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354 स्कूल डिफाल्टर घोषित
ब्यूरो/अमर उजाला, प्रतापगढ़
Updated Thu, 11 Dec 2014 11:40 PM IST
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एमडीएम का हिसाब-किताब नहीं देने वाले 354 स्कूलों को डिफाल्टर घोषित कर दिया गया है। जिलाधिकारी के आदेश पर बीएसए ने इन स्कूलों के खाता संचालन पर रोक लगा दी है।
जिले के प्राइमरी, पूर्व माध्यमिक और सहायता प्राप्त 3264 स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को दोपहर का भोजन परोसा जा रहा है। बीएसए कार्यालय से इन स्कूलों के खाते में सीधे कनवर्जनकास्ट की रकम भेजी जाती है। अधिकांश स्कूल ऐसे हैं, जिनमें बच्चों की संख्या कम है और धनराशि अधिक भेजी गई है।
इससे वे रुपये का सदुपयोग नहीं कर सके और सत्र के अंत में खपाने की फिराक में है। जिलाधिकारी के आदेश पर बीएसए ने जिले भर के स्कूलों से एमडीएम का हिसाब मांगे। जिले के 354 स्कूल ऐसे हैं जो अभी तक हिसाब नहीं दे सके। बीएसए ने ऐसे स्कूलों पर धनराशि आहरण पर रोक लगा दी है। शाखा प्रबंधकों को जब यह पत्र मिला, तो उन्होंने रुपये देने से साफ मना कर दिया। विभागीय लोगों की मानें तो जिलाधिकारी की इस पहल से कई ऐसे स्कूलों को खुलासा हुआ है। जिन्होंने एमडीएम का लाखों रुपये दबाए हुए थे। बीएसए एसटी हुसैन ने बताया कि जब तक एमडीएम का हिसाब स्कूलों से नहीं आता है, तब तक खाते पर रोक जारी रहेगी।
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जिले के प्राइमरी, पूर्व माध्यमिक और सहायता प्राप्त 3264 स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को दोपहर का भोजन परोसा जा रहा है। बीएसए कार्यालय से इन स्कूलों के खाते में सीधे कनवर्जनकास्ट की रकम भेजी जाती है। अधिकांश स्कूल ऐसे हैं, जिनमें बच्चों की संख्या कम है और धनराशि अधिक भेजी गई है।
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इससे वे रुपये का सदुपयोग नहीं कर सके और सत्र के अंत में खपाने की फिराक में है। जिलाधिकारी के आदेश पर बीएसए ने जिले भर के स्कूलों से एमडीएम का हिसाब मांगे। जिले के 354 स्कूल ऐसे हैं जो अभी तक हिसाब नहीं दे सके। बीएसए ने ऐसे स्कूलों पर धनराशि आहरण पर रोक लगा दी है। शाखा प्रबंधकों को जब यह पत्र मिला, तो उन्होंने रुपये देने से साफ मना कर दिया। विभागीय लोगों की मानें तो जिलाधिकारी की इस पहल से कई ऐसे स्कूलों को खुलासा हुआ है। जिन्होंने एमडीएम का लाखों रुपये दबाए हुए थे। बीएसए एसटी हुसैन ने बताया कि जब तक एमडीएम का हिसाब स्कूलों से नहीं आता है, तब तक खाते पर रोक जारी रहेगी।
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