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दुधमुंही को भर्ती कर चली गई मां
Pratapgarh
Updated Fri, 25 Jan 2013 05:30 AM IST
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प्रतापगढ़। क्रूर दिल कलयुगी मां एक दिन की फूल सी बच्ची को अस्पताल में तड़पते हुए छोड़ भाग खड़ी हुई। बेशर्मी की हद यह रही कि उसने अस्पताल में खुद का नाम व पता तक फर्जी लिखाया। इलाज के दौरान बच्ची की मौत हो गई। काफी प्रयास के बाद भी बच्ची की मां का पता नहीं चला तो स्वास्थ्य कर्मियों ने उसको पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। देर शाम तक उसका पोस्टमार्टम परिजन के अभाव में नहीं हो सका।
जिला महिला अस्पताल में बुधवार को दूसरे पहर करीब 3.30 बजे एक महिला एक दिन की बच्ची को लेकर पहुंची। बच्ची को बीमार बताते हुए भर्ती करा दिया। खुद का नाम महिला ने राजकुमारी व जिले के संग्रामपुर थाना स्थित संग्रामपुर गांव निवासिनी अस्पताल में दर्ज करा दिया। इसके बाद डॉक्टर बच्ची को एसएनसीयू में भर्ती कर उपचार शुरू कर दिए। रात में पत्थर दिल महिला मां की ममता का खून करते हुए तड़पती बच्ची को छोड़ फरार हो गई। डॉक्टर उसका इलाज करते रहे। गुरुवार की सुबह लगभग 6.45 पर बच्ची की मौत हो गई। यह जानकारी देने के लिए डॉक्टर महिला की खोज में जुट गए। दोपहर तक उसका कोई पता नहीं चल सका। डॉक्टरों को काफी खोजबीन के बाद समझ आया कि उसने नाम ही नहीं पता भी फर्जी लिखाया है। इस पर मृतक बच्ची को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मरने के बाद भी उस बच्ची का दुर्भाग्य पीछा नहीं छोड़ा। परिजनों के अभाव में शाम तक उसका पोस्टमार्टम डॉक्टर नहीं कर सके थे। सीएमएस डॉ. मधुरिमा श्रीवास्तव कहती हैं कि उसके साथ एक महिला और थी। वह खुद को अमरगढ़ की आशा बताते हुए निर्मला सिंह नाम दर्ज कराया है।
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जिला महिला अस्पताल में बुधवार को दूसरे पहर करीब 3.30 बजे एक महिला एक दिन की बच्ची को लेकर पहुंची। बच्ची को बीमार बताते हुए भर्ती करा दिया। खुद का नाम महिला ने राजकुमारी व जिले के संग्रामपुर थाना स्थित संग्रामपुर गांव निवासिनी अस्पताल में दर्ज करा दिया। इसके बाद डॉक्टर बच्ची को एसएनसीयू में भर्ती कर उपचार शुरू कर दिए। रात में पत्थर दिल महिला मां की ममता का खून करते हुए तड़पती बच्ची को छोड़ फरार हो गई। डॉक्टर उसका इलाज करते रहे। गुरुवार की सुबह लगभग 6.45 पर बच्ची की मौत हो गई। यह जानकारी देने के लिए डॉक्टर महिला की खोज में जुट गए। दोपहर तक उसका कोई पता नहीं चल सका। डॉक्टरों को काफी खोजबीन के बाद समझ आया कि उसने नाम ही नहीं पता भी फर्जी लिखाया है। इस पर मृतक बच्ची को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मरने के बाद भी उस बच्ची का दुर्भाग्य पीछा नहीं छोड़ा। परिजनों के अभाव में शाम तक उसका पोस्टमार्टम डॉक्टर नहीं कर सके थे। सीएमएस डॉ. मधुरिमा श्रीवास्तव कहती हैं कि उसके साथ एक महिला और थी। वह खुद को अमरगढ़ की आशा बताते हुए निर्मला सिंह नाम दर्ज कराया है।
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