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नहाय-खाय के साथ आज से शुरू होगी छठ पूजा
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chath puja
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आस्था का महापर्व छठ पूजा नहाय खाय के साथ सोमवार से शुरू होगा। अगले चार दिनों तक व्रती संकल्प लेकर छठ मइया और भगवान सूर्य की उपासना करेंगे। मंगलवार को खरना और बुधवार को भगवान भास्कर को पहला अर्घ्य दिया जाएगा। बृहस्पतिवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर श्रद्धालु व्रत का समापन करेंगे।
जिले में बेल्हा देवी के अलावा मानिकपुर, चौहरजन देवी समेत कई अन्य प्रमुख घाटों पर धूमधाम से छठ पूजा की जाती है। छठ पूजा आस्था और संयम का त्योहार माना जाता है। छठ पूजा की शुरुआत नहाय-खाय के साथ होती है। छठ पूजा कार्तिक माह की षष्ठी से शुरू हो जाती है। यह पर्व चार दिनों चलता है। सोमवार से पर्व की शुरुआत हो रही है।
नहाय-खाय की तैयारी के लिए रविवार को व्रती महिलाओं और पुरुषों ने घरों में मिट्टी के चूल्हे बनाए और बाजार से आम की लकड़ी की खरीदारी की। साथ ही घरों की साफ-सफाई की जाती रही। बाजारों में पूजन सामग्री की खरीदारी करने वालों की भीड़ रही। नहाय-खाय के दिन मिट्टी के चूल्हे पर बनने वाले प्रसाद को ही व्रती ग्रहण करेंगे।
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पूजा में चढ़ने वाले मुख्य प्रसाद ठेकुआ भी इसी चूल्हे पर बनाया जाएगा। इसके अगले दिन यानी नौ नवंबर को मंगलवार को खरना मनाया जाएगा. जबकि 10 नवंबर को सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा और अंत में 11 नवंबर को बृहस्पतिवार की सुबह सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही इस पावन पर्व का समापन हो जाएगा।
नहाय-खाय के साथ इन नियमों का करना चाहिए पालन
नहाय-खाय के दिन से व्रती को साफ और नए कपड़े पहनने चाहिए। छठ का समापन होने तक व्रती को जमीन पर ही सोना चाहिए। व्रती जमीन पर चटाई या चादर बिछाकर सो सकते हैं। घर में तामसिक और मांसाहार वर्जित है। इसलिए इस दिन से पहले ही घर पर मौजूद ऐसी चीजों को बाहर कर देना चाहिए और घर को साफ-सुथरा कर देना चाहिए। मदिरा पान, धूम्रपान आदि न करें. किसी भी तरह की बुरी आदतों को करने से बचें। साफ-सफाई का विशेष ध्यान देना जरूरी होता है। पूजा की वस्तु का गंदा होना अच्छा नहीं माना जाता है।
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जिले में बेल्हा देवी के अलावा मानिकपुर, चौहरजन देवी समेत कई अन्य प्रमुख घाटों पर धूमधाम से छठ पूजा की जाती है। छठ पूजा आस्था और संयम का त्योहार माना जाता है। छठ पूजा की शुरुआत नहाय-खाय के साथ होती है। छठ पूजा कार्तिक माह की षष्ठी से शुरू हो जाती है। यह पर्व चार दिनों चलता है। सोमवार से पर्व की शुरुआत हो रही है।
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नहाय-खाय की तैयारी के लिए रविवार को व्रती महिलाओं और पुरुषों ने घरों में मिट्टी के चूल्हे बनाए और बाजार से आम की लकड़ी की खरीदारी की। साथ ही घरों की साफ-सफाई की जाती रही। बाजारों में पूजन सामग्री की खरीदारी करने वालों की भीड़ रही। नहाय-खाय के दिन मिट्टी के चूल्हे पर बनने वाले प्रसाद को ही व्रती ग्रहण करेंगे।
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पूजा में चढ़ने वाले मुख्य प्रसाद ठेकुआ भी इसी चूल्हे पर बनाया जाएगा। इसके अगले दिन यानी नौ नवंबर को मंगलवार को खरना मनाया जाएगा. जबकि 10 नवंबर को सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा और अंत में 11 नवंबर को बृहस्पतिवार की सुबह सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही इस पावन पर्व का समापन हो जाएगा।
नहाय-खाय के साथ इन नियमों का करना चाहिए पालन
नहाय-खाय के दिन से व्रती को साफ और नए कपड़े पहनने चाहिए। छठ का समापन होने तक व्रती को जमीन पर ही सोना चाहिए। व्रती जमीन पर चटाई या चादर बिछाकर सो सकते हैं। घर में तामसिक और मांसाहार वर्जित है। इसलिए इस दिन से पहले ही घर पर मौजूद ऐसी चीजों को बाहर कर देना चाहिए और घर को साफ-सुथरा कर देना चाहिए। मदिरा पान, धूम्रपान आदि न करें. किसी भी तरह की बुरी आदतों को करने से बचें। साफ-सफाई का विशेष ध्यान देना जरूरी होता है। पूजा की वस्तु का गंदा होना अच्छा नहीं माना जाता है।