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सज गए देवी के दरबार, आज से होगी जय-जयकार

Tue, 09 Oct 2018 11:44 PM IST
Updated Tue, 09 Oct 2018 11:44 PM IST
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सज गए देवी के दरबार, आज से होगी जय-जयकार
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सज गए देवी के दरबार, आज से होगी जय-जयकार
पंडालों में विराजीं मां भवानी, नवरात्र के लिए देवी मंदिरों में साफ-सफाई के साथ चलती रही तैयारी
बाजारों में दिनभर हुई पूजन और व्रत सामाग्रियों की खरीदारी
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। शारदीय नवरात्र की शुरुआत बुधवार से हो रही है। महापर्व के एक दिन पूर्व मंगलवार को दुर्गा पंडालों व पौराणिक देवीधामों को जगमग करने में भक्तगण जुटे रहे। पंडालों में स्थापित करने के लिए वाहनों से देवी मां की मूर्तियां देर रात तक ले जाई जाती रहीं। बाजारों में भी पूजन सामाग्रियों की खरीदारी को लेकर ग्राहकों की भीड़ उमड़ी रही। मां आदि शक्ति के महापर्व की तैयारी को अंतिम रूप देने के लिए देर रात तक शहर से लेकर गांव तक लोग जुटे रहे।
इस बार नौ दिनों तक भक्तगण मां के अलग-अलग नौ रूपों का विधि-विधान से पूजन करेंगे। नवरात्र के पर्व को लेकर माहौल देवीमय हो गया है। पर्व के एक दिन पूर्व से ही शहर से लेकर गांव तक आस्था और भक्ति का नजारा दिखा। देवी प्रतिमा स्थापित करने के लिए बनाए गए पंडालों को सजाने में सुबह से ही लोग जुट गए। शहर के दहिलामऊ, पंजाबी मार्केट, बाबागंज, टक्क रगंज, अष्टभुजानगर, श्यामबिहारी गली में लगे पंडालों में मां की भक्ति में डूबे भक्त लाइटिंग के लिए बास-बल्लियों का जुगाड़ करते रहे। जहां पंडाल बन कर तैयार हो चुके थे, वहां आकर्षक लाइटिंग की जा रही थी। पंडालों को भव्य बनाने में लोग जुटे रहे। पौराणिक देवी धामों को भी झालर-झूमर से सजाया जा रहा था। इसके अलावा श्रद्धालुओं की भीड़ नियंत्रित करने की व्यस्था की गई। मेन गेट से लेकर धाम तक बैरीकेडिंग की गई है। पंडालों में स्थापित करने के लिए देरशाम तक देवी प्रतिमाएं लाई जाती रहीं। देवी धामों व पंडालों के इर्द-गिर्द साफ-सफाई की जाती रही। शहर के बेल्हा देवी धाम, मां बाराही धाम, मां संडवाचंद्रिका धाम, संकटहरणी धाम, चंडिका धाम को सजाया जाता रहा।
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पौराणिक देवी धामों पर रहेगी सीसीटीवी कैमरे की नजर
पौराणिक देवी धामों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर पुख्ते इंतजाम किए गए हैं। देवीधामों पर महिला व पुरुष सिपाहियों की तैनाती रहेगी। इसके अलावा सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। ताकि किसी तरह की कोई अप्रिय घटना न हो सके।
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खूब बिकी जयपुरिया चुनरी और नारियल
नवरात्र के पर्व पर मां के पूजन की तैयारी को लेकर भक्तगण जुटे रहे। सुबह से ही बाजारों में आस्था व भक्ति का नजारा दिखा। दुकानों पर नारियल, चुनरी, बताशा व पूजन सामाग्री की खरीदारी को लेकर लोग जुटे रहे। शहर के पंजाबी मार्केट, सदर बाजार, बाबागंज, पल्टन बाजार, अंबेडकर चौराहे पर सुबह से शाम तक खरीदारी होती रही। मां को सजाने के लिए सबसे ज्यादा डिमंाड जयपुरिया चुनरी की रही।
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खूब भाई डिजिटल मूर्ति
नवरात्र के पर्व पर इस बार कलकत्ता से मां की डिजिटल मूर्तियां भी आई हैं। डिजिटल मूर्तियां में बटन दबाते ही आकर्षक लाइटिंग शुरू हो जाती है। मंगलवार को इन मूर्तियों की जमकर खरीदारी हुई।
प्रतिपदा में चूकें तो अभिजीत मुहूर्त में करें कलश स्थापना
पहले दिन पुरोहितों की रहती है व्यस्तता, एक ही मुहूर्त पर पहुंचना रहता है मुश्किल
प्रतिपदा के बाद मध्याह्न में एक घंटे का आएगा अभिजीत मुहूर्त, करा सकते है कलश स्थापना
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। नवरात्र में नौ दिनों तक देवी की आराधना करने वाले भक्त यदि किसी कारण वश प्रतिपदा में कलश स्थापना नहीं कर पाते हैं तो उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है। नवरात्र के प्रथम दिन ही मध्याह्न में एक घंटे के लिए अभिजीत मुहूर्त आ रहा है। जिसमें पुरोहित को बुलाकर कलश स्थापना करा सकते हैं। संकल्प के साथ नौ दिनों की महासाधना शुरू कर सकते हैं।
नवरात्र के पहले दिन पुरोहितों की बहुत डिमांड रहती है। पंडालों व पौराणिक देवी धामों, स्थानीय मंदिरों में कलश स्थापना को लेकर उनकी उपस्थिति रहती है। इसके अलावा नौ दिनों के महाअनुष्ठान के लिए घरों में भी तैयारी जोर-शोर की जाती है। घरों में भी कलश स्थापना की जाती है। नवरात्र के पहले दिन पुरोहितों को खोजना पड़ता है। विद्वानों की मानें तो इस बार प्रतिपदा सुबह 7.56 बजे तक ही है। शास्त्रीय मतानुसार इसी मुहूर्त में कलश स्थापना का विधान शुभ माना जाता है। इसके बाद द्वितीया लग जाएगी। ऐसे में पंडालों, देवी धामों, स्थानीय मंदिरों एवं घरों में कलश स्थापना के लिए पंडितों की बहुत डिमांड रहेगी। यदि किन्ही कारणवश प्रतिपदा में कलश स्थापना कराने में पंडित जी देर से आएं और प्रतिपदा का मुहूर्त निकल जाए तो ऐसी दशा में परेशान होने की जरूरत नहीं है। विशेषज्ञों के अुनसार इसी दिन मध्याह्न में 11.36 से दोपहर 12.24 बजे तक अभिजीत मुहूर्त है। जिसमे कलश स्थापना की जा सकती है। ज्योतिषाचार्य पं. आलोक मिश्र ने बताया कि इस बार नौ दिनों का नवरात्र है। यदि कोई भी यजमान प्रतिपदा में कलश स्थापना नहीं कर पाता है, तो वह अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना कर अपनी साधना शुरू कर सकता है।

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कब करें हवन
नौ दिनों की साधना के बाद हवन किस मुहूर्त में कब करें, यह बहुत आवश्यक होता है। पं. आलोक मिश्र ने बताया कि 18 अक्तूबर को सूर्योदय के बाद से हवन शुरू हो जाएगा। दोपहर 2.31 बजे तक कार्य पूर्ण किया जा सकता है। इस समयावधि में शुभ फल मिलेगा।
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