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नौकरी का इंतजार करती रह गईं 8796 महिलाएं

Tue, 01 Feb 2022 12:31 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 01 Feb 2022 12:31 AM IST
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8796 women kept waiting for jobs
जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के खाली पदों को भरने के लिए बारह साल बाद विज्ञापन निकला, लेकिन विभागीय अफसरों की लापरवाही के चलते आवेदन पत्रों की छंटनी से पहले ही नियुक्ति पर रोक लग गई। चुनाव के पहले 428 पदों पर आवेदन करने वाली 8796 महिलाएं नौकरी मिलने का इंतजार करती रह गईं।
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जिले के महिला एवं बाल विकास विभाग में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मिनी आंगनबाड़ी और सहायिकाओं के खाली 428 पदों पर भर्ती के लिए बारह वर्ष बाद सितंबर 2021 में विज्ञापन निकाला गया। जिले के 17 विकास खंडों के 428 पदों के लिए 8796 महिलाओं ने आवेदन किया था। गांव की महिलाओं ने हजारों रुपये खर्च करके ऑनलाइन आवेदन किया। विभाग आवेदन पत्रों की छंटनी भी नहीं कर पाया था कि उच्च न्यायालय प्रयागराज ने नियुक्ति पर रोक लगा दी।
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इससे नियुक्ति प्रक्रिया प्रारंभ होने के पहले ही ठप हो गई। दरअसल, बाल विकास विभाग ने जो विज्ञापन निकाला था, उसमें पिछड़ी और अनुसूचित जाति के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई थी, मगर सवर्णों को दस प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान विज्ञापन में नहीं था। इससे सामान्य वर्ग के लोगों ने उच्च न्यायालय प्रयागराज में वाद दायर सुधार की मांग की।
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गांव की महिलाओं में विज्ञापन निकलने के बाद उम्मीद जगी थी कि अब उन्हें छोटी-मोटी नौकरी मिल जाएगी। जिससे उनकी जीविका बेहतर ढंग से चलेगी, मगर ऐसा नहीं हो सका। दरअसल, बाल विकास विभाग में बारह वर्षों से खाली पड़े पदों पर नियुक्ति नहीं हो रही है।
इसका कारण यह था कि पहले आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओँ के भर्ती का अधिकार ब्लॉकों के बाल विकास परियोजना अधिकारी को होता था, मगर बाद में शासन ने यह अधिकार सीडीपीओ से छीनकर डीपीओ के हवाले कर दिया। सीडीपीओ संघ ने उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में इस फैसले को चुनौती देते हुए याचिका दाखिल की। लंबे समय तक मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण नियुक्ति प्रक्रिया अटकी रही। बारह वर्ष बाद शुरू हुई तो उसमें आरक्षण का पेच फंस गया है।

आंगनबाड़ी, मिनी आंगनबाड़ी और सहायिकाओं के पदों पर भर्ती के लिए जो विज्ञापन निकला था, उसमें हाईकोर्ट के आदेश के बाद चयन प्रक्रिया स्थगित कर दी गई है। अभी शासन से कोई नया आदेश नहीं आया है। विधानसभा चुनाव बाद शासन का निर्देश होने पर अगला कदम उठाया जाएगा। रवींद्र उपाध्याय, सीडीपीओ, सदर
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