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शैक्षिक कैलेंडर बना मजाक, मनमर्जी पढ़ा रहे शिक्षक
Updated Wed, 04 Oct 2017 07:03 PM IST
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प्रतापगढ़। हाईस्कूल व इंटर की कक्षाओं के संचालन के लिए विभाग की ओर से शैक्षिक कैलेंडर निर्धारित किया गया है। सभी कालेजों को निर्देश दिया गया है कि वह इसके आधार पर विषय को परीक्षा से पहले पूरा कराएं। मगर शैक्षिक कैलेंडर के अनुसार पठन-पाठन को ताक पर रखकर शिक्षक मनमर्जी क्लास ले रहे हैं। इससे छात्र- छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
जिले में राजक ीय इंटर कालेज 34, स्ववित्तपोषित 78 व वित्तविहीन कालेजों की संख्या में 545 है। कालेजों में पठन- पाठन व्यवस्था को व्यवस्थित बनाने के लिए माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा शैक्षिक कैलेंडर बनाया गया है। जिसे विभाग की तरफ नया शिक्षा सत्र शुरू होते में निर्गत कर दिया गया है। शैक्षिक कैलेंडर के अनुसार कालेज में होने वाले विविध कार्यक्रमों के आयोजन को संपन्न कराते हुए अक्तूबर माह में अर्धवार्षिक परीक्षा संपन्न कराने का निर्देश है। शैक्षिक कैलेंडर के अनुसार लगभग 50 प्रतिशत से अधिक कोर्स व बोर्ड परीक्षा से पहले संपूर्ण कोर्स पूरा होना चाहिए। इसके लिए विषयों को पूरा कराने की समयसारिणी बनाकर शिक्षकों को नियमित क्लास लेनी थी। जिससे की परीक्षा के दौरान बच्चों को किसी तरह की कोई दिक्कत न आए। मजे की बात यह है कि बेल्हा में राजकीय इंटर कालेजों एवं स्ववित्तपोषित कालेजों में शैक्षिक कैलेंडर मजाक बन चुका है।
शिक्षकों की मनमर्जी के चलते शैक्षिक कैलेंडर के हिसाब से कोर्स पूरा नहीं कराया गया। जबकि इसी माह अर्धवार्षिक परीक्षा संपन्न कराने का निर्देश भी है। ऐसे में कोर्स पूरा न होने से अर्धवार्षिक परीक्षा कराने में महज कोरम पूरा कराने की प्रकिया होगी। ऐसे में सवाल यह है कि जिस तरह अपूर्ण तैयारी के बीच बच्चे अर्धवार्षिक परीक्षा देंगे, क्या वही हाल बोर्ड परीक्षा में भी होगा।
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जिले में राजक ीय इंटर कालेज 34, स्ववित्तपोषित 78 व वित्तविहीन कालेजों की संख्या में 545 है। कालेजों में पठन- पाठन व्यवस्था को व्यवस्थित बनाने के लिए माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा शैक्षिक कैलेंडर बनाया गया है। जिसे विभाग की तरफ नया शिक्षा सत्र शुरू होते में निर्गत कर दिया गया है। शैक्षिक कैलेंडर के अनुसार कालेज में होने वाले विविध कार्यक्रमों के आयोजन को संपन्न कराते हुए अक्तूबर माह में अर्धवार्षिक परीक्षा संपन्न कराने का निर्देश है। शैक्षिक कैलेंडर के अनुसार लगभग 50 प्रतिशत से अधिक कोर्स व बोर्ड परीक्षा से पहले संपूर्ण कोर्स पूरा होना चाहिए। इसके लिए विषयों को पूरा कराने की समयसारिणी बनाकर शिक्षकों को नियमित क्लास लेनी थी। जिससे की परीक्षा के दौरान बच्चों को किसी तरह की कोई दिक्कत न आए। मजे की बात यह है कि बेल्हा में राजकीय इंटर कालेजों एवं स्ववित्तपोषित कालेजों में शैक्षिक कैलेंडर मजाक बन चुका है।
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शिक्षकों की मनमर्जी के चलते शैक्षिक कैलेंडर के हिसाब से कोर्स पूरा नहीं कराया गया। जबकि इसी माह अर्धवार्षिक परीक्षा संपन्न कराने का निर्देश भी है। ऐसे में कोर्स पूरा न होने से अर्धवार्षिक परीक्षा कराने में महज कोरम पूरा कराने की प्रकिया होगी। ऐसे में सवाल यह है कि जिस तरह अपूर्ण तैयारी के बीच बच्चे अर्धवार्षिक परीक्षा देंगे, क्या वही हाल बोर्ड परीक्षा में भी होगा।
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