{"_id":"5c2903e1bdec226d6e09399b","slug":"81546191841-pratapgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पति की हत्या का जवाब दें पीएम औ सीएम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पति की हत्या का जवाब दें पीएम औ सीएम
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पत्नी ने कहा, दर्जनों पुलिसकर्मियों के बीच उसके पति की कैसे हो गई हत्या
पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल, बोली, आर्थिक मदद नहीं, इंसाफ चाहिए
26 घंटे बाद शहीद पति का चेहरा देख बेसुध हो गई पत्नी डिंपल
अमर उजाला ब्यूरो
रानीगंज (प्रतापगढ़)। गाजीपुर में उपद्रवियों के पथराव में शहीद हुए दीवान सुरेश प्रताप वत्स की हत्या से परिवार में आक्रोश है। पत्नी डिंपल 26 घंटे बाद पति का चेहरा देख सकी। रोते हुए कहा कि उसके पति की हत्या का जवाब गाजीपुर आए प्रधानमंत्री मोदी व प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को देना होगा। आखिर दर्जनों पुलिसकर्मियों के बीच उसके पति की ही कैसे उपद्रवियों ने हत्या कर दी। दूसरे पुलिसकर्मी क्या करते रहे। उसे आर्थिक मदद नहीं बल्कि इंसाफ चाहिए। परिवार के लोग घटना के लिए साथी पुलिसकर्मियों की लापरवाही मान रहे हैं।
रानीगंज थाना क्षेत्र के लच्छीपुर निवासी सुरेश प्रताप वत्स गाजीपुर जनपद के करीमुद्दीनपुर थाने में तैनात थे। शनिवार को गाजीपुर में पीएम मोदी की जनसभा से लौटते समय कठवा मोड़ पुलिया के पास जाम खुलवाने के दौरान निषाद पार्टी के उपद्रवी कार्यकर्ताओं ने पथराव कर दिया, जिससे दीवान सुरेश प्रताप वत्स की मौत हो गई थी। शनिवार को खबर मिलने पर पत्नी डिंपल बेटे व देवर के साथ गाजीपुर पहुंचीं, लेकिन पुलिस व परिवार के लोगों ने उन्हें सुरेश की मौत की जानकारी नहीं दी। रविवार की शाम जब वह अपने घर पहुंचीं तो बिलख पड़ीं। कहा कि 24 घंटे से अधिक समय हो गया। वह अपने पति का चेहरा नहीं देख सकीं। आखिर दर्जनों पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में उसके पति की ही हत्या कैसे हो गई। बाकी पुलिसकर्मी वहां क्या कर रहे थे। उसके पति की मौत का जवाब प्रधानमंत्री मोदी व सीएम योगी को देना होगा। उसके पति की मौत पुलिसकर्मियों की लापरवाही से हुई है। हमें आर्थिक मदद नहीं इंसाफ चाहिए।
शाम करीब 6.36 मिनट पर दीवान सुरेश का शव घर पहुंचा तो कोहराम मच गया। शहीद पति का चेहरा देखते ही पत्नी डिंपल बेसुध हो गई। कहा कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों की भूमिका संदेह के घेरे में है। सिर्फ जांच और खानापूर्ति से इंसाफ नहीं मिलेगा। इसके लिए जरूरत पड़ी तो वह खुद संघर्ष करेंगी। मौके पर पहुंचे पुलिस अधीक्षक एस आनंद, सीओ रानीगंज रमेशचंद्र, रानीगंज एसओ ने भी शहीद सिपाही को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
विज्ञापन
इनसेट-------
बेटी ने कहा-मुआवजा नहीं, पापा के हत्यारों को फांसी दो
रानीगंज के लच्छीपुर में मुख्य आरक्षी सुरेश प्रताप वत्स की हत्या से परिवार के लोगों में खासा आक्रोश दिखा। पिता की मौत की जानकारी के बाद हाईस्कूल में पढने वाली बेटी कोमल रोते हुए बोली कि मुआवजा नहीं चाहिए, बल्कि पापा के हत्यारों को फांसी दी जानी चाहिए। यह मातम सिर्फ मेरे ही नहीं हर सिपाही के परिवार का है। बेटी नेहा पिता की हत्या के लिए पुलिसकर्मियों को जिम्मेदार ठहरा रही थी। बेटे विनीत के मुंह से बोल नहीं फूट रहे थे। उसकी आंखों से केवल आंसू ही बहते रहे।
इनसेट-------
बच्चों का मुंह देखकर जिंदा रहना पड़ेगा
अब तो सहारा छिन गया। ऐसे में उसके लिए भी जिंदा रहना कोई मायने नहीं रखता। यह कहते हुए शहीद सिपाही सुरेश प्रताप वत्स की पत्नी डिंपल रोने लगी। लोग उसे संभालने लगे। फिर हिम्मत करते हुए बोली कि बच्चों के लिए उसे जिंदा रहना है। तीनों बच्चों के लिए अब मां के साथ पिता बनकर दिखाऊंगी। उसकी दशा देखकर वहां मौजूद लोग भी अपने आंसू नहीं रोक सके।
विज्ञापन
पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल, बोली, आर्थिक मदद नहीं, इंसाफ चाहिए
26 घंटे बाद शहीद पति का चेहरा देख बेसुध हो गई पत्नी डिंपल
अमर उजाला ब्यूरो
रानीगंज (प्रतापगढ़)। गाजीपुर में उपद्रवियों के पथराव में शहीद हुए दीवान सुरेश प्रताप वत्स की हत्या से परिवार में आक्रोश है। पत्नी डिंपल 26 घंटे बाद पति का चेहरा देख सकी। रोते हुए कहा कि उसके पति की हत्या का जवाब गाजीपुर आए प्रधानमंत्री मोदी व प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को देना होगा। आखिर दर्जनों पुलिसकर्मियों के बीच उसके पति की ही कैसे उपद्रवियों ने हत्या कर दी। दूसरे पुलिसकर्मी क्या करते रहे। उसे आर्थिक मदद नहीं बल्कि इंसाफ चाहिए। परिवार के लोग घटना के लिए साथी पुलिसकर्मियों की लापरवाही मान रहे हैं।
रानीगंज थाना क्षेत्र के लच्छीपुर निवासी सुरेश प्रताप वत्स गाजीपुर जनपद के करीमुद्दीनपुर थाने में तैनात थे। शनिवार को गाजीपुर में पीएम मोदी की जनसभा से लौटते समय कठवा मोड़ पुलिया के पास जाम खुलवाने के दौरान निषाद पार्टी के उपद्रवी कार्यकर्ताओं ने पथराव कर दिया, जिससे दीवान सुरेश प्रताप वत्स की मौत हो गई थी। शनिवार को खबर मिलने पर पत्नी डिंपल बेटे व देवर के साथ गाजीपुर पहुंचीं, लेकिन पुलिस व परिवार के लोगों ने उन्हें सुरेश की मौत की जानकारी नहीं दी। रविवार की शाम जब वह अपने घर पहुंचीं तो बिलख पड़ीं। कहा कि 24 घंटे से अधिक समय हो गया। वह अपने पति का चेहरा नहीं देख सकीं। आखिर दर्जनों पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में उसके पति की ही हत्या कैसे हो गई। बाकी पुलिसकर्मी वहां क्या कर रहे थे। उसके पति की मौत का जवाब प्रधानमंत्री मोदी व सीएम योगी को देना होगा। उसके पति की मौत पुलिसकर्मियों की लापरवाही से हुई है। हमें आर्थिक मदद नहीं इंसाफ चाहिए।
विज्ञापन
शाम करीब 6.36 मिनट पर दीवान सुरेश का शव घर पहुंचा तो कोहराम मच गया। शहीद पति का चेहरा देखते ही पत्नी डिंपल बेसुध हो गई। कहा कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों की भूमिका संदेह के घेरे में है। सिर्फ जांच और खानापूर्ति से इंसाफ नहीं मिलेगा। इसके लिए जरूरत पड़ी तो वह खुद संघर्ष करेंगी। मौके पर पहुंचे पुलिस अधीक्षक एस आनंद, सीओ रानीगंज रमेशचंद्र, रानीगंज एसओ ने भी शहीद सिपाही को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
विज्ञापन
इनसेट-------
बेटी ने कहा-मुआवजा नहीं, पापा के हत्यारों को फांसी दो
रानीगंज के लच्छीपुर में मुख्य आरक्षी सुरेश प्रताप वत्स की हत्या से परिवार के लोगों में खासा आक्रोश दिखा। पिता की मौत की जानकारी के बाद हाईस्कूल में पढने वाली बेटी कोमल रोते हुए बोली कि मुआवजा नहीं चाहिए, बल्कि पापा के हत्यारों को फांसी दी जानी चाहिए। यह मातम सिर्फ मेरे ही नहीं हर सिपाही के परिवार का है। बेटी नेहा पिता की हत्या के लिए पुलिसकर्मियों को जिम्मेदार ठहरा रही थी। बेटे विनीत के मुंह से बोल नहीं फूट रहे थे। उसकी आंखों से केवल आंसू ही बहते रहे।
इनसेट-------
बच्चों का मुंह देखकर जिंदा रहना पड़ेगा
अब तो सहारा छिन गया। ऐसे में उसके लिए भी जिंदा रहना कोई मायने नहीं रखता। यह कहते हुए शहीद सिपाही सुरेश प्रताप वत्स की पत्नी डिंपल रोने लगी। लोग उसे संभालने लगे। फिर हिम्मत करते हुए बोली कि बच्चों के लिए उसे जिंदा रहना है। तीनों बच्चों के लिए अब मां के साथ पिता बनकर दिखाऊंगी। उसकी दशा देखकर वहां मौजूद लोग भी अपने आंसू नहीं रोक सके।