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प्रतापगढ़ : नायब नाजिर की मौत के बाद एसडीएम पर गिरी गाज, मजिस्ट्रियल जांच के आदेश

Sun, 03 Apr 2022 12:08 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़ Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 03 Apr 2022 12:08 AM IST
सार

नगर कोतवाली के विवेक नगर निवासी सुनील कुमार शर्मा लालगंज तहसील में नायब नाजिर के पद पर कार्यरत थे। 31 मार्च की रात सुनील ने एसडीएम लालगंज ज्ञानेंद्र विक्रम पर पिटाई का आरोप लगाते हुए पुलिस को तहरीर दी थी।

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After the death of Naib Nazir the SDM fell, orders for magisterial inquiry
प्रतापगढ़ : मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान नायब नाजिर को पंफ करता दिखा आरोपी एसडीएम। फाइल फोटो - फोटो : प्रतापगढ़

विस्तार

पिटाई से घायल नायब नाजिर सुनील कुमार शर्मा की मौत के बाद जिलाधिकारी डॉ. नितिन बंसल ने आरोपी एसडीएम ज्ञानेंद्र विक्रम सिंह को लालगंज तहसील से हटा दिया। उन्हें जिला मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया। डीएम ने घटना की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। पहले इस मामले की जांच सीआरओ कर रहे थे, लेकिन वह घायल नायब नाजिर का बयान नहीं दर्ज कर सके। 

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नगर कोतवाली के विवेक नगर निवासी सुनील कुमार शर्मा लालगंज तहसील में नायब नाजिर के पद पर कार्यरत थे। 31 मार्च की रात सुनील ने एसडीएम लालगंज ज्ञानेंद्र विक्रम पर पिटाई का आरोप लगाते हुए पुलिस को तहरीर दी थी। मामले के तूल पकड़ने के बाद शुक्रवार को जिलाधिकारी डॉ. नितिन बंसल ने सीआरओ को घटना की जांच सौंपी थी। सीआरओ की जांच पूरी होने से पहले ही शनिवार की रात मेडिकल कालेज में उपचार के दौरान सुनील की मौत हो गई।
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सीआरओ उसका बयान नहीं दर्ज कर सके। इसके बाद जिलाधिकारी ने पिटाई के आरोपी एसडीएम ज्ञानेंद्र विक्रम को लालगंज तहसील से हटाते हुए जिला मुख्यालय से संबद्ध कर दिया। उनके स्थान पर अरुण सिंह को लालगंज का नया एसडीएम बनाया गया है। जिलाधिकारी ने बताया कि मामले की मजिस्ट्रियल जांच के निर्देश दिए गए हैं। मृतक के परिवार के एक सदस्य को नौकरी के साथ ही आर्थिक मदद मुहैया कराई जाएगी। वीडियोग्राफी के बीच डाक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम कराया जाएगा। परिवार के लोगों की जो भी मांगे हैं, उन्हें पूरा कराया जाएगा। 

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चोट दिखाकर लगाता रहा गुहार, मामले को दबाने में जुटी रही पुलिस

लालगंज तहसील में कार्यरत नायब नाजिर सुनील शर्मा ने एसडीएम ज्ञानेंद्र विक्रम पर पिटाई का आरोप लगाते हुए पुलिस को तहरीर दी थी। एसडीएम पर सीधे आरोप होने के बाद पुलिस इस मामले को दबाने में जुट गई। पुलिस ने उसकी तहरीर मिलने से ही इनकार कर दिया। पीठ पर चोटों के निशान लेकर सुनील इंसाफ की गुहार लगाता रहा, लेकिन पुलिस और प्रशासन के अफसरों ने चुप्पी साध ली।  



मामले में लीपापोती चलती रही। यहां तक कि प्रशासनिक अधिकारियों के दबाव में ट्रामा सेंटर में भर्ती सुनील से किसी को नहीं मिलने दिया गया। मेडिकल कॉलेज में ओटी में रखकर प्राचार्य डॉ. आर्य देशदीपक उसका इलाज कर रहे थे। इस बीच वहां पहुंचे कर्मचारियों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। बवाल बढ़ते देख प्राचार्य कर्मचारी को मृत घोषित करते हुए पीछे के रास्ते से निकल गए। परिजनों संग कर्मचारी आरोपी एसडीएम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की जिद पर अड़े रहे।

30 मार्च को की गई थी पिटाई

लालगंज के तहसील कर्मचारी सुनील शर्मा को 30 मार्च को आवासीय परिसर में ही पीटा गया था। सुनील शर्मा ने दूसरे दिन एसडीएम लालगंज ज्ञानेंद्र विक्रम पर पिटाई का आरोप लगाते हुए लालगंज पुलिस को तहरीर देते हुए मेडिकल कराने की मांग की। मगर उसका मेडिकल नहीं हुुआ। मजबूर होकर वह अपने कुछ साथियों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचा। अधिकारियों को अपने पीठ पर उभरे पिटाई के निशान दिखाए, मगर किसी का दिल नहीं पसीजा। किसी तरह मेडिकल कॉलेज में उसने मेडिकल कराया।



इसके बाद भी पुलिस मुकदमा दर्ज करने से कन्नी काटती रही। शुक्रवार की रात हालत बिगड़ने पर उसे उपचार के लिए ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया, मगर उससे किसी को मिलने नहीं दिया जा रहा था। स्थानीय तहसील के अधिकारी पीड़ित कर्मचारी सुनील से किसी को मिलने नहीं दे रहे थे। उसकी हालत बिगड़ती देख डॉक्टरों ने शनिवार सुबह करीब नौ बजे उसे मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया, मगर प्रशासनिक अधिकारियों के दबाव के चलते सुनील को नहीं भेजा जा रहा था। दोपहर करीब दो बजे काफी जद्दोजहद के बाद सुनील को मेडिकल कॉलेज भेजा गया। यहां उपचार के दौरान उसकी हालत बिगड़ती ही जा रही थी।

मेडिकल कॉलेज में भर्ती नायब से नहीं मिल पाया कोई

ईएमओ डॉ. आशुतोष सिंह ने सुनील की हालत गंभीर देख उसे प्रयागराज रेफर कर दिया, मगर कुछ स्वास्थ्य कर्मचारियों ने यहीं फिर से उसका उपचार शुरू कर दिया। यहां तक कि एंबुलेंस से उतारकर ओटी में ले जाया गया। वहां इलाज करने का दावा किया जाता रहा। हालांकि तमाम प्रयास के बाद भी सुनील की मौत हो गई। इलाज की बाबत कोई जानकारी न देने पर आक्रोशित कर्मचारी हंगामा करने लगे।



ओटी के भीतर मौजूद प्राचार्य डॉ. आर्य देशदीपक समेत चिकित्सक किसी को मिलने नहीं दे रहे थे। सभी को गेट पर ही रोक दिया गया था। जिससे आक्रोशित कर्मचारी गेट तोड़ने का प्रयास करने लगे। बवाल की खबर मिलने के बाद पुलिस पहुंच गई। फिर भी लोग नाराजगी जताते हुए नारेबाजी करते रहे। सीओ सिटी अभय पांडेय सभी को समझाने का प्रयास करते रहे, लेकिन कोई मानने के लिए तैयार नहीं था।



कुछ देर बाद प्राचार्य ने सुनील शर्मा को मृत घोषित करते हुए शव परिजनों के हवाले कर दिया। खुद बवाल से बचने के लिए पीछे के रास्ते से निकल गए। शव को मोर्चरी भेजने के लिए एंबुलेंस में रखवा दिया। इस बीच परिजनों संग कर्मचारी तत्काल आरोपी एसडीएम के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने व गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे। खबर लिखे जाने तक अस्पताल में एंबुलेंस में ही शव रखा था।

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