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अस्पताल वही, दवाएं वही, लेकिन आयुुष्मान कार्ड दिखाने पर 18 सौ रुपये में होगा डायरिया का इलाज
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प्रतापगढ़। सरकारी अस्पतालों में वैसे तो इलाज और दवाएं फ्री हैं, लेकिन आयुष्मान गोल्डन कार्ड लेकर जाने पर लाभार्थियों की बीमित राशि से रुपये काटे जाएंगे। पांच लाख की बीमित धनराशि की इसी तरह कटौती होगी। अस्पताल वही, दवाएं वही, डॉक्टर भी वही, लेकिन आयुष्मान कार्ड दिखाने पर रुपये कटेंगे। 11 हजार रुपये में हाई रिस्क नार्मल प्रसव कराया जा रहा है। जबकि बीस हजार रुपये में हार्निया का ऑपरेशन हो रहा है।
जिले में दो लाख से अधिक आयुष्मान गोल्डन कार्ड धारक हैं। अब तक सरकारी अस्पतालों में 5951 लाभार्थियों का इलाज किया जा चुका है। इनमें ज्यादातर डायरिया और मौसमी बुखार से पीड़ित मरीज शामिल हैं। विभाग के एक कर्मचारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि बिना गोल्डन कार्ड के अस्पताल में आने वाले मरीजों का जहां मुफ्त में इलाज किया जाता है, वहीं गोल्डन कार्ड दिखाने के बाद डायरिया, मौसमी बुखार के इलाज का शुल्क 18 सौ रुपये लगता है। हालांकि, इस रकम को इलाज कराने वाले मरीजों को कैश में नहीं देना होता है। उनकी बीमित धनराशि से यह कटौती होती है। जरूरत पड़ने पर मरीजों को न तो दवा दी जाती है और न ही अल्ट्रासाउंड, एक्सरे, सीटी स्कैन जैसी महंगी जांचें कराई जाती हैं। जांच कराने वाले मरीजों को अपनी जेब से रकम खर्च करनी पड़ती है। इससे मरीज परेशान होते हैं।
विभाग के सूत्र बताते हैं कि हाई रिस्क प्रसव पीड़िताओं का प्रसव नार्मल होने के बाद 11 हजार रुपये की कटौती बीमित धनराशि से होती है। एक आरोग्य मित्र ने बताया कि यहां हर बीमारी पर पैकेज तय है। पैकेज के मुताबिक मरीज की बीमित राशि से कटौती होती है। सरकारी अस्पताल में जहां हार्निया, और पथरी का ऑपरेशन मुफ्त किया जाता है, वहीं आयुष्मान भारत के तहत इलाज कराने पर 16 से 20 हजार रुपये का खर्च आता है। बच्चेदानी का ऑपरेशन कराने पर बीस हजार रुपये के करीब खर्च आता है।
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आयुष्मान से जुड़े हैं छह निजी अस्पताल, चार महीने में 4646 मरीजों के इलाज का दावा
आयुष्मान के लाभार्थियों के इलाज के लिए जिले के छह निजी अस्पतालों को चयनित किया गया है। इनमें शहर के तीन, कुंडा के दो और रानीगंज का एक निजी अस्पताल शामिल है। स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक, चार महीनों में इन अस्पतालों में 4646 मरीजों को भर्ती कर आयुष्मान के तहत इलाज किया जा चुका है। हालांकि, विभाग के अफसर इस पर किसी तरह की जानकारी देने से बच रहे हैं।
निजी अस्पतालों में गोल्डन कार्ड होने के बाद भी लिए जा रहे रुपये
आयुष्मान योजना के तहत चयनित ज्यादातर निजी अस्पताल गोल्डन कार्ड लेकर जाने वाले मरीजों के इलाज में रुचि नहीं ले रहे हैं। गोल्डन कार्ड होने के बाद भी मरीजों से रुपये लिए जा रहे हैं। शिवगढ़ ब्लॉक के राजापुर निवासी अवनीशन ने बताया कि मेरे पिता हार्निया से पीड़ित थे। मैने उनका ऑपरेशन प्रयागराज में कराया, जहां पहले डॉक्टरों ने पांच हजार रुपये लिए। फिर आयुष्मान योजना की बीमित धनराशि से भी रुपये काटे गए। राजगढ़ निवासी विनोद श्रीवास्तव ने बताया कि मेरी मां बीमार थीं। उनका इलाज कराने के लिए शहर के आयुष्मान से इनपैनल सभी अस्पताल में लेकर गया, लेकिन किसी भी अस्पताल ने भर्ती नहीं किया। बेर्रा निवासी अमित कुमार ने बताया कि मैं अपनी बीमार मां का इलाज कराने के लिए गौरा सीएचसी ले गया। वहां डॉक्टरों ने कई फोटो खिंचवाए, फिर पैरासिटामॉल देकर घर भेज दिया। पूछने पर बताया गया कि कार्ड को जेनरेट किया जा रहा है।
आयुष्मान के लाभार्थियों के लिए पैकेज शासन स्तर से तय किया गया है। इसमें हम किसी प्रकार का फेरबदल नहीं कर सकते हैं। सरकारी अस्पतालों में अलग से वार्ड बनाया गया है। कहीं-कहीं दिक्कतें हैं, उन्हें दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। निजी अस्पताल संचालक यदि पैसे ले रहे हैं तो सूचित करें। तत्काल कार्रवाई की जाएगी। -डॉक्टर सीपी शर्मा, एसीएमओ।
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जिले में दो लाख से अधिक आयुष्मान गोल्डन कार्ड धारक हैं। अब तक सरकारी अस्पतालों में 5951 लाभार्थियों का इलाज किया जा चुका है। इनमें ज्यादातर डायरिया और मौसमी बुखार से पीड़ित मरीज शामिल हैं। विभाग के एक कर्मचारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि बिना गोल्डन कार्ड के अस्पताल में आने वाले मरीजों का जहां मुफ्त में इलाज किया जाता है, वहीं गोल्डन कार्ड दिखाने के बाद डायरिया, मौसमी बुखार के इलाज का शुल्क 18 सौ रुपये लगता है। हालांकि, इस रकम को इलाज कराने वाले मरीजों को कैश में नहीं देना होता है। उनकी बीमित धनराशि से यह कटौती होती है। जरूरत पड़ने पर मरीजों को न तो दवा दी जाती है और न ही अल्ट्रासाउंड, एक्सरे, सीटी स्कैन जैसी महंगी जांचें कराई जाती हैं। जांच कराने वाले मरीजों को अपनी जेब से रकम खर्च करनी पड़ती है। इससे मरीज परेशान होते हैं।
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विभाग के सूत्र बताते हैं कि हाई रिस्क प्रसव पीड़िताओं का प्रसव नार्मल होने के बाद 11 हजार रुपये की कटौती बीमित धनराशि से होती है। एक आरोग्य मित्र ने बताया कि यहां हर बीमारी पर पैकेज तय है। पैकेज के मुताबिक मरीज की बीमित राशि से कटौती होती है। सरकारी अस्पताल में जहां हार्निया, और पथरी का ऑपरेशन मुफ्त किया जाता है, वहीं आयुष्मान भारत के तहत इलाज कराने पर 16 से 20 हजार रुपये का खर्च आता है। बच्चेदानी का ऑपरेशन कराने पर बीस हजार रुपये के करीब खर्च आता है।
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आयुष्मान से जुड़े हैं छह निजी अस्पताल, चार महीने में 4646 मरीजों के इलाज का दावा
आयुष्मान के लाभार्थियों के इलाज के लिए जिले के छह निजी अस्पतालों को चयनित किया गया है। इनमें शहर के तीन, कुंडा के दो और रानीगंज का एक निजी अस्पताल शामिल है। स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक, चार महीनों में इन अस्पतालों में 4646 मरीजों को भर्ती कर आयुष्मान के तहत इलाज किया जा चुका है। हालांकि, विभाग के अफसर इस पर किसी तरह की जानकारी देने से बच रहे हैं।
निजी अस्पतालों में गोल्डन कार्ड होने के बाद भी लिए जा रहे रुपये
आयुष्मान योजना के तहत चयनित ज्यादातर निजी अस्पताल गोल्डन कार्ड लेकर जाने वाले मरीजों के इलाज में रुचि नहीं ले रहे हैं। गोल्डन कार्ड होने के बाद भी मरीजों से रुपये लिए जा रहे हैं। शिवगढ़ ब्लॉक के राजापुर निवासी अवनीशन ने बताया कि मेरे पिता हार्निया से पीड़ित थे। मैने उनका ऑपरेशन प्रयागराज में कराया, जहां पहले डॉक्टरों ने पांच हजार रुपये लिए। फिर आयुष्मान योजना की बीमित धनराशि से भी रुपये काटे गए। राजगढ़ निवासी विनोद श्रीवास्तव ने बताया कि मेरी मां बीमार थीं। उनका इलाज कराने के लिए शहर के आयुष्मान से इनपैनल सभी अस्पताल में लेकर गया, लेकिन किसी भी अस्पताल ने भर्ती नहीं किया। बेर्रा निवासी अमित कुमार ने बताया कि मैं अपनी बीमार मां का इलाज कराने के लिए गौरा सीएचसी ले गया। वहां डॉक्टरों ने कई फोटो खिंचवाए, फिर पैरासिटामॉल देकर घर भेज दिया। पूछने पर बताया गया कि कार्ड को जेनरेट किया जा रहा है।
आयुष्मान के लाभार्थियों के लिए पैकेज शासन स्तर से तय किया गया है। इसमें हम किसी प्रकार का फेरबदल नहीं कर सकते हैं। सरकारी अस्पतालों में अलग से वार्ड बनाया गया है। कहीं-कहीं दिक्कतें हैं, उन्हें दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। निजी अस्पताल संचालक यदि पैसे ले रहे हैं तो सूचित करें। तत्काल कार्रवाई की जाएगी। -डॉक्टर सीपी शर्मा, एसीएमओ।