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Pratapgarh News: 35 फीसदी गेहूं की बोआई बाकी, अब दिसंबर में आएगी डीएपी
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35 percent wheat sowing left, now DAP will come in December
जिले में लक्ष्य के सापेक्ष अभी भी 35 फीसदी गेहूं की बोआई डीएपी न मिलने के कारण पिछड़ रही है। विभाग को चार हजार मीट्रिक टन डीएपी दिसंबर के प्रथम सप्ताह में आने की उम्मीद है। रबी के सीजन में 19,200 मीट्रिक टन डीएपी का लक्ष्य है, जबकि अभी तक 11,230 मीट्रिक टन डीएपी का ही वितरण हो सका है। जिस वजह से किसान परेशान हो रहे हैं।
जिले में एक लाख सैतालिस हजार हेक्टेयर में गेहूं की बोआई की जाती है। साधन सहकारी समितियों और सरकारी बिक्री केंद्रों से डीएपी पखवाड़े भर से नहीं है। बीते सप्ताह जिले में डीएपी की रैक आने पर सिर्फ 85 समितियों को ही खाद मुहैया कराई गई थी। डीएपी की मांग को देखते हुए नवंबर के आखिरी सप्ताह में रैक आनी थी लेकिन ऐसा नहीं हो सका। जिससे गेहूं की बोआई पिछड़ने लगी है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार पिछले वर्ष 18,300 मीट्रिक टन डीएपी की बिक्री समितियों और सरकारी बिक्री केंद्रों से हुई थी। इस वर्ष इफ्को जिले को डीएपी मुहैया कराने में असफल रही। इससे किसान मजबूर होकर निजी दुकानों से अधिक दाम पर खाद खरीद रहे हैं। जिले की 87 समितियों पर लगभग पखवाड़े भर से डीएपी नहीं है, जबकि जिन समितियों पर खाद भेजी गई थी, वहां भी सप्ताह भर से खाद खत्म हो चुकी है।
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नकली डीएपी से मालामाल हो रहे कारोबारी
डीएपी की कमी होने से निजी दुकानों में नकली डीएपी की बिक्री हो रही है। दरअसल, खाद नकली या असली, इसकी पहचान तुरंत करना बेहद मुश्किल है। अगर नमूना लिया भी जाता है, तो महीने भर बाद रिपोर्ट आती है। ऐसे में किसान ठगे जा रहे है और विभागीय अफसर लाचार हैं।
जिले में चार हजार मीट्रिक टन डीएपी की रैक दिसंबर माह के प्रथम सप्ताह में आ रही है, जिले में डीएपी आते ही साधन सहकारी समितियों पर भेजी जाएगी। अभी तक 65 फीसदी किसान बोआई कर चुके हैं। डा. अश्विनी सिंह, जिला कृषि अधिकारी
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जिले में एक लाख सैतालिस हजार हेक्टेयर में गेहूं की बोआई की जाती है। साधन सहकारी समितियों और सरकारी बिक्री केंद्रों से डीएपी पखवाड़े भर से नहीं है। बीते सप्ताह जिले में डीएपी की रैक आने पर सिर्फ 85 समितियों को ही खाद मुहैया कराई गई थी। डीएपी की मांग को देखते हुए नवंबर के आखिरी सप्ताह में रैक आनी थी लेकिन ऐसा नहीं हो सका। जिससे गेहूं की बोआई पिछड़ने लगी है।
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विभागीय अधिकारियों के अनुसार पिछले वर्ष 18,300 मीट्रिक टन डीएपी की बिक्री समितियों और सरकारी बिक्री केंद्रों से हुई थी। इस वर्ष इफ्को जिले को डीएपी मुहैया कराने में असफल रही। इससे किसान मजबूर होकर निजी दुकानों से अधिक दाम पर खाद खरीद रहे हैं। जिले की 87 समितियों पर लगभग पखवाड़े भर से डीएपी नहीं है, जबकि जिन समितियों पर खाद भेजी गई थी, वहां भी सप्ताह भर से खाद खत्म हो चुकी है।
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नकली डीएपी से मालामाल हो रहे कारोबारी
डीएपी की कमी होने से निजी दुकानों में नकली डीएपी की बिक्री हो रही है। दरअसल, खाद नकली या असली, इसकी पहचान तुरंत करना बेहद मुश्किल है। अगर नमूना लिया भी जाता है, तो महीने भर बाद रिपोर्ट आती है। ऐसे में किसान ठगे जा रहे है और विभागीय अफसर लाचार हैं।
जिले में चार हजार मीट्रिक टन डीएपी की रैक दिसंबर माह के प्रथम सप्ताह में आ रही है, जिले में डीएपी आते ही साधन सहकारी समितियों पर भेजी जाएगी। अभी तक 65 फीसदी किसान बोआई कर चुके हैं। डा. अश्विनी सिंह, जिला कृषि अधिकारी