{"_id":"5c27cf62bdec2256cf3e88a5","slug":"a-assassin-of-the-chief-prisoner-was-assaulted-by-police","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रधान बंदीरक्षक का एक हत्यारोपी पुलिस के हत्थे चढ़ा!","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रधान बंदीरक्षक का एक हत्यारोपी पुलिस के हत्थे चढ़ा!
Sun, 30 Dec 2018 01:21 AM IST
shailendra Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
Published by: shailendra Kumar
Updated Sun, 30 Dec 2018 01:21 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
प्रतापगढ़। जेल के प्रधान बंदीरक्षक का एक हत्यारोपी पुलिस के हत्थे चढ़ गया। जिससे पुलिस अधीक्षक लगातार पूछताछ कर रहे हैं। उससे पूछताछ के बाद पुलिस घटना की कड़ी जोड़ने में जुटी हुई है। शूटर की तलाश में पुलिस ने संभावित स्थानों पर दबिश दी, लेकिन पहुंचने के पहले ही उसने अपना ठिकाना बदल दिया था। शनिवार को जेल में निरुद्ध बंदियों व उनसे मिलने जुलने वालों का ब्योरा एसटीएफ खंगालती रही।
जेल में तैनात प्रधान बंदीरक्षक हरिनारायण त्रिवेदी की गुरुवार की शाम जेल रोड क्रासिंग पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। प्रधान बंदीरक्षक की हत्या करने के बाद दोनों नकाबपोश बदमाश कंधई की ओर भाग निकले थे। दो दिन से लगातार कोतवाली व स्वाट टीम संदिग्ध बदमाशों की धरपकड़ में जुटी हुई थी। पुलिस सूत्रों की मानें तो गैस एजेंसी लूटने वाले बदमाशों से पूछताछ के बाद पुलिस को प्रधान बंदीरक्षक की हत्या करने वाले शूटरों व उनके मददगारों के बारे में जानकारी लग गई। पुलिस ने घटना में शामिल एक बदमाश को दबोच लिया। उसे कर्रा करने पर यह पता चला कि प्रधान बंदीरक्षक की हत्या किसने की। उसे ही हत्या का राज भी मालूम है। पुलिस ने शूटर को पकड़ने के लिए शुक्रवार की रात जाल भी बिछाया, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। हालांकि संभावित स्थानों पर पुलिस पकड़े गए बदमाश की निशानदेही पर दबिश पर दबिश देती रही। दूसरी ओर एसटीएफ व कोतवाली पुलिस ने जेल में खूंखार बंदियों के साथ ही 10 दिन के भीतर उनसे मिलने वाले लोगों का ब्यौरा खंगालती रही। ताकि घटना की असलियत तक पहुंच सके। पुलिस अधीक्षक एस आनंद लगातार पकड़े गए बदमाश से पूछताछ कर रहे हैं। एसपी ने बताया कि अभी कुछ संदिग्ध लोग पकड़े गए हैं। उनसे पूछताछ की जा रही है। संभावना है कि जल्द ही हत्या का खुलासा होगा।
जिला कारागार में निरुद्ध शातिर बंदियों से लगातार पूछताछ चल रही है। इतना ही नहीं दिन व रात में कई बार बैरकों की सघन तलाशी ली जा रही है। शातिर बंदियों से पुलिस के अलावा खुद जेलर व डिप्टी जेलर भी पूछताछ कर रहे हैं। ताकि घटना को लेकर हकीकत का पता लग सके। शनिवार को भी कार्यालयों में बुलाकर शातिर बंदियों से अफसर पूछताछ करते रहे। बैरक नंबर आठ में निरुद्ध सभी बंदियों से अलग-अलग पूछताछ की गई। ताकि पहले हुए विवाद की जानकारी हो सके।
जेल में तैनात प्रधान बंदीरक्षक हरिनारायण त्रिवेदी की गुरुवार की शाम जेल रोड क्रासिंग पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। प्रधान बंदीरक्षक की हत्या करने के बाद दोनों नकाबपोश बदमाश कंधई की ओर भाग निकले थे। दो दिन से लगातार कोतवाली व स्वाट टीम संदिग्ध बदमाशों की धरपकड़ में जुटी हुई थी। पुलिस सूत्रों की मानें तो गैस एजेंसी लूटने वाले बदमाशों से पूछताछ के बाद पुलिस को प्रधान बंदीरक्षक की हत्या करने वाले शूटरों व उनके मददगारों के बारे में जानकारी लग गई। पुलिस ने घटना में शामिल एक बदमाश को दबोच लिया। उसे कर्रा करने पर यह पता चला कि प्रधान बंदीरक्षक की हत्या किसने की। उसे ही हत्या का राज भी मालूम है। पुलिस ने शूटर को पकड़ने के लिए शुक्रवार की रात जाल भी बिछाया, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। हालांकि संभावित स्थानों पर पुलिस पकड़े गए बदमाश की निशानदेही पर दबिश पर दबिश देती रही। दूसरी ओर एसटीएफ व कोतवाली पुलिस ने जेल में खूंखार बंदियों के साथ ही 10 दिन के भीतर उनसे मिलने वाले लोगों का ब्यौरा खंगालती रही। ताकि घटना की असलियत तक पहुंच सके। पुलिस अधीक्षक एस आनंद लगातार पकड़े गए बदमाश से पूछताछ कर रहे हैं। एसपी ने बताया कि अभी कुछ संदिग्ध लोग पकड़े गए हैं। उनसे पूछताछ की जा रही है। संभावना है कि जल्द ही हत्या का खुलासा होगा।
विज्ञापन
जिला कारागार में निरुद्ध शातिर बंदियों से लगातार पूछताछ चल रही है। इतना ही नहीं दिन व रात में कई बार बैरकों की सघन तलाशी ली जा रही है। शातिर बंदियों से पुलिस के अलावा खुद जेलर व डिप्टी जेलर भी पूछताछ कर रहे हैं। ताकि घटना को लेकर हकीकत का पता लग सके। शनिवार को भी कार्यालयों में बुलाकर शातिर बंदियों से अफसर पूछताछ करते रहे। बैरक नंबर आठ में निरुद्ध सभी बंदियों से अलग-अलग पूछताछ की गई। ताकि पहले हुए विवाद की जानकारी हो सके।
विज्ञापन