फर्जीवाड़े में शामिल एक कर्मचारी वर्तमान में कार्यरत है। सभी लोग रिटायर हो चुके हैं। शासन का जो निर्देश आएगा, उसी के अनुरुप कार्रवाई की जाएगी।
एसके पाल, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग
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साथ ही नियुक्ति फर्जी मिलने पर एसी, एक्सईएन, तीन बाबू और नौ सींचपालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश भी कोर्ट ने दिया है।
वर्ष 2011 में सिंचाई विभाग के कर्मचारियों और एक्सईएन की मिलीभगत से सींचपाल के पद पर नौ कर्मचारियों की फर्जी नियुक्ति कर दी गई।
फर्जी नियुक्ति पाने वाले कर्मचारी कार्यालय में कार्यरत लिपिकों के सगे-सम्बंधी थे। फर्जी नियुक्ति पाने वाले कर्मचारियों को जब पहला वेतन मिला, तो विभाग में तैनात अन्य कर्मचारी फर्जी नियुक्ति होने का खुलासा किया।
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मामला सार्वजनिक होने पर तत्कालीन अधिशासी अभियंता ने अपना बचाव करने के लिए फर्जी नियुक्ति पाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। हालांकि उस समय फर्जीवाड़े में संलिप्त तीनों लिपिकों को भी मुकदमे में नामजद किया गया था।
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जमानत मिलने के बाद तीनों कर्मचारियों का बहाल कर दिया गया। इधर, वेतन नहीं मिलने पर फर्जीवाड़े में शामिल सींचपालों ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद की खंडपीठ लखनऊ में वाद दायर करके वेतन भुगतान की मांग की। कोर्ट ने जब विभाग से जवाब मांगा, तो फर्जीवाड़े की रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर दिया।
फिर क्या था, कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए फर्जीवाड़े की जांच सतर्कता अधिष्ठान से कराने का आदेश दिया। सतर्कता अधिष्ठान में हुए जांच में एसी, एक्सईएन, तीन बाबू को दोषी माना। सोमवार को मामला जब मुख्यमंत्री के पास पहुंचा, तो फर्जी नियुक्ति पाने वाले कमलेश कुमार, सुशील कुमार, विकास सिंह, राजीव कुमार दूबे, विपुल कुमार शुक्ला, रामपूजन शर्मा, रोहित सिंह, प्रमोद कुमार सिंह और जयप्रकाश और लिपिक शिव पूजन शर्मा, राम सहाय गौतम और रवींद्र बहादुर सिंह के खिलाफ अब नया मुकदमा दर्ज होगा।
रिटायर कर्मचारियों को नहीं मिल रही पेंशन
फर्जीवाड़े में शामिल दो लिपिक रिटायर हो चुके हैं। इनमें रवींद्र बहादुर सिंह और राम सहाय गौतम के रिटायर होने के बाद भी पेंशन का भुगतान नहीं किया गया है। इन कर्मचारियों को सिर्फ जीवन निर्वाह भत्ता ही दिया जा रहा है। शिव पूजन शर्मा विभाग में कार्यरत हैं, मगर उनसे भी विशेष कार्य नहीं लिया जा रहा है।
फर्जीवाड़े में शामिल सींचपालों को नहीं किया गया बर्खास्त
सिंचाई विभाग में फर्जी नियुक्ति होने का खुलासा होने के बाद भी सींचपालों को अभी तक बर्खास्त नहीं किया गया है। तत्कालीन अधिशासी अभियंता ने न तो इस दिशा में कदम उठाया और न ही बाद में आने वाले अफसरों ने उन्हें बर्खास्त किया।
मीडिया में समाचार पढ़ने के बाद मुझे भी जानकारी हुई है, अभी शासन से कोई पत्र नहीं आया है। फर्जीवाड़े में शामिल एक कर्मचारी वर्तमान में कार्यरत है। सभी लोग रिटायर हो चुके हैं। शासन का जो निर्देश आएगा, उसी के अनुरुप कार्रवाई की जाएगी।
एसके पाल, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग