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जिले में फ्लाप साबित हुआ छिपा कनेक्शन ढूंढ़ो अभियान
Updated Tue, 14 Aug 2018 06:36 PM IST
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जिले में छिपा कनेक्शन ढूढ़ों अभियान फ्लाप साबित हुआ है। लाख खोजबीन के बाद भी जिले में महज 50 कनेक्शन ही ऐसे मिल सके, जो सालों से विभाग के डाटा से दूर थे। हालांकि विभागीय अनुमान के मुताबिक यह परिणाम ऊंट के मुंह में जीरा साबित हुआ है। माना जा रहा है कि जिम्मेदार अफसरों ने कार्रवाई नहीं बल्कि कोरम पूरा किया है।
जिले में चार विद्युत पारेषण खंड है। जिसके तहत करीब 5 लाख पंजीकृत उपभोक्ता हैं। उपभोक्ताओं का डाटा पहले फाइलों में दर्ज किया जाता है। पंजीयन, बिलिंग, मीटर आदि सभी जानकारियों की फाइलें अलग-अलग होती थीं। तीन वर्ष पहले विभागों की आनलाइन प्रक्रिया शुरू हुई। इसके तहत विभाग के सभी दस्तावेजों को आनलाइन किया गया। जिससे कि फाइलों के अवलोकन में समय न लगे और कार्य में तेजी दिखे। इसी पहल के तहत विद्युत विभाग को भी आनलाइन किया गया। विभागीय चूक के चलते प्रक्रिया दौरान कई पुराने उपभोक्ता आनलाइन नहीं हो सके। मजे की बात यह है कि जिन फाइलों में उनके नाम का जिक्र था, वह भी नष्ट हो गए। उपभोक्ताओं का ब्यौरा न होने से उनकी बिलिंग नहीं हो पा रही थी। उपभोक्ता भी बिलिंग के लिए आगे नहीं आ रहे थे। इससे विभाग को काफी चपत लगती थी। ऐसे उपभोक्ताओं की खोजबीन के लिए ही विद्युत विभाग की ओर छिपा कनेक्शन ढूढ़ों अभियान शुरू किया गया। कनेक्शन ढूढ़ने के लिए विभागीय अफसरों की तैनाती की गई थी। उन्हें निर्देश दिया गया था कि वह गांव-गंाव जाकर लोगों से पुराने कनेक्शन के बारे पूछताछ करें और पंजीयन रसीद के माध्यम से पड़ताल करें कि उपभोक्ता आनलाइन हैं कि नहीं। विभाग का मानना था कि जिले में ऐसे हजारों कनेक्शनधारी मिलेंगे। मगर ऐसा हुआ नहीं। तीन महीने के इस अभियान में काफी खोजबीन के बाद महज 50 कनेक्शनधारी ही मिल सके। विभाग जिस अनुपात में डाटा से गुम हुए कनेक्शनधारियों की संख्या का अनुमान लगा रहा था, उसके अनुरूप परिणाम नहीं आया। दरअसल, इसके पीछे विभागीय अफसरों की लापरवाही काफी हद तक जिम्मेदार मानी जा रही है। अफसरों ने काम के नाम पर महज कोरम पूरा किया है। इससे अभियान सफल नहीं हो सका।
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जिले में चार विद्युत पारेषण खंड है। जिसके तहत करीब 5 लाख पंजीकृत उपभोक्ता हैं। उपभोक्ताओं का डाटा पहले फाइलों में दर्ज किया जाता है। पंजीयन, बिलिंग, मीटर आदि सभी जानकारियों की फाइलें अलग-अलग होती थीं। तीन वर्ष पहले विभागों की आनलाइन प्रक्रिया शुरू हुई। इसके तहत विभाग के सभी दस्तावेजों को आनलाइन किया गया। जिससे कि फाइलों के अवलोकन में समय न लगे और कार्य में तेजी दिखे। इसी पहल के तहत विद्युत विभाग को भी आनलाइन किया गया। विभागीय चूक के चलते प्रक्रिया दौरान कई पुराने उपभोक्ता आनलाइन नहीं हो सके। मजे की बात यह है कि जिन फाइलों में उनके नाम का जिक्र था, वह भी नष्ट हो गए। उपभोक्ताओं का ब्यौरा न होने से उनकी बिलिंग नहीं हो पा रही थी। उपभोक्ता भी बिलिंग के लिए आगे नहीं आ रहे थे। इससे विभाग को काफी चपत लगती थी। ऐसे उपभोक्ताओं की खोजबीन के लिए ही विद्युत विभाग की ओर छिपा कनेक्शन ढूढ़ों अभियान शुरू किया गया। कनेक्शन ढूढ़ने के लिए विभागीय अफसरों की तैनाती की गई थी। उन्हें निर्देश दिया गया था कि वह गांव-गंाव जाकर लोगों से पुराने कनेक्शन के बारे पूछताछ करें और पंजीयन रसीद के माध्यम से पड़ताल करें कि उपभोक्ता आनलाइन हैं कि नहीं। विभाग का मानना था कि जिले में ऐसे हजारों कनेक्शनधारी मिलेंगे। मगर ऐसा हुआ नहीं। तीन महीने के इस अभियान में काफी खोजबीन के बाद महज 50 कनेक्शनधारी ही मिल सके। विभाग जिस अनुपात में डाटा से गुम हुए कनेक्शनधारियों की संख्या का अनुमान लगा रहा था, उसके अनुरूप परिणाम नहीं आया। दरअसल, इसके पीछे विभागीय अफसरों की लापरवाही काफी हद तक जिम्मेदार मानी जा रही है। अफसरों ने काम के नाम पर महज कोरम पूरा किया है। इससे अभियान सफल नहीं हो सका।
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