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28 महीने में महज 25 प्रतिशत ही बन सका आयुष्मान गोल्डन कार्ड

Sun, 25 Jul 2021 11:43 PM IST
इलाहाबाद ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़ Published by: इलाहाबाद ब्यूरो Updated Sun, 25 Jul 2021 11:43 PM IST
सार

गरीबों को पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज देने के लिए शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना की जिले में हालत खराब है। इस योजना को शुरू हुए करीब 28 माह बीत चुके हैं।

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Ayushman card not made of 53 percent eligible families
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विस्तार

गरीबों को पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज देने के लिए शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना की जिले में हालत खराब है। इस योजना को शुरू हुए करीब 28 माह बीत चुके हैं, मगर स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की लापरवाही से जनपद में महज 25.30 प्रतिशत पात्र परिवारों को ही गोल्डन कार्ड जारी हो सका है। जबकि 53 प्रतिशत पात्र परिवार ऐसे हैं, जिनमें एक भी सदस्य का गोल्डन कार्ड नहीं बनाया जा सका है। इससे पात्र होते हुए भी लाभार्थी परिवार आयुष्मान योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं।
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जिले में आयुष्मान भारत योजना के तहत कुल 888605 पात्र हैं। शासन ने इन्हें पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज की सुविधा दे रखी है, मगर इनमें से महज 224774 लोगों को ही गोल्डन कार्ड जारी हो सका है। यानि सिर्फ 25 प्रतिशत ही ऐसे आयुष्मान योजना के लाभार्थी हैं जो सरकारी के साथ आयुष्मान भारत योजना से इनपैनल प्राइवेट अस्पतालों में इलाज करवा सकते हैं। बाकी लोगों का अब तक गोल्डन कार्ड ही नहीं बनाया गया है।

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जबकि कागज पर लगातार गोल्डन कार्ड बनाने के लिए अभियान चलाए जाने की बात स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अफसर करते हैं। शासन के सर्वे के बाद आई रिपोर्ट में पता चला है कि जिले के 53 प्रतिशत पात्र परिवार ऐसे भी हैं, जिनमें आज तक एक भी गोल्डन कार्ड नहीं बने हैं।

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ऐसे में इन परिवारों के लोगों को कैशलेस उपचार की सुविधा नहीं मिलेगी। इसे देखते हुए 26 जुलाई से आयुष्मान पखवाड़ा चलाए जाने का निर्णय लिया गया है। इस दौरान कैंप लगाकर ज्यादा से ज्यादा लोगों के गोल्डन कार्ड बनवाने का प्रयास किया जाएगा।


लाभ नहीं मिलने पर कार्ड बनवाने से कतरा रहे लोग
जिले के तमाम लोगों ने आयुष्मान योजना के तहत गोल्डन कार्ड बनवाया। उनका कहना है कि इलाज की सुविधा महज सरकारी अस्पतालों तक सीमित है। नर्सिंगहोम संचालक इलाज के नाम पर रुपये मांगते हैं। बहुत से नर्सिंगहोम संचालक ऐसे हैं जो कार्ड दिखाते ही मरीज की हालत गंभीर बताकर प्रयागराज रेफर कर देते हैं। ऐसे में जिन लोगों का कार्ड बन भी गया है, वे अब परिवार के सदस्यों का कार्ड नहीं बनवा रहे हैं।


सभी आरोग्य मित्रों के साथ जनसेवा केंद्र संचालकों को लगाकर छूटे हुए परिवारों का आयुष्मान गोल्डन कार्ड बनवाया जाएगा। जिन परिवारों में किसी भी सदस्यों का अब तक गोल्डन कार्ड नहीं बना है, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।
डॉक्टर सीपी शर्मा, नोडल अफसर, आयुष्मान भारत योजना

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