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Pratapgarh News: पिंक आई संक्रमण का वार, पीड़ित बच्चों की भरमार

Wed, 26 Jul 2023 09:15 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़ Updated Wed, 26 Jul 2023 09:15 PM IST
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Attack of pink eye infection, lot of children suffering
प्रताप बहादुर चिकित्सालय ओपीडी में मरीजों की आंख चेक करते डॉ. विवेक त्रिपाठी। संवाद
460 से अधिक मरीज बुधवार को पिंक आई की समस्या लेकर पहुंचे अस्पताल
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संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। मौसम में हो रहे बदलाव की वजह से लोगों की आंखों में पिंक आई संक्रमण तेजी से फैल रहा है। राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय के नेत्र रोग विभाग की ओपीडी में कंजक्टिवाइटिस पीड़ित मरीजों की भरमार है। पीड़ितों में बच्चों की संख्या अधिक है। अधिकतर बच्चों में पिंक आई संक्रमण था। ओपीडी में बुधवार को 460 से अधिक मरीज कंजक्टिवाइटिस का उपचार कराने पहुंचे थे।
नेत्र रोग विभाग की ओपीडी में आंखें लाल या गुलाबी होने, आंखों में सूजन, कीचड़ आने, पानी बहने का इलाज कराने लोग पहुंचे थे। पिंक आई संक्रमण से पीड़ितों में बच्चे अधिक रहे। चिकित्सकों ने दवा देकर पीड़ितों को घर से बाहर कम निकलने और अन्य लोगों से दूर से रहने की सलाह दी।
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नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. विवेक त्रिपाठी ने बताया कि गुलाबी आंख संक्रमण (पिंक आई इंफेक्शन) कई अलग-अलग प्रकार के बैक्टीरिया के कारण हो सकता है। इससे संक्रमिक व्यक्ति को आंखों की पलकों के अंदर लालिमा और सूजन आ जाती है। संक्रमित की आंखें गुलाबी होने के साथ सर्दी-जुकाम या गले में खराश भी हो सकती है। ओपीडी में इस तरह लक्षण के साथ आने वाले मरीजों में सबसे ज्यादा संख्या बच्चों की है। उन्होंने बताया कि यह एक संक्रामक रोग है। जो एडेनो वायरस जैसे सामान्य वायरस से होती है।
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डॉ. विवेक के मुताबिक स्कूल में गुलाबी आंख संक्रमण पीड़ित बच्चे से दूसरे बच्चों में इसका तेजी से प्रसार होने की आशंका रहती है। ऐसे संक्रमित बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहिए। आंखों के संक्रमण से पीड़ित मरीजों को ठीक होने में एक से डेढ़ सप्ताह का समय लगता है। उन्होंने बताया कि संक्रमण परिलक्षित हों तो फौरन चिकित्सक को दिखाएं और काला चश्मा पहनें। स्वच्छता का पालन करते हुए साफ-सफाई से रहें।
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संचालकों की अपील, बच्चे को आंखों में है संक्रमण तो न भेजें स्कूल
निजी अस्पताल संचालकों ने अभिभावकों के पास मैसेज भेजकर यह अपील कर रहे हैं कि यदि बच्चों की आंख लाल या गुलाबी दिखे तो उन्हें स्कूल न भेजकर किसी डॉक्टर के पास ले जाकर पहले इलाज कराएं।

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ऐसे फैलता है संक्रमण
यह संक्रमण दूषित हाथों, मेकअप या कॉन्टैक्ट लेंस जैसे सोर्स से बैक्टीरिया के संपर्क में आने के कारण हो सकता है। एलर्जिक रिएक्शन एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस तब होता है, जब कंजंक्टिवा पराग, धूल के कण, पालतू जानवरों के फर, या कुछ दवाओं जैसे एलर्जी के प्रति रिएक्शन करती हैं। छोटे बच्चों में अश्रु नलिका पूरी तरह खुली न होने से भी समस्या होती है। आंखे जब किसी रसायन के संपर्क में आती हैं या उनमे बाहरी चीज चली जाती है।
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लक्षण--
आंखों का लाल या गुलाबी होना या उनमें जलन होना
आंखों से लगातार आंसू या गाढ़ा कीचड़ निकलना
आंखों में किरकिरी महसूस होना और सूजन आना
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ऐसे करें बचाव-
आंखों को अपने हाथ से न छुएं
तौलिया, तकिया और मेकअप किसी से साझा न करें
रुमाल, तकिया के कवर, तौलिया को रोज धोएं

प्रताप बहादुर चिकित्सालय ओपीडी में मरीजों की आंख चेक करते डॉ. विवेक त्रिपाठी। संवाद

प्रताप बहादुर चिकित्सालय ओपीडी में मरीजों की आंख चेक करते डॉ. विवेक त्रिपाठी। संवाद

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