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बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था, मरीज परेशान
प्रतापगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 23 Jun 2018 12:09 AM IST
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स्वास्थ्य मंत्री के गृह जनपद में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से बदहाल हो गई है। आग उबल रही गर्मी के मौसम में लोगों को पानी तक नसीब नहीं हो रहा है। मजबूरी में मरीजों और तीमारदारों को दूषित और गर्म पानी का सहारा लेना पड़ रहा है। वहीं गंभीर मरीजों का इलाज नर्स के माध्यम से किया जाता है। चिकित्सक उन्हें देखने तक नहीं आते हैं। इसके बावजूद इन समस्याओं पर विभाग के आला अधिकारियों के साथ ही मंत्री जी का ध्यान नहीं है।
जिला अस्पताल में हजारों मरीजों की रोजाना भीड़ रहती है। गर्मी के दिनों में मरीजों की संख्या और बढ़ जाती है। मरीजों को सुविधा के नाम पर जिला अस्पताल में करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाया जा रहा है। गर्मी से राहत दिलाने के लिए वार्डो में पंखे कूलर की व्यवस्था की गई है। गला तर करने के लिए लाखों रुपये खर्च कर शीतल पेयजल की मशीनें अस्पताल में लगाई गईं हैं। प्रत्येक वार्ड में शुद्ध पेयजल के लिए सप्लाई पाइप लाइन दौड़ाई गई है। अस्पताल परिसर में दो हैंडपंप भी लगे हैं। इसके बावजूद भी मरीजों को गर्मी के दिनों में जहां खौलता हुआ पानी पीना पड़ रहा है वहीं जर्जर कूलर, पंखे की वजह से अस्पताल में भर्ती मरीज गर्मी के चलते उबल जा रहे हैं। बता दें के 12 मरीजों के बीच में मात्र एक कूलर रखा गया है। बीच-बीच में बिजली कट जाती है तो जनरेटर नहीं चलाया जाता है। अल्ट्रासाउंड कभी भी नहीं होता है। इससे मरीज परेशान होते हैं। यही हाल महिला अस्पताल का भी है। यहां भी एक हैंडपंप लगा हुआ है और शीतल पेयजल की व्यवस्था की गई है। मगर शीतल पेयजल खौलता हुआ पानी उगल रहा है। हैंडपंप जिस स्थान पर लगा हुआ है वहां गंदगी का अंबार है। इससे मरीशज और तीमातरदार पानी पीने से दूर भागते हैं। ऐसे में बाहर से पानी खरीदकर मरीजों और तीमा रदारों को गला तर करना पड़ रहा हैं। वहीं
जिला अस्पताल में मरीजों को इमरजेंसी में बैठने वाले चिकित्सक तो भर्ती करते हैं, मगर इसके बाद उन्हें देखने के लिए कोई नहीं जाता है। स्टाफ नर्स मरीजों का इलाज करती है। एक नर्स के भरोसे 35 से 40 मरीजों का जिम्मा होता है। ऐसे में नर्स जहां परेशान रहती है वहीं दर्द से मरीज तड़पता रहता है।
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शिकायत करने पर मरीजों को कर दिया जाता है रेफर
अस्पताल की समस्या को लेकर शिकायत करना तीमारदारों को उस समय भारी पड़ जाता है जब उनके मरीजों को बगैर किसी कारण चिकित्सक इलाहाबाद रेफर कर देते हैं। ऐसे में मरीज या फिर उनके साथ आने वाले तीमारदार कभी किसी की शिकायत करने के लिए किसी के पास नहीं जाते हैं।
वर्षो से पानी टंकी की नहीं हुई है सफाई
जिला व महिला अस्पताल के पानी टंकी की सफाई कई वर्षो से नहीं की गई है। ऐसे में दूषित पानी पीने के लिए मरीज और तीमारदार परेशान हो रहे हैं। स्वतंत्र प्रभार स्वास्थ्य मंत्री बनने के बाद पहली बार आए डा. महेंद्र सिंह ने सबसे पहले तत्कालिन सीएमएस रहे डा. महेंद्र विक्रम सिंह से पानी टंकी की सफाई कराने और उस पर सफाई का डेट अंकित करवाने के लिए कहे थे। मगर उनके इस आदेश का पालन स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अफसरों ने नहीं किया।
गंदी चादर पर भर्ती कर मरीजों का होता है इलाज
शासन ने भले ही रोजाना अलग-अलग कलर के चादर पर मरीजों को भर्ती करके इलाज करने के लिए सीएमओ, सीएमओ को आदेश दिया है मगर यह आदेश का पालन किसी भी सरकारी अस्पताल में नहीं किया जा रहा है। एक बार जिस चादर पर मरीजों को भर्ती किया जाता है उसे तीन से चार दिनों के बाद ही बदला जाता है। मरीज साफ चादर की मांग करते हैं तो उन्हे डाट फटकार कर भगा दिया जाता है। इससे जितना मरीज ठीक होते हैं उनती ही बीमारी अपने साथ घर लेकर जाते हैं।
एंटीरैवीज सहित कई दवा नदारत
जिला अस्पताल में एंटीरैबीज का इंजेक्शन के साथ ही आयरन, कैल्सीयम, शूगर, वीपी, हार्ट, ओआरएस घोल सहित दर्जनों दवा खत्म हो गई है। जिम्मेदार स्वास्थ्य कर्मचारी बारबार एजेंसी से दवा की मांग कर रहे हैं। मगर एजेंसी की ओर से दवा को नहीं भेजा जा रहा है। इससे मरीजों को सरकारी अस्पतालों में दवा भी नहीं मिल पा रहा है। इससे मरीज परेशान हो रहे हैं। वहीं जिला महिला अस्पताल जहां कई दवा का संकट बना हुआ है वहीं प्रसूताओं को संक्रामक बीमारी से बचाने के लिए नैपकिन तक नहीं दिया जा रहा है।
कचरे से उठ रहा दुर्गंध
जिला अस्पताल परिसर में बने चिल्ड्रेनवार्ड के बगल में कूड़ा डंपिंग जोन बना हुआ है। अस्पताल प्रशासन बायोमेडिकल बेस्ट को कूड़ा डंपिंग जोन में डंप करवा रहें हैं। इससे दुर्गंध उठ रहा है। इस ओर जिम्मेदार अफसरों का ध्यान नहीं पड़ रहा है। मजेदार बात यह है कि लाखों रुपये जमाकर बायोमेडिकल बेस्ट में स्वास्थ्य विभाग ने अपना पंजीयन कराया है। बायोमेडिकल बेस्ट के संचालक को रोजाना अस्पताल से निकलने वाले कचरे को ले जाना चाहिए। मगर ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा है। वहीं प्राइवेट अस्पताल संचालकों ने बायोमेडिक बेस्ट में पंजीयन कराना अनिवार्य कर दिया है। बगैर पंजीयन के निजी अस्पतालों का लाइसेंस रिन्यूवल नहीं किया जा रहा है।
जिला व महिला अस्पताल के सीएमएस से अस्पताल की समस्या के बारे में एक रिपोर्ट मांगी जा रही है। जो खामियां होगी उसे दूर कराया जाएगा। शासन की ओर से मिलने वाले समस्त सुविधाओं का लाभ मरीजों तक पहुंचाया जाएगा।
एके श्रीवास्तव, सीएमओ।
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जिला अस्पताल में हजारों मरीजों की रोजाना भीड़ रहती है। गर्मी के दिनों में मरीजों की संख्या और बढ़ जाती है। मरीजों को सुविधा के नाम पर जिला अस्पताल में करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाया जा रहा है। गर्मी से राहत दिलाने के लिए वार्डो में पंखे कूलर की व्यवस्था की गई है। गला तर करने के लिए लाखों रुपये खर्च कर शीतल पेयजल की मशीनें अस्पताल में लगाई गईं हैं। प्रत्येक वार्ड में शुद्ध पेयजल के लिए सप्लाई पाइप लाइन दौड़ाई गई है। अस्पताल परिसर में दो हैंडपंप भी लगे हैं। इसके बावजूद भी मरीजों को गर्मी के दिनों में जहां खौलता हुआ पानी पीना पड़ रहा है वहीं जर्जर कूलर, पंखे की वजह से अस्पताल में भर्ती मरीज गर्मी के चलते उबल जा रहे हैं। बता दें के 12 मरीजों के बीच में मात्र एक कूलर रखा गया है। बीच-बीच में बिजली कट जाती है तो जनरेटर नहीं चलाया जाता है। अल्ट्रासाउंड कभी भी नहीं होता है। इससे मरीज परेशान होते हैं। यही हाल महिला अस्पताल का भी है। यहां भी एक हैंडपंप लगा हुआ है और शीतल पेयजल की व्यवस्था की गई है। मगर शीतल पेयजल खौलता हुआ पानी उगल रहा है। हैंडपंप जिस स्थान पर लगा हुआ है वहां गंदगी का अंबार है। इससे मरीशज और तीमातरदार पानी पीने से दूर भागते हैं। ऐसे में बाहर से पानी खरीदकर मरीजों और तीमा रदारों को गला तर करना पड़ रहा हैं। वहीं
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जिला अस्पताल में मरीजों को इमरजेंसी में बैठने वाले चिकित्सक तो भर्ती करते हैं, मगर इसके बाद उन्हें देखने के लिए कोई नहीं जाता है। स्टाफ नर्स मरीजों का इलाज करती है। एक नर्स के भरोसे 35 से 40 मरीजों का जिम्मा होता है। ऐसे में नर्स जहां परेशान रहती है वहीं दर्द से मरीज तड़पता रहता है।
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शिकायत करने पर मरीजों को कर दिया जाता है रेफर
अस्पताल की समस्या को लेकर शिकायत करना तीमारदारों को उस समय भारी पड़ जाता है जब उनके मरीजों को बगैर किसी कारण चिकित्सक इलाहाबाद रेफर कर देते हैं। ऐसे में मरीज या फिर उनके साथ आने वाले तीमारदार कभी किसी की शिकायत करने के लिए किसी के पास नहीं जाते हैं।
वर्षो से पानी टंकी की नहीं हुई है सफाई
जिला व महिला अस्पताल के पानी टंकी की सफाई कई वर्षो से नहीं की गई है। ऐसे में दूषित पानी पीने के लिए मरीज और तीमारदार परेशान हो रहे हैं। स्वतंत्र प्रभार स्वास्थ्य मंत्री बनने के बाद पहली बार आए डा. महेंद्र सिंह ने सबसे पहले तत्कालिन सीएमएस रहे डा. महेंद्र विक्रम सिंह से पानी टंकी की सफाई कराने और उस पर सफाई का डेट अंकित करवाने के लिए कहे थे। मगर उनके इस आदेश का पालन स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अफसरों ने नहीं किया।
गंदी चादर पर भर्ती कर मरीजों का होता है इलाज
शासन ने भले ही रोजाना अलग-अलग कलर के चादर पर मरीजों को भर्ती करके इलाज करने के लिए सीएमओ, सीएमओ को आदेश दिया है मगर यह आदेश का पालन किसी भी सरकारी अस्पताल में नहीं किया जा रहा है। एक बार जिस चादर पर मरीजों को भर्ती किया जाता है उसे तीन से चार दिनों के बाद ही बदला जाता है। मरीज साफ चादर की मांग करते हैं तो उन्हे डाट फटकार कर भगा दिया जाता है। इससे जितना मरीज ठीक होते हैं उनती ही बीमारी अपने साथ घर लेकर जाते हैं।
एंटीरैवीज सहित कई दवा नदारत
जिला अस्पताल में एंटीरैबीज का इंजेक्शन के साथ ही आयरन, कैल्सीयम, शूगर, वीपी, हार्ट, ओआरएस घोल सहित दर्जनों दवा खत्म हो गई है। जिम्मेदार स्वास्थ्य कर्मचारी बारबार एजेंसी से दवा की मांग कर रहे हैं। मगर एजेंसी की ओर से दवा को नहीं भेजा जा रहा है। इससे मरीजों को सरकारी अस्पतालों में दवा भी नहीं मिल पा रहा है। इससे मरीज परेशान हो रहे हैं। वहीं जिला महिला अस्पताल जहां कई दवा का संकट बना हुआ है वहीं प्रसूताओं को संक्रामक बीमारी से बचाने के लिए नैपकिन तक नहीं दिया जा रहा है।
कचरे से उठ रहा दुर्गंध
जिला अस्पताल परिसर में बने चिल्ड्रेनवार्ड के बगल में कूड़ा डंपिंग जोन बना हुआ है। अस्पताल प्रशासन बायोमेडिकल बेस्ट को कूड़ा डंपिंग जोन में डंप करवा रहें हैं। इससे दुर्गंध उठ रहा है। इस ओर जिम्मेदार अफसरों का ध्यान नहीं पड़ रहा है। मजेदार बात यह है कि लाखों रुपये जमाकर बायोमेडिकल बेस्ट में स्वास्थ्य विभाग ने अपना पंजीयन कराया है। बायोमेडिकल बेस्ट के संचालक को रोजाना अस्पताल से निकलने वाले कचरे को ले जाना चाहिए। मगर ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा है। वहीं प्राइवेट अस्पताल संचालकों ने बायोमेडिक बेस्ट में पंजीयन कराना अनिवार्य कर दिया है। बगैर पंजीयन के निजी अस्पतालों का लाइसेंस रिन्यूवल नहीं किया जा रहा है।
जिला व महिला अस्पताल के सीएमएस से अस्पताल की समस्या के बारे में एक रिपोर्ट मांगी जा रही है। जो खामियां होगी उसे दूर कराया जाएगा। शासन की ओर से मिलने वाले समस्त सुविधाओं का लाभ मरीजों तक पहुंचाया जाएगा।
एके श्रीवास्तव, सीएमओ।