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बाहरी लोगों की लंबी सूची, क्वारंटीन नहीं
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big list of outsiders no quarantine
- फोटो : PRATAPGARH
लॉकडाउन के दौरान दिल्ली व मुंबई से आने वाले परदेसियों की गांवों में भरमार है। ग्राम प्रधानों ने गांव आने वाले परदेसियों की सूची तैयार कर एडीओ पंचायत के व्हाट्सएप नंबर पर डाल दी, मगर इसके बाद भी न तो उनका परीक्षण हुआ और न ही उन्हें क्वारंटीन किया गया। बाहर से आए लोग स्वास्थ्य परीक्षण कराने और आइसोलेट होने से कन्नी काट रहे हैं। इससे ग्रामीणों को संक्रमण का खतरा सता रहा है।
महामारी का रूप ले चुके कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। लॉकडाउन के दौरान दिल्ली व मुंबई से बड़ी संख्या में जिले के अलग-अलग गांवों में पहुंचे हैं। गांवों मेें ग्राम प्रधानों को जिम्मेदारी है कि वह गांव आने वाले परदेसियों की सूचना ब्लाक में दें। वह परदेसियों की सूचना एडीओ पंचायत के व्हाट्सएप नंबर पर प्रेषित करेंगे। ताकि एडीओ पंचायत व ग्राम प्रधान की निगरानी में स्वास्थ्य विभाग की टीम उनका परीक्षण कराकर 14 दिनों के लिए प्राथमिक विद्यालय व आंगनबाड़ी केंद्रों में क्वारंटीन कर सके। मगर ब्लाकों में परदेसियों की सूचना आने के बाद भी एडीओ पंचायत व स्वास्थ्य विभाग की टीम लापरवाह बनी है।
हैरान करने वाली बात यह है कि गांवों में सूचना के बाद भी जिम्मेदार इसे लेकर तनिक भी संजीदा नहीं हैं। जिले के शिवगढ़ ब्लाक, बेलखरनाथ ब्लाक, मंगरौरा, रखहा, दीवानगंज, गौरा, मांधाता, संडवाचंद्रिका क्षेत्र के सैकड़ों गांव ऐसे हैं जहां ग्राम प्रधानों ने संबंधित ब्लाकों में सूचनाएं भेज दी हैं। ब्लाकों में परदेसियों की लंबी सूची है। फिर भी न उनका न परीक्षण हुआ और न ही उन्हें क्वारंटीन किया जा सका। प्राथमिक स्कूलों में ताला लटक रहा है। बाहर से आए लोग गांवों में घूम रहे हैं। एडीओ पंचायत व स्वास्थ्य विभाग की टीम इसे लेकर तनिक भी संजीदा नहीं है।
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गांवों में दिल्ली व मुंबई से आए लोग स्वास्थ्य परीक्षण की बात करते ही कन्नी काटने लगते हैं। ग्राम प्रधान के दबाव बनाने पर वह घर से बाहर निकल रहे हैं।
दिल्ली के निजामुद्दीन में आयोजित मरकज में शामिल होकर लौटे तीन जमातियों के कोरोना पाजिटिव होने से जिले में हड़कंप मचा हुआ है। गांवों में लोग खौफ में हैं। परदेसियों की जांच न होने से उन्हें संक्रमण का भय सता रहा है।
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महामारी का रूप ले चुके कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। लॉकडाउन के दौरान दिल्ली व मुंबई से बड़ी संख्या में जिले के अलग-अलग गांवों में पहुंचे हैं। गांवों मेें ग्राम प्रधानों को जिम्मेदारी है कि वह गांव आने वाले परदेसियों की सूचना ब्लाक में दें। वह परदेसियों की सूचना एडीओ पंचायत के व्हाट्सएप नंबर पर प्रेषित करेंगे। ताकि एडीओ पंचायत व ग्राम प्रधान की निगरानी में स्वास्थ्य विभाग की टीम उनका परीक्षण कराकर 14 दिनों के लिए प्राथमिक विद्यालय व आंगनबाड़ी केंद्रों में क्वारंटीन कर सके। मगर ब्लाकों में परदेसियों की सूचना आने के बाद भी एडीओ पंचायत व स्वास्थ्य विभाग की टीम लापरवाह बनी है।
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हैरान करने वाली बात यह है कि गांवों में सूचना के बाद भी जिम्मेदार इसे लेकर तनिक भी संजीदा नहीं हैं। जिले के शिवगढ़ ब्लाक, बेलखरनाथ ब्लाक, मंगरौरा, रखहा, दीवानगंज, गौरा, मांधाता, संडवाचंद्रिका क्षेत्र के सैकड़ों गांव ऐसे हैं जहां ग्राम प्रधानों ने संबंधित ब्लाकों में सूचनाएं भेज दी हैं। ब्लाकों में परदेसियों की लंबी सूची है। फिर भी न उनका न परीक्षण हुआ और न ही उन्हें क्वारंटीन किया जा सका। प्राथमिक स्कूलों में ताला लटक रहा है। बाहर से आए लोग गांवों में घूम रहे हैं। एडीओ पंचायत व स्वास्थ्य विभाग की टीम इसे लेकर तनिक भी संजीदा नहीं है।
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गांवों में दिल्ली व मुंबई से आए लोग स्वास्थ्य परीक्षण की बात करते ही कन्नी काटने लगते हैं। ग्राम प्रधान के दबाव बनाने पर वह घर से बाहर निकल रहे हैं।
दिल्ली के निजामुद्दीन में आयोजित मरकज में शामिल होकर लौटे तीन जमातियों के कोरोना पाजिटिव होने से जिले में हड़कंप मचा हुआ है। गांवों में लोग खौफ में हैं। परदेसियों की जांच न होने से उन्हें संक्रमण का भय सता रहा है।