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स्टेडियम निर्माण में अनियमितता पकड़ने वाला एई लखनऊ संबद्ध
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जिले के आसपुर देवसरा ग्राम पंचायत में निर्मित स्टेडियम में अनियमितता पकड़ने वाले सहायक अभियंता को लखनऊ से संबद्ध कर दिया गया है। इधर साल भर से तीन करोड़ रुपये का भुगतान करने के बाद भी महज दस प्रतिशत ही निर्माण कार्य होने पर अफसरों ने नाराजगी प्रकट करते हुए शासन को रिपोर्ट भेजी है।
युवा कल्याण एवं प्रांतीय विकास दल विभाग से जिले के आसपुर देवसरा विकास खंड के आसपुर देवसरा गांव में पांच एकड़ जमीन पर स्टेडियम का निर्माण कराने के लिए 5.43 करोड़ रुपये मंजूर हैं। स्टेडियम का निर्माण कराने की जिम्मेदारी आरईएस को सौंपी गई है।
आसपुर देवसरा में निर्मित होने वाले स्टेडियम के लिए युवा कल्याण विभाग ने फरवरी 2019 में तीन करोड़ रुपये का भुगतान किया। रुपये दबाकर बैठने वाले विभाग की आंखे उस समय खुली, जब शासन ने नोटिस जारी कर दिया। इधर, ठेकेदार ने निर्माण कार्य प्रारंभ किया तो डीएम की ओर से नामित डीआरडीए के एई अनिल श्रीवास्तव और डीओ अरुण सिंह मामले की जांच करने पहुंच गए।
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तकनीकी जांच करने वाले एई ने ठेकेदार को फटकार लगाई और गुणवत्ता सुधारने की हिदायत दी। फिर क्या था, सप्ताह भर भी नहीं बीता और उन्हें लखनऊ स्थित मुख्यालय संबद्ध कर दिया गया। जबकि महीने भर पहले ही उनकी जिले में तैनाती हुई थी। अब आलम यह है कि कोई अधिकारी गुणवत्ता खंगालने नहीं जा रहा है।
भुगतान के एवज में विकास कार्य नहीं कराए गए हैं। अभी महज दस प्रतिशत निर्माण हुआ है। निर्माण कार्य में गुणवत्ता सुधारने के लिए कहा गया है। आरईएस जल्द निर्माण पूरा करने की बात कह रहा है, मगर मेरे गले के नीचे नहीं उतर रहा है।
अरुण सिंह, प्रभारी, जिला युवा कल्याण अधिकारी
निर्माण कार्य में कोई अनियमितता नहीं बरती जा रही है, तीन करोड़ रुपये हमें मिले हुए हैं। ठेकेदार जितना कार्य करा रहा है, उतना ही भुगतान किया जा रहा है। एनके दुबे, अधिशासी अभियंता, आरईएस
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युवा कल्याण एवं प्रांतीय विकास दल विभाग से जिले के आसपुर देवसरा विकास खंड के आसपुर देवसरा गांव में पांच एकड़ जमीन पर स्टेडियम का निर्माण कराने के लिए 5.43 करोड़ रुपये मंजूर हैं। स्टेडियम का निर्माण कराने की जिम्मेदारी आरईएस को सौंपी गई है।
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आसपुर देवसरा में निर्मित होने वाले स्टेडियम के लिए युवा कल्याण विभाग ने फरवरी 2019 में तीन करोड़ रुपये का भुगतान किया। रुपये दबाकर बैठने वाले विभाग की आंखे उस समय खुली, जब शासन ने नोटिस जारी कर दिया। इधर, ठेकेदार ने निर्माण कार्य प्रारंभ किया तो डीएम की ओर से नामित डीआरडीए के एई अनिल श्रीवास्तव और डीओ अरुण सिंह मामले की जांच करने पहुंच गए।
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तकनीकी जांच करने वाले एई ने ठेकेदार को फटकार लगाई और गुणवत्ता सुधारने की हिदायत दी। फिर क्या था, सप्ताह भर भी नहीं बीता और उन्हें लखनऊ स्थित मुख्यालय संबद्ध कर दिया गया। जबकि महीने भर पहले ही उनकी जिले में तैनाती हुई थी। अब आलम यह है कि कोई अधिकारी गुणवत्ता खंगालने नहीं जा रहा है।
भुगतान के एवज में विकास कार्य नहीं कराए गए हैं। अभी महज दस प्रतिशत निर्माण हुआ है। निर्माण कार्य में गुणवत्ता सुधारने के लिए कहा गया है। आरईएस जल्द निर्माण पूरा करने की बात कह रहा है, मगर मेरे गले के नीचे नहीं उतर रहा है।
अरुण सिंह, प्रभारी, जिला युवा कल्याण अधिकारी
निर्माण कार्य में कोई अनियमितता नहीं बरती जा रही है, तीन करोड़ रुपये हमें मिले हुए हैं। ठेकेदार जितना कार्य करा रहा है, उतना ही भुगतान किया जा रहा है। एनके दुबे, अधिशासी अभियंता, आरईएस