{"_id":"5c782208bdec22691d36df35","slug":"61551376904-pratapgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बमबाजी के बीच अपनी बटालियन के साथ पाकिस्तान में 22 किमी तक घुस गए थे कर्नल राघवराम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बमबाजी के बीच अपनी बटालियन के साथ पाकिस्तान में 22 किमी तक घुस गए थे कर्नल राघवराम
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पुलवामा में शहीद हुए सीआरपीएफ के जवानों का बदला लेने के लिए भारतीय वायुसेना के पराक्रम की हर ओर चर्चा हो रही है। ऐसे में जिले के उन वीर सपूतों को याद करना भी जरूरी हो जाता है जिन्होंने पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध के दौरान जबरदस्त वीरता दिखाई थी। सेना से सेवानिवृत्त हुए कर्नल राघवराम पांडेय 1965 में हुए युद्ध के दौरान बमबाजी के बीच अपनी बटालियन के साथ पाकिस्तान में 22 किमी तक अंदर घुस गए थे। वह अपनी टुकड़ी के साथ विरोधी सेना की फायरिंग का मुंहतोड़ जवाब देते रहे।
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शहर के शहीद उद्यान के सामने रहने वाले रिटायर्ड कर्नल राघवराम पांडेय ने भारत-पाक के बीच हुए दोनों युद्धों में हिस्सा लिया था। उन्होंने बताया कि 1965 के युद्ध में वह मेजर के पद पर तैनात थे। 18 मद्रास रेजीमेंट की कमान उनके हाथ में थी। वह लोग युद्ध के दौरान पठानकोट के रास्ते जफरवाल होते हुए पैदल ही सियालकोट तक पहुंच गए थे। इस दौरान सेना का कहीं अता-पता नहीं चला। बताया कि जंग के दौरान वह लोग बंकर बनाकर रहते थे, ताकि पाकिस्तानी सेना की नजर में न आ सकें। उन लोगों को पीछे करने के लिए पाकिस्तानी सेना सीज फायर करती थी। जिसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाता था। करीब 18 दिन सियालकोट व जफरवाल तहसील में व्यतीत करने के दौरान कई बार आमने-सामने मुकाबला हुआ। हर बार विरोधी सेना मात खाकर पीछे हटती रही। युद्ध विराम के ऐलान के बाद वह लोग अल्लहर रेलवे स्टेशन होते हुए वापस अपने देश की सीमा में आ गए। सैनिकों को खुद सभी कार्य करने पड़ते थे। वर्ष 1971 में भारत पाक युद्ध के दौरान वह सैनिकों के साथ बांग्लादेश के जैमूर होते हुए ढाका तक गए। कई नदियों को पार किया। युद्ध के दौरान पाक सेना को अमेरिका द्वारा उपलब्ध कराए गए पैटर्न टैंक और एयरफोर्स के हवाई हमलों का सामना भी करना पड़ा। वह लोग हर रात सोचते थे कि अब घर नहीं लौट पाएंगे। फायरिंग व बमबारी के दौरान जमीन पर लेट जाते थे और रेंगते हुए बंकर तक जाया करते थे। युद्ध के बाद प्रमोशन मिलने के बाद वह कर्नल बने। वह 15 जुलाई 1987 को सेना से सेवानिवृत्त हो गए।
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फोटो-
गोली से घायल होने के बाद भी दुश्मनों को खदेड़ा
कई दिनों तक अस्पताल में रहे भर्ती, साहस दिखाने पर सरकार ने दी थी दस बीघा जमीन
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। भारत-पाक के बीच टकराव की नौबत आने पर जिले के उन रिटायर्ड जवानों की यादें ताजा हो जाती हैं जिन्होंने 1965 व 1971 की जंग में पाकिस्तान की सेना के दांत खट्टे कर दिए थे। ऐसे ही एक जवान मानधाता पुरैला गांव में अपने परिवार के साथ रहते हैं। आज भी उन्हें सेना की वर्दी से उतना ही प्रेम है जितना ड्यूटी के दौरान था।
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मानधाता के पुरैला के रहने वाले निजामुद्दीन वर्ष 1955 में सेना में जवान के पद पर भर्ती हुए। वीर अब्दुल हमीद की कंपनी में वह भी शामिल थे। हालांकि भारत पाक-युद्ध के दौरान दोनों की अलग-अलग स्थानों पर ड्यूटी लगा दी गई थी। 1965 में भारत-पाक युद्ध के दौरान वह देश की सीमा जम्मू कश्मीर के तवी नदी के किनारे तैनात किए गए थे। उन लोगों की पोस्टे तीन चार दिन के दौरान बदल दी जाती थीं। उनके स्थान पर दूसरे लोगों को भेजा जाता था। देश की सुरक्षा के लिए वह लोग अपनी पोस्ट पर मुस्तैदी के साथ तैनात रहते थे। तवी नदी की पोस्ट पर तैनाती के दौरान पाकिस्तानी सेना रात के अंधेरे में फायरिंग करते हुए आगे बढ़ी। उस समय उनके साथी अलग-अलग स्थानों पर थे। अचानक हुई फायरिंग के बाद सभी मुकाबला के लिए तैयार हो गए। इस बीच उनके हाथ में गोली जा लगी। इसके बाद भी वह हिम्मत नहीं हारे। जबकि पाक सेना उनकी पोस्ट के काफी नजदीक आ गई थी। निजामुद्दीन घायल होने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी और पाकिस्तानी फौजियों पर गोलियां चलाते रहे। जिसके चलते पाकिस्तानी सेना को पीछे हटना पड़ा। कई दिनों तक उनका इलाज हुआ। युद्ध विराम के बाद अस्पताल से छुट्टी मिली और वह घर आए। तब परिवार के लोगों को जानकारी हो सकी। वर्ष 1971 भारत पाक-युद्ध के दौरान वह दिनाजपुर में तैनात थे। यहां भी सेना ने युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना के दांत खट्टे कर दिए। लांस नायक पद पर प्रमोशन के बाद 1974 में सेना से सेवानिवृत्त हो गए। सरकार ने निजामुद्दीन को युद्ध के दौरान वीरता का पुरस्कार देते हुए दिवैनी गांव में 10 बीघा जमीन बिनोवा भावे योजना के तहत दान दी थी।
इनसेट-
दादा के सपनों को साकार कर रहा पौत्र
निजामुद्दीन के तीन बेटे हैं। एक बेटा बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत है। दूसरा बेटा अधिवक्ता हैं। तीसरा बेटा ट्रक चलाकर परिवार को गुजर बसर करता है। निजामुद्दीन की प्रेरणा से देश की सेवा करने के लिए पौत्र जहीरुद्दीन सेना में भर्ती हुआ। मौजूदा समय में वह जम्मू-कश्मीर में तैनात है।
व्हाटसएप, फेसबुक पर भारत-पाक की जंग
जोश और जज्बे के साथ पाकिस्तान पर हो रही शब्दों के बमों की बौछार
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। मौजूदा समय में देशभक्ति का जुनून लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है। सोशल मीडिया पर देश की शान ऊंची करने के लिए लोग कुर्बानी तक देने के लिए तैयार हैं। सुबह से लेकर देर रात तक लोग सोशल मीडिया सक्रिय रहते हुए पाकिस्तान को करारा जवाब देते नजर आते हैं।
जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों की शहादत के बाद पाकिस्तान के खिलाफ लोगों ने आक्रोश व्याप्त है। गत दिनों आतंकी ठिकानों पर बमबाजी कर बदला लेने के घटनाक्रम के बाद लोग खुश हैं। दूसरे दिन विंग कमांडर अभिनंदन के पाकिस्तानी सेना के कब्जे में होने से मायूसी देखने को मिली। सोशल मीडिया पर विंग कमांडर को पकड़ने की तस्वीर वायरल होने के बाद लोगों का आक्रोश भड़क उठा। व्हाट्सएप और फेसबुक में भी वायु सेना द्वारा पाकिस्तानी सीमा में घुसकर हमला बोलने का संदेश भी वायरल होने लगा। इस दौरान लोग सीधे पाकिस्तान सेना को सुधरने की चेतावनी देते भी नजर आए। बहुत से लोग तो सीधे पाकिस्तान की सीमा में घुसकर बदला लेते दिखे। सोशल मीडिया पर एक तरह से भारत पाक की जंग छिड़ी हुई है।
फोटो-
दिल से सलाम, बोले शेर है अभिनंदन
अभिनंदन के लिए हुई प्रार्थना, हर कोई हाल जानने को रहा बेताब
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। पाकिस्तानी सेना के कब्जे में विंग कमांडर अभिनंदन को हर कोई दिल से सलाम करते हुए शेर बता रहा है। अभिनंदन की रिहाई के लिए प्रार्थना व दुआएं भी हुईं। पाकिस्तान में उनके साथ कैसा व्यवहार किया जा रहा है। यह जानकारी करने के लिए हर कोई बेताब नजर आया।
विंग कमांडर अभिनंदन के लिए गुरुवार को सोशल मीडिया पर मैसेज तेजी से वायरल हो रहा था। जिसमें लोग उन्हें भारत का शेर बताते हुए कह रहे थे कि तमाम सवालों के बाद भी शेर अभिनंदन ने कोई भी अहम जानकारी देश से जुड़ी नहीं दी। ऐसे वीर को दिल से सलाम दिया जाता है। कोई उनका चित्रांकन करता हुआ नजर आया। लोग कहते नजर आए कि अभिनंदन को लौटाए नहीं तो अंजाम बुरा होगा। वायरल हो रही कविता लोगों को दिल को छू ले रही है। अभिनंदन का अभिनंदन है, रक्त नहीं मुख पर चंदन है। इस बीच जांबाज वायु सेना के विंग कमांडर के सकुशल वापसी के लिए प्रमोद तिवारी यूथ बिगे्रड रामपुर खास विधानसभा अध्यक्ष अंशुमान तिवारी के नेतृत्व में बाबा घुइसरनाथ धाम में पूजन अर्चन किया गया। इस मौके पर त्रिभू तिवारी, धर्मेंद्र मिश्रा, शिवम सिंह, अंबुज मिश्रा, नवीन मिश्रा, विवेक वैश्य, सुरेंद्र ओझा आदि मौजूद रहे।
जय हिंद की श्रृंखला बना बच्चे बोले, हिंदुस्तान जिंदाबाद
ग्रामीण अंचलों में भी लोगों ने मनाईं खुशियां
प्रतापगढ़/जेठवारा/मानधाता। पाकिस्तानी सीमा में घुसकर आतंकी ठिकानों को बर्बाद करने के साथ ही पाकिस्तान को घुटने टेकने के लिए मजबूर करने वाले कदम पर बच्चों ने भी खुशियां मनाई। ग्रामीण अंचलों में लोगों ने जुलूस निकालकर अपनी खुशी का इजहार किया।
सेंट जेवियर्स स्कूल जोगापुर के बच्चों ने गुरुवार को वायु सेना के एयर स्ट्राइक पर खुशियों का इजहार करते हुए जयहिंद की श्रृंखला बनाई। इसके बाद सैनिकों के लिए जिंदाबाद के नारे लगाए। इस मौके पर प्रबंधक संजीव कुमार सिंह, संतोष द्विवेदी समेत अन्य लोग मौजूद रहे। मानधाता के चंघईपुर में लोगों का मुंह मीठा कराया गया। इस मौके पर सुभाष विश्वकर्मा, प्रधान फरीदुद्दीन, लालबहादुर तिवारी, सलमान खान, बाबा अब्दुल हाशमी, रमाशंकर, कमलेश सिंह आदि मौजूद रहे। जेठवारा में भी ग्रामीणों ने खुशियां का इजहार करते हुए तिरंगा लहराया।
अभिनंदन की रिहाई पर बोले, हिंदुस्तानी एक हैं
प्रतापगढ़। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने संसद में जब ऐलान किया कि शुक्रवार को भारत के विंग कमांडर अभिनंदन को उनके देश के हवाले किया जाएगा। इस बात की खबर जैसे ही टीवी चैनल और सोशल मीडिया पर आनी शुरु हुई लोग खुशी से झूम उठे। हर कोई देश का सिर ऊंचा करने वाला संदेश वायरल कर रहा था। जिले के लोगों ने अभिनंदन की रिहाई पर खुशी जताते हुए कहा कि हिंदुस्तानी एक है।