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मेडिकल कॉलेज में होगा कटे फटे होठ, मोतियाबिंद से पीड़ित बच्चों को इलाज
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कटे-फटे होठ और मोतियाबिंद पीड़ित बच्चों का इलाज कराने के लिए लोगों को अब प्रयागराज और लखनऊ के चक्कर नहीं काटने होंगे। मेडिकल कॉलेज के महिला विंग में भर्ती कर ऐसे बच्चों का इलाज किया जाएगा। इसके लिए दस बेड का अलग से वार्ड बनाया गया है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की टीम जिन बच्चों को चिह्नित करेगी, उन्हें मेडिकल कॉलेज में भर्ती कर इलाज किया जाएगा।
अब तक कटे-फटे होठ, मोतियाबिंद पीड़ित बच्चों के साथ दिल में छेद और हाथ-पैर में टेढ़ापन का इलाज जिले में नहीं होता था। ऐसे बच्चों को आरबीएसके टीम चिह्नित करने के बाद प्रयागराज या फिर लखनऊ लेकर जाती थी। इससे एक ओर आरबीएसके टीम के चिकित्सकों का समय नष्ट होता था तो दूसरी ओर लखनऊ और प्रयागराज जाने से इन बीमार बच्चों के माता-पिता हाथ खड़े कर देते थे।
मगर अब ऐसा नहीं होगा। होठ और तालू के कटे-फटे होने के साथ दिल में छेद, मोतियाबिंद से पीड़ित बच्चों का आरबीएसके टीम के चिकित्सक मेडिकल कॉलेज के राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय में इलाज कराएंगे। ऐसे बच्चों को भर्ती कर इलाज करने के लिए मेडिकल कॉलेज में दस बेड का अलग से वार्ड तैयार किया गया है। डीपीएम राजशेखर ने बताया कि एक अक्तूबर से आरबीएसके टीम गांव-गांव भ्रमण कर ऐसे बच्चों को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराकर इलाज कराएगी।
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एक बाल रोग सर्जन मेडिकल कॉलेज को मिले हैं। वे कटे-फटे होठ की सर्जरी करेंगे। नेत्र रोग चिकित्सक मोतियाबिंद का ऑपरेशन करेंगे। हड्डी रोग के चिकित्सक हाथ और पैरों के टेढ़ेपन का इलाज करेंगे। इसके लिए सभी चिकित्सकों को निर्देश दिए गए हैं। डॉक्टर आर्यदेश दीपक, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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अब तक कटे-फटे होठ, मोतियाबिंद पीड़ित बच्चों के साथ दिल में छेद और हाथ-पैर में टेढ़ापन का इलाज जिले में नहीं होता था। ऐसे बच्चों को आरबीएसके टीम चिह्नित करने के बाद प्रयागराज या फिर लखनऊ लेकर जाती थी। इससे एक ओर आरबीएसके टीम के चिकित्सकों का समय नष्ट होता था तो दूसरी ओर लखनऊ और प्रयागराज जाने से इन बीमार बच्चों के माता-पिता हाथ खड़े कर देते थे।
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मगर अब ऐसा नहीं होगा। होठ और तालू के कटे-फटे होने के साथ दिल में छेद, मोतियाबिंद से पीड़ित बच्चों का आरबीएसके टीम के चिकित्सक मेडिकल कॉलेज के राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय में इलाज कराएंगे। ऐसे बच्चों को भर्ती कर इलाज करने के लिए मेडिकल कॉलेज में दस बेड का अलग से वार्ड तैयार किया गया है। डीपीएम राजशेखर ने बताया कि एक अक्तूबर से आरबीएसके टीम गांव-गांव भ्रमण कर ऐसे बच्चों को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराकर इलाज कराएगी।
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एक बाल रोग सर्जन मेडिकल कॉलेज को मिले हैं। वे कटे-फटे होठ की सर्जरी करेंगे। नेत्र रोग चिकित्सक मोतियाबिंद का ऑपरेशन करेंगे। हड्डी रोग के चिकित्सक हाथ और पैरों के टेढ़ेपन का इलाज करेंगे। इसके लिए सभी चिकित्सकों को निर्देश दिए गए हैं। डॉक्टर आर्यदेश दीपक, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज