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बकुलाही में डूबे चार किशोर
Pratapgarh
Updated Mon, 19 Aug 2013 05:34 AM IST
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राजगढ़। बकुलाही नदी में नहाने गए आठ में चार किशोरों पर मौत झपट पड़ी। इन्हें डूबते देख साथी वहां से भाग खड़े हुए। नदी में लटक रहे बांस के सहारे बाहर निकले एक किशोर की दहशत भरी आवाज सुन पास स्थित कोटपुरवा के ग्रामीण दौड़ पड़े। ग्रामीणों ने डूब रहे दो किशोरों को किसी तरह बचा लिया जबकि एक नदी में समा गया। लोगों ने सूचना पर परिजनों में कोहराम मच गया। सूचना के बाद भी मदद के लिए प्रशासन का कोई नुमाइंदा मौके पर नहीं पहुंचा।
सदर तहसील के राजगढ़ की दलित बस्ती बकुलाही नदी के पास में है। रविवार दोपहर करीब एक बजे बस्ती के कुलदीप (12) पुत्र गोविंद हरिजन, दिनेश (10) पुत्र रामसुमेर, सुपारी (13) व महेन्द्र (11) पुत्र बेचू लाल, कर्मवीर (12) पुत्र तुलसीराम, अभिषेक (15) पुत्र हरिकेश, आकाश (12) पुत्र लल्लू एक साथ नदी में नहाने के लिए तिगुनाइतपुर घाट गए। कुलदीप, दिनेश, सुपारी नहाने के लिए नदी में कूदने के साथ ही तेज बहाव की चपेट में आकर डूबने लगे। इन्हें डूबता देख कर्मवीर ने सभी को बचाने के लिए नदी में छलांग लगा दी। वह भी बहाव के आगे कमजोर पड़ गया और डूबने लगा। यह देख साथ में मौजूद अन्य साथी वहां से भाग कर घर पहुंच गए, मगर डर के चलते किसी को सूचना नहीं दी। कर्मवीर बहता हुआ कुछ दूर गया तो उसके हाथ नदी में लटक रहे बांस की एक शाखा आ गई। इसी के सहारे वह बाहर निकला और शोर मचाने लगा। इसकी आवाज सुन पहुंचे कोटपुरवा के ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत से दिनेश व सुपारी को बचा लिया जबकि कुलदीप नदी में समा गया। कुलदीप की तलाश करने के साथ लोगों ने सूचना उसके परिजनों को दी। सूचना मिलते ही पूरा गांव नदी के किनारे उमड़ पड़ा। कुलदीप को नदी में खोजने की सारी कोशिश देर शाम तक नाकाम रही। उधर इसके परिजनों का विलाप सुन पूरे गांव का हृदय द्रवित रहा। ग्रामीणों के मुताबिक सूचना पुलिस को दी गई। इसके बाद भी कोई सिपाही समय पर नहीं पहुंचा।
डूब रहे साथी को बचाने के लिए नदी में कूदा कर्मवीर काफी दु:खी है। कुलदीप को न बचा पाने का गम उसके चेहरे पर तैर रहा है। उसकी आंख से आंसुओं की धार थमने का नाम नहीं ले रही है। वह कहता है कि जब तीन साथी डूबने लगे तो बचाने के लिए मौत की परवाह किए बगैर नदी में कूद पड़ा। नदी का बहाव बहुत तेज होने के कारण वह उन्हें नहीं निकाल सका। वह हाथ पांव मारते हुए डूब रहे कुलदीप के पास पहुंचा। उसको जैसे ही पकड़ा कि वह भी डूबने लगा। दोनों पानी के साथ डूबते उतराते बहने लगे। अचानक नदी की धारा तक लटक रहा एक बांस उसकी पकड़ में आ गया। वह कुलदीप का हाथ पकड़ वह खींचने लगा। मगर कुलदीप का हाथ पानी के बहाव में छूट गया और वह काफी दूर चला गया। उसी बांस के सहारे वह बाहर निकला। मैं दोस्त कुलदीप को नहीं बचा सका। नदी में मौत से जंग लड़ने के बाद जिंदा बचे दिनेश (10), सुपारी (13) व कर्मवीर के जेहन में दहशत की काली छाया अब भी है। झपटी मौत को अपनी आंखों से देखने वाले इन किशोरों की आंखों में दहशत साफ झलक रही है। दिनेश व सुपारी के मुंह से तो कोई शब्द ही नहीं निकल रहा था। सदमे के चलते इन दोनों किशोरों की खामोशी तमाम सवालों के बाद भी नहीं टूटी। कुलदीप का नाम लेते ही ये फूट-फूट कर रोने लगते हैं। बारिश शुरू होते ही डीएम विद्याभूषण ने सतर्कता बरतने के सख्त निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा था कि गोताखोर की व्यवस्था के साथ बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों की निगरानी बढ़ा दी जाए। तिगुनाईपुर घाट की घटना और प्रशासनिक असहयोग इस बात का गवाह है कि डीएम के इन निर्देशों पर कोई अमल नहीं हुआ। कोटपुरवा व राजगढ़ के हरिजन बस्ती के निवासियों के मुताबिक सूचना तत्काल पुलिस चौकी व प्रशासनिक अफसरों को दी गई। इसके बाद भी गोताखोर व अफसर तो दूर सिपाही तक समय से नहीं पहुंच सके। लोगों का कहना है कि यदि गोताखोर समय से पहुंच जाते तो नदी में समाए कुलदीप को खोजा जा सकता था।
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सदर तहसील के राजगढ़ की दलित बस्ती बकुलाही नदी के पास में है। रविवार दोपहर करीब एक बजे बस्ती के कुलदीप (12) पुत्र गोविंद हरिजन, दिनेश (10) पुत्र रामसुमेर, सुपारी (13) व महेन्द्र (11) पुत्र बेचू लाल, कर्मवीर (12) पुत्र तुलसीराम, अभिषेक (15) पुत्र हरिकेश, आकाश (12) पुत्र लल्लू एक साथ नदी में नहाने के लिए तिगुनाइतपुर घाट गए। कुलदीप, दिनेश, सुपारी नहाने के लिए नदी में कूदने के साथ ही तेज बहाव की चपेट में आकर डूबने लगे। इन्हें डूबता देख कर्मवीर ने सभी को बचाने के लिए नदी में छलांग लगा दी। वह भी बहाव के आगे कमजोर पड़ गया और डूबने लगा। यह देख साथ में मौजूद अन्य साथी वहां से भाग कर घर पहुंच गए, मगर डर के चलते किसी को सूचना नहीं दी। कर्मवीर बहता हुआ कुछ दूर गया तो उसके हाथ नदी में लटक रहे बांस की एक शाखा आ गई। इसी के सहारे वह बाहर निकला और शोर मचाने लगा। इसकी आवाज सुन पहुंचे कोटपुरवा के ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत से दिनेश व सुपारी को बचा लिया जबकि कुलदीप नदी में समा गया। कुलदीप की तलाश करने के साथ लोगों ने सूचना उसके परिजनों को दी। सूचना मिलते ही पूरा गांव नदी के किनारे उमड़ पड़ा। कुलदीप को नदी में खोजने की सारी कोशिश देर शाम तक नाकाम रही। उधर इसके परिजनों का विलाप सुन पूरे गांव का हृदय द्रवित रहा। ग्रामीणों के मुताबिक सूचना पुलिस को दी गई। इसके बाद भी कोई सिपाही समय पर नहीं पहुंचा।
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डूब रहे साथी को बचाने के लिए नदी में कूदा कर्मवीर काफी दु:खी है। कुलदीप को न बचा पाने का गम उसके चेहरे पर तैर रहा है। उसकी आंख से आंसुओं की धार थमने का नाम नहीं ले रही है। वह कहता है कि जब तीन साथी डूबने लगे तो बचाने के लिए मौत की परवाह किए बगैर नदी में कूद पड़ा। नदी का बहाव बहुत तेज होने के कारण वह उन्हें नहीं निकाल सका। वह हाथ पांव मारते हुए डूब रहे कुलदीप के पास पहुंचा। उसको जैसे ही पकड़ा कि वह भी डूबने लगा। दोनों पानी के साथ डूबते उतराते बहने लगे। अचानक नदी की धारा तक लटक रहा एक बांस उसकी पकड़ में आ गया। वह कुलदीप का हाथ पकड़ वह खींचने लगा। मगर कुलदीप का हाथ पानी के बहाव में छूट गया और वह काफी दूर चला गया। उसी बांस के सहारे वह बाहर निकला। मैं दोस्त कुलदीप को नहीं बचा सका। नदी में मौत से जंग लड़ने के बाद जिंदा बचे दिनेश (10), सुपारी (13) व कर्मवीर के जेहन में दहशत की काली छाया अब भी है। झपटी मौत को अपनी आंखों से देखने वाले इन किशोरों की आंखों में दहशत साफ झलक रही है। दिनेश व सुपारी के मुंह से तो कोई शब्द ही नहीं निकल रहा था। सदमे के चलते इन दोनों किशोरों की खामोशी तमाम सवालों के बाद भी नहीं टूटी। कुलदीप का नाम लेते ही ये फूट-फूट कर रोने लगते हैं। बारिश शुरू होते ही डीएम विद्याभूषण ने सतर्कता बरतने के सख्त निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा था कि गोताखोर की व्यवस्था के साथ बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों की निगरानी बढ़ा दी जाए। तिगुनाईपुर घाट की घटना और प्रशासनिक असहयोग इस बात का गवाह है कि डीएम के इन निर्देशों पर कोई अमल नहीं हुआ। कोटपुरवा व राजगढ़ के हरिजन बस्ती के निवासियों के मुताबिक सूचना तत्काल पुलिस चौकी व प्रशासनिक अफसरों को दी गई। इसके बाद भी गोताखोर व अफसर तो दूर सिपाही तक समय से नहीं पहुंच सके। लोगों का कहना है कि यदि गोताखोर समय से पहुंच जाते तो नदी में समाए कुलदीप को खोजा जा सकता था।
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