{"_id":"5c602d7cbdec224dce166ac2","slug":"71549806972-pratapgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"किसानों को रुपये मिलने से पहले वसूली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किसानों को रुपये मिलने से पहले वसूली
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रुपये मिले नहीं किसानों से शुरू हो गई वसूली
सत्यापन के नाम पर लेखपाल भर रहे हैं अपनी जेब
कुंडा, पट्टी में मामला गरमाने पर वापस कराई गई रकम, 11 फरवरी तक सूची का होगा सत्यापन
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को अभी धनराशि तो नहीं मिली है, मगर सत्यापन और फार्म भरवाने के नाम पर अवैध वसूली शुरू हो गई है। पट्टी और कुंडा तहसीलों में धन उगाही का मामला उजागर होने के बाद अफसर सतर्क हो गए हैं। मगर इसके बाद भी लेखपाल सत्यापन के नाम पर अपनी जेब भर रहे हैं।
जिले के 4,83,123 किसानों की सूची पांचों तहसीलों के लेखपालों को देकर सत्यापन करने और जो लोग छूटे हुए हैं, उनका नाम शामिल कराने के लिए फार्म भरवाने के लिए दिया गया है। आलम यह है कि सत्यापन की सूची और फार्म लेकर पहुंचने वाले लेखपाल दलालों के माध्यम से धन उगाही कर रहे हैं। जिले के अधिकांश लेखपाल ऐसे हैं, जो खुलेआम 100-300 रुपये ऐेंठकर जेब भर रहे हैं। शनिवार को कुंडा इलाके के काजीपुर कुसेमर गांव में लेखपाल अपने दलाल के माध्यम से उगाही कर रहे थे। मगर इसकी जानकारी होने पर एकत्रित किसानों ने विरोध किया, तो लेखपाल ने वसूल की गई धनराशि को वापस कराया। पट्टी इलाके के ढांढर गांव में किसानों से रुपये वसूल रहे लेखपाल को स्थानीय लोगों ने दौड़ा लिया। हालांकि बड़ी घटना होते-होते बच गई। यह महज उदाहरण हैं, अधिकांश लेखपाल सत्यापन की सूची लेकर किसानों से सौदेबाजी कर रहे हैं।
इनसेट---------
नहीं हुई किसी के खिलाफ कार्रवाई
लेखपालों से वसूली का मामला अधिकारियों तक पहुंचने के बाद भी अभी तक किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई है। इससे लेखपालों के हौसले बुलंद हैं। हालांकि लेखपालों का यह प्रयास है कि उनका काम हो जाय और किसी को जानकारी भी न हो पाएं।
विज्ञापन
वर्जन-----
लेखपालों को सत्यापन करने क जिम्मेदारी दी गई है, अगर वह रुपये वसूल रहे हैं, तो यह गलत बात है। जहां से शिकायतें मिल रहीं है, उसकी जांच कराई जा रही है, रिपोर्ट आते ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मनोज कुमार, एडीएम
विज्ञापन
सत्यापन के नाम पर लेखपाल भर रहे हैं अपनी जेब
कुंडा, पट्टी में मामला गरमाने पर वापस कराई गई रकम, 11 फरवरी तक सूची का होगा सत्यापन
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को अभी धनराशि तो नहीं मिली है, मगर सत्यापन और फार्म भरवाने के नाम पर अवैध वसूली शुरू हो गई है। पट्टी और कुंडा तहसीलों में धन उगाही का मामला उजागर होने के बाद अफसर सतर्क हो गए हैं। मगर इसके बाद भी लेखपाल सत्यापन के नाम पर अपनी जेब भर रहे हैं।
जिले के 4,83,123 किसानों की सूची पांचों तहसीलों के लेखपालों को देकर सत्यापन करने और जो लोग छूटे हुए हैं, उनका नाम शामिल कराने के लिए फार्म भरवाने के लिए दिया गया है। आलम यह है कि सत्यापन की सूची और फार्म लेकर पहुंचने वाले लेखपाल दलालों के माध्यम से धन उगाही कर रहे हैं। जिले के अधिकांश लेखपाल ऐसे हैं, जो खुलेआम 100-300 रुपये ऐेंठकर जेब भर रहे हैं। शनिवार को कुंडा इलाके के काजीपुर कुसेमर गांव में लेखपाल अपने दलाल के माध्यम से उगाही कर रहे थे। मगर इसकी जानकारी होने पर एकत्रित किसानों ने विरोध किया, तो लेखपाल ने वसूल की गई धनराशि को वापस कराया। पट्टी इलाके के ढांढर गांव में किसानों से रुपये वसूल रहे लेखपाल को स्थानीय लोगों ने दौड़ा लिया। हालांकि बड़ी घटना होते-होते बच गई। यह महज उदाहरण हैं, अधिकांश लेखपाल सत्यापन की सूची लेकर किसानों से सौदेबाजी कर रहे हैं।
विज्ञापन
इनसेट---------
नहीं हुई किसी के खिलाफ कार्रवाई
लेखपालों से वसूली का मामला अधिकारियों तक पहुंचने के बाद भी अभी तक किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई है। इससे लेखपालों के हौसले बुलंद हैं। हालांकि लेखपालों का यह प्रयास है कि उनका काम हो जाय और किसी को जानकारी भी न हो पाएं।
विज्ञापन
वर्जन-----
लेखपालों को सत्यापन करने क जिम्मेदारी दी गई है, अगर वह रुपये वसूल रहे हैं, तो यह गलत बात है। जहां से शिकायतें मिल रहीं है, उसकी जांच कराई जा रही है, रिपोर्ट आते ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मनोज कुमार, एडीएम