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गायन का अंदाज लोक शैली की परख में हो : मालिनी
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Wed, 18 Feb 2015 11:47 PM IST
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गायन एक लोकविधा का अंग है। गायन का अंदाज सदैव लोकशैली की परख के भीतर होनी चाहिए। यह बातें ख्याति प्राप्त गायिका एवं बिहार प्रदेश की सांस्कृतिक राजदूत सुश्री मालिनी अवस्थी ने कहीं। मंगलवार को बाबा घुइसरनाथ धाम के एकता महोत्सव में अमर उजाला से बातचीत में मालिनी ने कहा कि अवधी के गीत हों या भोजपुरी गीत के अंदाज, यह ग्रामीण परिवेश के दर्शकों को खूब भाता है। लेकिन यह तभी संभव है जब गीत के बोल तथा भाव ग्रामीण परिवेश की जनता की नब्ज को टटोल सके।
अवधी के गीतों को समृद्धिशाली ठहराते हुए मालिनी ने केंद्र व राज्य सरकार से इसके भाषा संवर्धन तथा गीतकाराें को मजबूत मंच दिए जाने की बात कही। भोजपुरी गीताें के बढ़ते चलन तथा नवोदित कलाकाराें द्वारा भी इस शैली के गायन को प्रमुखता देने की बात पर मालिनी ने कहा भोजपुरी का अंदाज बहुत ही मीठा है। भोजपुरी गीत लोगों के जेहन में बड़ी सरलता के साथ उतर जाते हैं। शास्त्री गायन को मालिनी ने संगीत की सबसे प्राचीनतम विरासत ठहराया। उन्होंने कहा कि शास्त्रीय गायन तथा गजल दर्शकों की संजीदगी को भाते हैं। गीत, गजल, ठुमरी तथा कजरी को भी मालिनी ने लोकजीवन के अंदाज में सीधे-सीधे टटोलते हुए मंच पर प्रस्तुतिकरण को कलाकार की सफलता का राज ठहराया। यहां मिले अवध रत्न सम्मान से अभिभूत मालिनी ने कहा इस प्रकार के सम्मान मिलना कलाकार के लिए उसके मनोबल व प्रस्तुतिकरण के अंदाज को एक अलग साहस की अनुभूति भी कराते हैं। दर्शकों की ताली तथा समर्थन की मुद्रा को मालिनी कलाकार की सफलता का सबसे बड़ा सम्मान भी ठहराती हैं।
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अवधी के गीतों को समृद्धिशाली ठहराते हुए मालिनी ने केंद्र व राज्य सरकार से इसके भाषा संवर्धन तथा गीतकाराें को मजबूत मंच दिए जाने की बात कही। भोजपुरी गीताें के बढ़ते चलन तथा नवोदित कलाकाराें द्वारा भी इस शैली के गायन को प्रमुखता देने की बात पर मालिनी ने कहा भोजपुरी का अंदाज बहुत ही मीठा है। भोजपुरी गीत लोगों के जेहन में बड़ी सरलता के साथ उतर जाते हैं। शास्त्री गायन को मालिनी ने संगीत की सबसे प्राचीनतम विरासत ठहराया। उन्होंने कहा कि शास्त्रीय गायन तथा गजल दर्शकों की संजीदगी को भाते हैं। गीत, गजल, ठुमरी तथा कजरी को भी मालिनी ने लोकजीवन के अंदाज में सीधे-सीधे टटोलते हुए मंच पर प्रस्तुतिकरण को कलाकार की सफलता का राज ठहराया। यहां मिले अवध रत्न सम्मान से अभिभूत मालिनी ने कहा इस प्रकार के सम्मान मिलना कलाकार के लिए उसके मनोबल व प्रस्तुतिकरण के अंदाज को एक अलग साहस की अनुभूति भी कराते हैं। दर्शकों की ताली तथा समर्थन की मुद्रा को मालिनी कलाकार की सफलता का सबसे बड़ा सम्मान भी ठहराती हैं।
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