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घपलों-घोटालों में सिर्फ एफआईआर, चवन्नी नहीं हुई रिकवरी

Thu, 03 Jan 2019 11:06 PM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 03 Jan 2019 11:06 PM IST
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घपलों-घोटालों में सिर्फ एफआईआर, चवन्नी नहीं हुई रिकवरी
घपलों-घोटालों में सिर्फ एफआईआर, चवन्नी नहीं हुई रिकवरी
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जिले में दर्जनभर से अधिक बड़े घोटाले, आरोपियों पर नहीं हुई ठोस कार्रवाई
सिर्फ पत्राचार तक ही सीमित रहते हैं विभाग
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। प्रदेश के मुखिया सीएम योगी आदित्यनाथ भले ही सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार खत्म होने का दावा करते हों, लेकिन जिले में हालात इसके विपरीत हैं। यहां नौकरशाही में घपले-घोटाले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। मामले उजागर होने के बाद कार्रवाई भी हुई, लेकिन वह सिर्फ एफआईआर तक ही सीमित रही। इसके बाद भी अफसर काम कर रहे हैं। संबंधित विभाग और उच्च अफसर भी पत्राचार करने के बाद चुप्पी साध लेते हैं। आज तक जिले में हुई किसी भी घपले में चवन्नी की रिकवरी प्रशासन नहीं कर सका है। जलनिगम के पूर्व अधिशासी अभियंता राजेश खरे के बाद बीडीओ विकास शुक्ल ऐसे दूसरे अधिकारी हैं, जिनके खिलाफ घोटाले का मुकदमा दर्ज हुआ, लेकिन अभी तक न तो गिरफ्तारी हुई और न ही निलंबन की गाज गिरी। इसके पूर्व मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास और चौदहवां वित्त आयोग, बेसिक शिक्षा विभाग में करोड़ों रुपये का खेल हुआ, मगर नोटिस के अलावा कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
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गौरा और शिवगढ़ ब्लाक में हुआ 30.87 लाख का घपला
जिले के गौरा और शिवगढ़ ब्लाकों में 294 शौचालयों के निर्माण के लिए मिले 30.87 लाख रुपये का बंदरबांट किया गया है। दोनों ब्लाकों की जिम्मेदारी देख रहे बीडीओ विकास शुक्ला और लेखाकार उमेश पांडेय और भोलानाथ पर एफआईआर दर्ज होने के बाद रिकवरी की धनराशि भी निश्चित की गई है। मगर इन लोगों की अभी तक गिरफ्तारी नहीं हुई है। विभाग ने बीडीओ से 15.43 लाख और शिवगढ़ के लेखाकार उमेश पांडेय से 3,78,000 और गौरा के लेखाकार भोलानाथ से 11,65,500 रुपये की रिकवरी करने के लिए चिह्नित किया है, मगर अभी तक सारी कार्रवाई सिर्फ पत्र तक ही सीमित है।
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25.14 लाख रुपये के घपले में अधिशासी अभियंता गए थे जेल
सदर विकास खंड के पूरेरायजू में पानी की टंकी के निर्माण में 25.14 लाख रुपये के घपले में आरोपी बनाए गए पूर्व अधिशासी अभियंता राजेश खरे, सहायक अभियंता आरके श्रीवास्तव और अवर अभियंता सुधीर कुमार को जेल भेजा गया था। मगर धनराशि रिकवरी की कार्रवाई अभी तक नहीं हो पाई है।
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20.45 लाख रुपये का घपलेबाज आज भी उसी ब्लाक का है एडीओ पंचायत
सांगीपुर विकास खंड में एडीओ पंचायत आद्या प्रसाद द्विवेद्वी ने चौदहवें वित्त आयोग के तहत कंटीजेंसी के लिए आए 20.45 लाख रुपये का गबन कर लिया था। सीडीओ राजकमल यादव के निर्देश पर डीपीआरओ की जांच में खुलासा हुआ था। आश्चर्य की बात तो यह है कि घपलेबाज एडीओ पंचायत आज भी उसी ब्लाक में डटा है। उसने न तो रुपये जमा किए और न ही उसके खिलाफ कोई कार्रवाई हुई। डीपीआरओ उमाकांत पांडेय ने बताया कि कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखा गया है।ज्ञ् मगर अभी तक कोई पहल नहीं हुई है।
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पीएम आवास का दबाए बैठे हैं 1.61 करोड़ रुपये
प्रधानमंत्री आवास में 317 अपात्रों से 1.61 करोड़ रुपये की रिकवरी होनी है। विभाग वसूली के लिए सिर्फ पत्र जारी कर रहा है। दरअसल, अपात्रों को पात्र बनाने वाले बीडीओ और वीडीओ ने अच्छी खासी वसूली की है, इसलिए अब कैसे रिकवरी की पहल करें। इसी के चलते धनराशि की रिकवरी नहीं हो पा रही है। विभाग भी पत्र भेजकर कागजी कोरम पूरा करके बैठा हुआ है।
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मनरेगा में 93 लाख रुपये का हुआ था घपला
मनरेगा में अंधाधुंध रुपये निकालकर दुरुपयोग करने के मामले में संडवा चंद्रिका में 93 लाख रुपये का घपला टीएसी जांच में उजागर हुआ था। बाबागंज और बिहार ब्लाक की छह ग्राम पंचायतों में 2.25 करोड़ रुपये का घपला उजागर हुआ था। विभाग ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ रिकवरी का पत्र जारी किया, मगर अभी तक रुपये जमा कराने के लिए कोई प्रयास नहीं हुए हैं।
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बिजली विभाग में करोड़ों रुपये का हुआ था खेल
बिजली विभाग में गांवों का विद्युतीकरण कराने के नाम पर व्यापक खेल किया था। कार्यदायी संस्था ने बगैर विद्युतीकरण कराए ही 935 मजरों में बगैर कार्य कराए ही भुगतान कर लिया गया था। इसका खुुलासा होने पर कार्यदायी संस्था को ब्लैक लिस्टेट करके ही अधिकारी चुप्पी साध गए। हालांकि इस मामले में तत्कालीन अधीक्षण अभियंता को सस्पेंड कर दिया गया था।
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78.41 करोड़ का चूना लगा गए फर्जी शिक्षक
जिले के 19 लोगों ने फर्जीवाड़ा करके सहायक अध्यापक की नौकरी हासिल की और वेतन के रूप में 78.41 करोड़ रुपये का चूना लगाया। विभाग ने व्यक्तिगत रूप से रिकवरी का पत्र जारी कर रखा है। मगर इसके बाद भी कोई पहल नहीं हुई है। फर्जीवाड़ा का खुलासा होने के बाद उन्हें तो बाहर कर दिया गया, मगर अभी तक एक रुपये की रिकवरी नहीं हुई है। विभागीय अफसरों की मानें तो पुलिस ने किसी की गिरफ्तारी भी नहीं की है।

वर्जन------
विधिक प्रक्रिया के तहत ही रिकवरी की रकम वसूली जा सकती है। नोटिस देने के बाद अगर जिम्मेदार रुपये नही देते हैं तो उनके खिलाफ आरसी जारी की जाएगी और राजस्व विभाग के अधिकारी रकम की वसूली करेंगे। लूट-खसोट करने वाले अधिकारियों को किसी भी दशा में बख्शा नहीं जाएगा
सुदामा प्रसाद, प्रभारी सीडीओ और डीडीओ।
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