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अब कागज पर ड्राइविंग टेस्ट से नहीं बन सकेगा लाइसेंस
Updated Mon, 29 Oct 2018 07:32 PM IST
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अब कागज पर ड्राइविंग टेस्ट से नहीं बन सकेगा लाइसेंस
शुकुलपुर में छह बीघे में साढ़े तीन करोड़ से बनेगा आटोमेटिक टेस्टिंग ड्राइविंग ट्रैक
सवा करोड़ रुपये विभाग को मिले, जल्द होगा भूमि का सीमांकन
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। अब कागज पर ड्राइविंग टेस्ट के जरिए आसानी से लोग ड्राइविंग लाइसेंस नहीं बनवा सकेंगे। गड़वारा के करीब शुकुलपुर में ड्राइविंग टेस्ट के लिए आटोमेटिक टेस्टिंग ड्राइविंग ट्रैक बनानेे के लिए शासन से साढ़े तीन करोड़ का बजट स्वीकृत हुआ है। छह बीघे जमीन शुकुलपुर में चिह्नित होने के बाद शासन से विभाग के पास सवा करोड़ रुपये भी आ गए हैं। राजस्व विभाग द्वारा जमीन का सीमांकन होते ही ट्रैक निर्माण का कार्य शुरू होगा।
उपसंभागीय परिवहन कार्यालय में अभी तक कागजों व कंप्यूटर पर ही ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाले लोगों का टेस्ट लिया जाता रहा है। जिसके चलते बहुत से ऐसे लोगों का ड्राइविंग लाइसेंस बन जाता था जो वाहन चला भी नहीं पाते थे या ड्राइविंग के लिए पात्र नहीं होते थे। अब ऐसे लोगों की दाल नहीं गल सकेगी। वाहन टेस्टिंग के नाम पर मनमानी बंद होगी। गड़वारा के बगल शुकुलपुर में एआरटीओ कार्यालय का भवन बनकर तैयार है। कर्मचारियों के लिए आवास भी निर्माणाधीन है। शासन की पहल पर वाहन लाइसेंस बनवाने वालों के लिए आटोमेटिक टेस्टिंग ड्राइविंग ट्रैक बनाने का फैसला लिया गया। जिसके लिए साढ़े तीन करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हो चुका है। एआरटीओ कार्यालय के करीब ही छह बीघे जमीन राजस्व विभाग ने चिह्नित कर ली है। जिसका सीमांकन होना शेष है। इसके लिए भी राजस्व विभाग को पत्र भेजा गया है। शासन ने जमीन चिह्नित होने के बाद सवा करोड़ रुपये विभाग को भेज दिए हैं। ताकि जमीन का सीमांकन होते ही आगे की कार्रवाई तेज गति से संचालित की जा सके। जिससे वाहनों के ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में होना वाला खेल रुक सके।
वर्जन------
शुकुलपुर में आटोमेटिक टेस्टिंग ड्राइविंग ट्रैक के लिए जमीन चिह्नित हो गई है। ट्रैक के निर्माण में साढ़े तीन करोड़ का बजट स्वीकृत हुआ है। सवा करोड़ की धनराशि विभाग को मिल गई है। जमीन के सीमांकन के लिए राजस्व विभाग को पत्र भेजा गया है।
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सुशील मिश्रा, उप संभागीय परिवहन अधिकारी।
इनसेट------
सेंसर व कैमरे से पकड़ में आएंगे परीक्षार्थी
वाहन चलाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वाले परीक्षार्थी वाहन को चंद कदम चलाते ही पकड़ में आ जाएंगे। सेंसर व कैमरे से युक्त ट्रैक पर टेस्ट देने वाला जैसे ही वाहन आगे बढ़ाएगा, उसके गलती करते ही सेंसर अलर्ट कर देगा। कंप्यूटर के जरिए अभ्यर्थी फेल व पास होंगे। ऐसे में कर्मचारी अपने खास लोगों पर मेहरबानी नहीं कर सकेंगे। इसके लिए लोगों को वाहन चलाने में दक्ष होना पड़ेगा।
इनसेट------
यातायात के नियम मालूम नहीं, बन जाता है लाइसेंस
हादसों को रोकने के लिए शासन की ओर से तमाम प्रयास किए गए। जांच के दौरान देखने में आया कि ऐसे लोगों के ड्राइविंग लाइसेंस बन गए हैं, जिन्हें यातायात के नियमों की जानकारी तक नहीं होती। ऐसे लोग नियमों को दरकिनार कर सड़कों पर फर्राटा भरते रहते हैं। लाइसेंस होने के बाद भी उन लोगों को यातायात के चिह्नों के बारे में जानकारी नहीं होती।
इनसेट-------
आवेदन करने के लिए कार्यालय आने की जरूरत नहीं
ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए बहुत से अभ्यर्थी कुंडा, ढखवा, पट्टी, उदयपुर, रानीगंज से आते हैं। यहां आने के बाद आवेदन करते ही उन्हें करीब दो माह बाद आकर टेस्ट देने का समय मिलता है। जिससे उनका समय और रुपये दोनों बर्बाद होता है। एआरटीओ प्रशासन सुशील मिश्रा ने बताया कि ड्राइविंग के लिए आवेदन करने वाले लोगों को कार्यालय आने की जरूरत नहीं है। लोग अपने इलाके में स्थित सहज जनसेवा केंद्र, साइबर कैफे या मोबाइल से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने के बाद जिस तिथि पर बुलाया जाए, उस तिथि पर कार्यालय आकर टेस्ट देने के बाद अपना लाइसेंस प्राप्त कर सकते हैं।
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शुकुलपुर में छह बीघे में साढ़े तीन करोड़ से बनेगा आटोमेटिक टेस्टिंग ड्राइविंग ट्रैक
सवा करोड़ रुपये विभाग को मिले, जल्द होगा भूमि का सीमांकन
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। अब कागज पर ड्राइविंग टेस्ट के जरिए आसानी से लोग ड्राइविंग लाइसेंस नहीं बनवा सकेंगे। गड़वारा के करीब शुकुलपुर में ड्राइविंग टेस्ट के लिए आटोमेटिक टेस्टिंग ड्राइविंग ट्रैक बनानेे के लिए शासन से साढ़े तीन करोड़ का बजट स्वीकृत हुआ है। छह बीघे जमीन शुकुलपुर में चिह्नित होने के बाद शासन से विभाग के पास सवा करोड़ रुपये भी आ गए हैं। राजस्व विभाग द्वारा जमीन का सीमांकन होते ही ट्रैक निर्माण का कार्य शुरू होगा।
उपसंभागीय परिवहन कार्यालय में अभी तक कागजों व कंप्यूटर पर ही ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाले लोगों का टेस्ट लिया जाता रहा है। जिसके चलते बहुत से ऐसे लोगों का ड्राइविंग लाइसेंस बन जाता था जो वाहन चला भी नहीं पाते थे या ड्राइविंग के लिए पात्र नहीं होते थे। अब ऐसे लोगों की दाल नहीं गल सकेगी। वाहन टेस्टिंग के नाम पर मनमानी बंद होगी। गड़वारा के बगल शुकुलपुर में एआरटीओ कार्यालय का भवन बनकर तैयार है। कर्मचारियों के लिए आवास भी निर्माणाधीन है। शासन की पहल पर वाहन लाइसेंस बनवाने वालों के लिए आटोमेटिक टेस्टिंग ड्राइविंग ट्रैक बनाने का फैसला लिया गया। जिसके लिए साढ़े तीन करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हो चुका है। एआरटीओ कार्यालय के करीब ही छह बीघे जमीन राजस्व विभाग ने चिह्नित कर ली है। जिसका सीमांकन होना शेष है। इसके लिए भी राजस्व विभाग को पत्र भेजा गया है। शासन ने जमीन चिह्नित होने के बाद सवा करोड़ रुपये विभाग को भेज दिए हैं। ताकि जमीन का सीमांकन होते ही आगे की कार्रवाई तेज गति से संचालित की जा सके। जिससे वाहनों के ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में होना वाला खेल रुक सके।
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शुकुलपुर में आटोमेटिक टेस्टिंग ड्राइविंग ट्रैक के लिए जमीन चिह्नित हो गई है। ट्रैक के निर्माण में साढ़े तीन करोड़ का बजट स्वीकृत हुआ है। सवा करोड़ की धनराशि विभाग को मिल गई है। जमीन के सीमांकन के लिए राजस्व विभाग को पत्र भेजा गया है।
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सुशील मिश्रा, उप संभागीय परिवहन अधिकारी।
इनसेट------
सेंसर व कैमरे से पकड़ में आएंगे परीक्षार्थी
वाहन चलाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वाले परीक्षार्थी वाहन को चंद कदम चलाते ही पकड़ में आ जाएंगे। सेंसर व कैमरे से युक्त ट्रैक पर टेस्ट देने वाला जैसे ही वाहन आगे बढ़ाएगा, उसके गलती करते ही सेंसर अलर्ट कर देगा। कंप्यूटर के जरिए अभ्यर्थी फेल व पास होंगे। ऐसे में कर्मचारी अपने खास लोगों पर मेहरबानी नहीं कर सकेंगे। इसके लिए लोगों को वाहन चलाने में दक्ष होना पड़ेगा।
इनसेट------
यातायात के नियम मालूम नहीं, बन जाता है लाइसेंस
हादसों को रोकने के लिए शासन की ओर से तमाम प्रयास किए गए। जांच के दौरान देखने में आया कि ऐसे लोगों के ड्राइविंग लाइसेंस बन गए हैं, जिन्हें यातायात के नियमों की जानकारी तक नहीं होती। ऐसे लोग नियमों को दरकिनार कर सड़कों पर फर्राटा भरते रहते हैं। लाइसेंस होने के बाद भी उन लोगों को यातायात के चिह्नों के बारे में जानकारी नहीं होती।
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आवेदन करने के लिए कार्यालय आने की जरूरत नहीं
ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए बहुत से अभ्यर्थी कुंडा, ढखवा, पट्टी, उदयपुर, रानीगंज से आते हैं। यहां आने के बाद आवेदन करते ही उन्हें करीब दो माह बाद आकर टेस्ट देने का समय मिलता है। जिससे उनका समय और रुपये दोनों बर्बाद होता है। एआरटीओ प्रशासन सुशील मिश्रा ने बताया कि ड्राइविंग के लिए आवेदन करने वाले लोगों को कार्यालय आने की जरूरत नहीं है। लोग अपने इलाके में स्थित सहज जनसेवा केंद्र, साइबर कैफे या मोबाइल से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने के बाद जिस तिथि पर बुलाया जाए, उस तिथि पर कार्यालय आकर टेस्ट देने के बाद अपना लाइसेंस प्राप्त कर सकते हैं।