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Pratapgarh News: भक्ति धाम में मनाया गया जगद्गुरु कृपालुजी महाराज का जन्मोत्सव
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शरद पूर्णिमा की चांदनी रात और भक्तिभाव से भरे वातावरण के बीच भक्तिधाम मनगढ़ में सोमवार को जगद्गुरु कृपालुजी महाराज का 103वां जन्मोत्सव हर्षोल्लास और भव्यता के साथ मनाया गया। पूरा भक्तिधाम इस दौरान प्रेम, भक्ति और आनंद के सागर में डूबा रहा। देश विदेश से आए अनुयायियों व सत्संगियों ने इस दिव्य अवसर का साक्षी बनकर स्वयं को धन्य महसूस किया।
सुबह शुभ बेला में जगद्गुरु की पुत्रियों डॉ. श्यामा त्रिपाठी और डॉ. कृष्णा त्रिपाठी ने मंत्रोच्चारण के बीच महाराज जी की पूजा-अर्चना कर जन्मोत्सव का शुभारंभ किया। इसके उपरांत भक्ति गीतों की मधुर धुनों के बीच केक काटकर जन्मोत्सव की रसपूर्ण शुरुआत की गई। पूरा भक्तिधाम राधे राधे, जय कृपालु महाराज और लाडली लाल की जय के जयघोषों से गूंज उठा। इसके बाद जगद्गुरु कृपालुजी महाराज को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग अर्पित किया गया।
भोग दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही। भक्तों ने महाराज जी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर नमन किया और अपने जीवन में प्रेम, करुणा और भक्ति का मार्ग अपनाने का संकल्प लिया। दिनभर भजन, कीर्तन, सत्संग और भक्ति संगीत का क्रम चलता रहा। भक्तिधाम परिसर को फूलों, झालरों और दीपों से ऐसे सजाया गया था कि हर दिशा से दिव्यता और आध्यात्मिक आनंद का अनुभव हो रहा था।
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श्रद्धालुओं ने कहा कि आज का दिन केवल जन्मोत्सव नहीं, बल्कि भक्ति, सेवा और प्रेम के संदेश को पुनः स्मरण करने का अवसर है। कार्यक्रम के दौरान मंगल व आरती के बाद सत्संगियों ने आकाश में सैकड़ों रंग-बिरंगे गुब्बारे छोड़कर प्रेम और एकता का संदेश दिया। वातावरण में जैसे ही गुब्बारा उड़ान भरने लगे, वैसे ही हर भक्त की आंखें आनंद और भक्ति के आंसुओं से भीग उठीं।
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सुबह शुभ बेला में जगद्गुरु की पुत्रियों डॉ. श्यामा त्रिपाठी और डॉ. कृष्णा त्रिपाठी ने मंत्रोच्चारण के बीच महाराज जी की पूजा-अर्चना कर जन्मोत्सव का शुभारंभ किया। इसके उपरांत भक्ति गीतों की मधुर धुनों के बीच केक काटकर जन्मोत्सव की रसपूर्ण शुरुआत की गई। पूरा भक्तिधाम राधे राधे, जय कृपालु महाराज और लाडली लाल की जय के जयघोषों से गूंज उठा। इसके बाद जगद्गुरु कृपालुजी महाराज को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग अर्पित किया गया।
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भोग दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही। भक्तों ने महाराज जी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर नमन किया और अपने जीवन में प्रेम, करुणा और भक्ति का मार्ग अपनाने का संकल्प लिया। दिनभर भजन, कीर्तन, सत्संग और भक्ति संगीत का क्रम चलता रहा। भक्तिधाम परिसर को फूलों, झालरों और दीपों से ऐसे सजाया गया था कि हर दिशा से दिव्यता और आध्यात्मिक आनंद का अनुभव हो रहा था।
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श्रद्धालुओं ने कहा कि आज का दिन केवल जन्मोत्सव नहीं, बल्कि भक्ति, सेवा और प्रेम के संदेश को पुनः स्मरण करने का अवसर है। कार्यक्रम के दौरान मंगल व आरती के बाद सत्संगियों ने आकाश में सैकड़ों रंग-बिरंगे गुब्बारे छोड़कर प्रेम और एकता का संदेश दिया। वातावरण में जैसे ही गुब्बारा उड़ान भरने लगे, वैसे ही हर भक्त की आंखें आनंद और भक्ति के आंसुओं से भीग उठीं।