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Pratapgarh News: पांच अरब रुपये की साइबर ठगी के मामले में 53 आरोपी गिरफ्तार
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देश के 19 राज्यों में अलग-अलग लोगों को साइबर ठगी का शिकार बनाकर करीब पांच अरब की ठगी करने वाले 53 आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बताया कि आरोपियों पर जिले के अलग-अलग थानों में साइबर ठगी के मामले दर्ज हैं। मनी ट्रेल और साइबर ठगी के मामले में पुलिस की अलग-अलग टीमों ने ठगों को गिरफ्तार किया।
एएसपी पूर्वी आलोक कुमार के नेतृत्व में साइबर टीम ने विभिन्न थानों में 18 अप्रैल से 27 अक्तूबर तक दर्ज साइबर ठगी के मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान इन शिकायतों का संबंध 19 राज्यों से मिला। उपलब्ध साक्ष्यों और प्राप्त शिकायतों के आधार पर पुलिस ने करीब छह माह तक ठगों को चिह्नित किया गया। इसके बाद मंगलवार और बुधवार को साइबर पुलिस और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने कुंडा, रानीगंज और कोतवाली देहात समेत अन्य जगहों से 53 ठगों को पकड़ा।
एसपी दीपक भूकर ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। ये गिरोह फर्जी लिंक, ओटीपी, निवेश का लालच देकर लोगों से ऑनलाइन ठगी करते थे। पुलिस अब इनके बैंक खातों और मनी ट्रेल की गहन जांच कर रही है।
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ऐसे करते थे ठगी
साइबर अपराधी ग्रामीणों और बेरोजगारों पैसों का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। इन खातों के एटीएम, सिम कार्ड उनके पास ही रहते थे। ठगी का पैसा सबसे पहले इन्हीं खातों में आता था। एक बार जब पैसा म्यूल अकाउंट में आता था तो उसे तुरंत 10, 20 या 50 अलग-अलग खातों में छोटे-छोटे हिस्सों में भेज दिया जाता था।
छोटी रकम होने के कारण बैंकों का ऑटोमेटिक फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम इसे पकड़ नहीं पाता था। अधिकांश साइबर ठगी लोगों को एपीके फाइल और ओटीपी भेजकर की गई है। किसान सम्मान निधि, केवाईसी आदि के नाम पर साइबर ठगी आरोपी करते थे।
क्या है मनी ट्रेल
एएसपी पूर्वी आलोक कुमार ने बताया कि साइबर अपराध में पैसे एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर किए जाते हैं। पूरे वित्तीय रिकॉर्ड को खंगालना मनी ट्रेल कहलाता है। जांच के दौरान बैंक स्टेटमेंट, डिजिटल ट्रांजेक्शन, चेक, आरटीजीएस और कैश ट्रांसफर की जांच होती है ताकि यह पता चल सके पैसे का लेनदेन कहां से शुरू हुआ। किन-किन बैंक खातों या बिचौलियों से होकर गुजरा। अंत में वह पैसा कहां खर्च या जमा हुआ।
बरतें सावधानी
एसपी दीपक भूकर ने कहा कि साइबर अपराध के प्रति सतर्क रहना जरूरी है। किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपनी व्यक्तिगत जानकारी, बैंक खाते का विवरण, एटीएम व डेबिट कार्ड की जानकारी, ओटीपी, यूपीआई पिन और अन्य गोपनीय जानकारी साझा न करें।
किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने, संदिग्ध कॉल पर भरोसा करने व लालच में आकर धनराशि हस्तांतरित करने से बचें। साइबर ठगी होने पर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्ट पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
ठगी के प्रमुख आरोपियों के नाम
0 शिवकुमार यादव निवासी सराय छत्ता, थाना संग्रामगढ़, प्रतापगढ़।
0 अनुराग गुप्ता निवासी अंखुरिया, थाना कुंडा।
0 जितेंद्र कुमार निवासी सरायकीरत भदरी, थाना कुंडा।
0 शाकिब निवासी वाराणसी।
0 संदीप कुमार निवासी वाराणसी।
कार्रवाई एक नजर में
कुल गिरफ्तार साइबर ठग - 53
साइबर शिकायतों से संबंधित राज्य - 19
मनी ट्रेल और साइबर ठगी की राशि - पांच अरब रुपये
जिले के विभिन्न थानों पर पंजीकृत साइबर अपराध से संबंधित मामलों में कार्रवाई
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एएसपी पूर्वी आलोक कुमार के नेतृत्व में साइबर टीम ने विभिन्न थानों में 18 अप्रैल से 27 अक्तूबर तक दर्ज साइबर ठगी के मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान इन शिकायतों का संबंध 19 राज्यों से मिला। उपलब्ध साक्ष्यों और प्राप्त शिकायतों के आधार पर पुलिस ने करीब छह माह तक ठगों को चिह्नित किया गया। इसके बाद मंगलवार और बुधवार को साइबर पुलिस और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने कुंडा, रानीगंज और कोतवाली देहात समेत अन्य जगहों से 53 ठगों को पकड़ा।
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एसपी दीपक भूकर ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। ये गिरोह फर्जी लिंक, ओटीपी, निवेश का लालच देकर लोगों से ऑनलाइन ठगी करते थे। पुलिस अब इनके बैंक खातों और मनी ट्रेल की गहन जांच कर रही है।
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ऐसे करते थे ठगी
साइबर अपराधी ग्रामीणों और बेरोजगारों पैसों का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। इन खातों के एटीएम, सिम कार्ड उनके पास ही रहते थे। ठगी का पैसा सबसे पहले इन्हीं खातों में आता था। एक बार जब पैसा म्यूल अकाउंट में आता था तो उसे तुरंत 10, 20 या 50 अलग-अलग खातों में छोटे-छोटे हिस्सों में भेज दिया जाता था।
छोटी रकम होने के कारण बैंकों का ऑटोमेटिक फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम इसे पकड़ नहीं पाता था। अधिकांश साइबर ठगी लोगों को एपीके फाइल और ओटीपी भेजकर की गई है। किसान सम्मान निधि, केवाईसी आदि के नाम पर साइबर ठगी आरोपी करते थे।
क्या है मनी ट्रेल
एएसपी पूर्वी आलोक कुमार ने बताया कि साइबर अपराध में पैसे एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर किए जाते हैं। पूरे वित्तीय रिकॉर्ड को खंगालना मनी ट्रेल कहलाता है। जांच के दौरान बैंक स्टेटमेंट, डिजिटल ट्रांजेक्शन, चेक, आरटीजीएस और कैश ट्रांसफर की जांच होती है ताकि यह पता चल सके पैसे का लेनदेन कहां से शुरू हुआ। किन-किन बैंक खातों या बिचौलियों से होकर गुजरा। अंत में वह पैसा कहां खर्च या जमा हुआ।
बरतें सावधानी
एसपी दीपक भूकर ने कहा कि साइबर अपराध के प्रति सतर्क रहना जरूरी है। किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपनी व्यक्तिगत जानकारी, बैंक खाते का विवरण, एटीएम व डेबिट कार्ड की जानकारी, ओटीपी, यूपीआई पिन और अन्य गोपनीय जानकारी साझा न करें।
किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने, संदिग्ध कॉल पर भरोसा करने व लालच में आकर धनराशि हस्तांतरित करने से बचें। साइबर ठगी होने पर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्ट पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
ठगी के प्रमुख आरोपियों के नाम
0 शिवकुमार यादव निवासी सराय छत्ता, थाना संग्रामगढ़, प्रतापगढ़।
0 अनुराग गुप्ता निवासी अंखुरिया, थाना कुंडा।
0 जितेंद्र कुमार निवासी सरायकीरत भदरी, थाना कुंडा।
0 शाकिब निवासी वाराणसी।
0 संदीप कुमार निवासी वाराणसी।
कार्रवाई एक नजर में
कुल गिरफ्तार साइबर ठग - 53
साइबर शिकायतों से संबंधित राज्य - 19
मनी ट्रेल और साइबर ठगी की राशि - पांच अरब रुपये
जिले के विभिन्न थानों पर पंजीकृत साइबर अपराध से संबंधित मामलों में कार्रवाई