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साधन सहकारी समितियों की बदलेगी सूरत
Updated Fri, 06 Oct 2017 06:27 PM IST
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प्रतापगढ़। ग्रामीण इलाकों में स्थित जिले की 172 साधन सहकारी समितियों की सूरत जल्द ही बदलने वाली है। शासन ने इन समितियों के भवन से लेकर अन्य सारी व्यवस्थाओं को परिवर्तित करने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। समितियों के जर्जर भवन, नए भवनों आवश्यकता और मरम्मत वाली समितियों की संख्या तलब की गई है।
खेती-किसानी की आवश्यकता को पूर्ति करने के उद्देश्य से न्याय पंचायत स्तर पर स्थापित की गई समितियों को मजबूत और स्वावलंबी बनाने के दिशा में प्रयास तेज कर दिया गया है। पहले चरण में उन समितियों को नया भवन मिलेगा, जिनके भवन बेहद जर्जर हैं। कामचलाऊ कार्यालयों की मरम्मत कराकर उन्हें पूरी तरह दुरुस्त किया जाएगा। बता दें कि बीस-बीस साल पूर्व बनी समितियों के भवनों की हालत वर्तमान में यह है कि बरसात में पानी टपकने लगता है। इससे समितियों में रखा बीज और खाद भीग जाता है। यही वजह है कि किसान समितियों से खाद और बीज लेने से कतराते हैं।
किसानों के लिए समितियों को केंद्र बिंदु बनाने की तैयारी चल रही है। कल्याण सिंह शासनकाल में ऐसा ही किया गया था। तब प्रत्येक बुधवार को समितियों पर ही ग्राम पंचायत स्तर के कर्मचारियों की उपस्थिति अनिवार्य की गई थी। इससे गांव के लोगों का यह फायदा होता था कि उन्हें कर्मचारियों को खोजना नहीं पड़ता था। अब सरकार ने एक बार फिर समितियों पर अपना ध्यान टिका दिया है। वहीं सहायक निबंधक, सहकारिता अरविंद प्रकाश का कहना है कि जर्जर समितियों के भवनों को ठीक करने और अति जर्जर भवनों के स्थान पर नया भवन बनाने का प्राक्लन मांगा गया है। शासन के इस प्रयास से सभी समितियां एक बार मजबूत स्थिति में हो जाएंगी।
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खेती-किसानी की आवश्यकता को पूर्ति करने के उद्देश्य से न्याय पंचायत स्तर पर स्थापित की गई समितियों को मजबूत और स्वावलंबी बनाने के दिशा में प्रयास तेज कर दिया गया है। पहले चरण में उन समितियों को नया भवन मिलेगा, जिनके भवन बेहद जर्जर हैं। कामचलाऊ कार्यालयों की मरम्मत कराकर उन्हें पूरी तरह दुरुस्त किया जाएगा। बता दें कि बीस-बीस साल पूर्व बनी समितियों के भवनों की हालत वर्तमान में यह है कि बरसात में पानी टपकने लगता है। इससे समितियों में रखा बीज और खाद भीग जाता है। यही वजह है कि किसान समितियों से खाद और बीज लेने से कतराते हैं।
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किसानों के लिए समितियों को केंद्र बिंदु बनाने की तैयारी चल रही है। कल्याण सिंह शासनकाल में ऐसा ही किया गया था। तब प्रत्येक बुधवार को समितियों पर ही ग्राम पंचायत स्तर के कर्मचारियों की उपस्थिति अनिवार्य की गई थी। इससे गांव के लोगों का यह फायदा होता था कि उन्हें कर्मचारियों को खोजना नहीं पड़ता था। अब सरकार ने एक बार फिर समितियों पर अपना ध्यान टिका दिया है। वहीं सहायक निबंधक, सहकारिता अरविंद प्रकाश का कहना है कि जर्जर समितियों के भवनों को ठीक करने और अति जर्जर भवनों के स्थान पर नया भवन बनाने का प्राक्लन मांगा गया है। शासन के इस प्रयास से सभी समितियां एक बार मजबूत स्थिति में हो जाएंगी।
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