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पंचायत चुनाव लड़ने वालों के 3 करोड़ 2 लाख रुपये हो गए जब्त
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पंचायत चुनाव लड़ने वालों के 3 करोड़ 2 लाख रुपये हो गए जब्त
वर्ष 2015 व 16 में पंचायत चुनाव लड़ने वाले अधिकांश प्रत्याशियों की जमानत जब्त होने से बच गई थी। इसके बाद भी जीते व हारे हुए प्रत्याशी अपनी जमानत धनराशि लेने नगरीय निकाय व पंचायत कार्यालय नहीं आए। जिसके चलते पंचायत कार्यालय ने 3 करोड़ रुपये जब्त कर सरकार के खाते में ट्रांसफर कर दिए हैं। चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी अपने खर्च का ब्यौरा आवेदन के साथ कार्यालय में जमा नहीं कर सके। जिसके चलते उनकी जमानत राशि विभाग ने नहीं लौटाई।
साल के आखिरी माह में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव प्रस्तावित है। जिसके लिए गांवों में अभी से ही बिगुल बज गया है। वर्ष 2015 में हुए बीडीसी सदस्य, प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य के साथ ही जिला पंचायत सदस्य पद के लिए चुनाव हुआ था। जिसमे बड़ी संख्या में प्रत्याशी मैदान में उतरे थे। वर्ष 2016 में जिला पंचायत अध्यक्ष व क्षेत्र पंचायत प्रमुख का चुनाव हुआ था। यहां भी प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव मैदान में उतरने वाले प्रत्याशियों को चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित जमानत राशि जमा करना होता है। जीतने वाले प्रत्याशी के अलावा कुल वैद्य मतों में 1/5 प्रतिशत मत से कम पाने की जमानत धनराशि जब्त कर ली जाती है। इससे अधिक मत प्राप्त करने वालों की जमानत धनराशि नगरीय निकाय व पंचायत चुनाव कार्यालय द्वारा आवेदन करने के बाद वापस कर दिया जाता है। जमानत धनराशि वापस करने के लिए जीते हुए उम्मीदवारों को भी खर्च का विवरण देना होता है।
प्रधान, बीडीसी सदस्य, ग्राम पंचायत से लेकर ब्लाक प्रमुख चुने जाने वाले अधिकांश लोगों ने अपनी जमानत धनराशि वापसी के लिए आवेदन ही नहीं किया। ऐसी दशा में नगरीय निकाय/ पंचायत कार्यालय द्वारा 3,02,33500 रुपये जब्त किया जा चुका है। सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी एसके बर्नवाल ने बताया कि जमानतराशि वापसी के लिए अधूरा आवेदन पत्र कुछ लोगों ने दिया था। बहुत से प्रत्याशियों ने जमानत राशि वापसी का कोई प्रयास ही नहीं किया। जिसके चलते जमानत धनराशि जब्त कर ली गई है।
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वर्ष 2015 व 16 में पंचायत चुनाव लड़ने वाले अधिकांश प्रत्याशियों की जमानत जब्त होने से बच गई थी। इसके बाद भी जीते व हारे हुए प्रत्याशी अपनी जमानत धनराशि लेने नगरीय निकाय व पंचायत कार्यालय नहीं आए। जिसके चलते पंचायत कार्यालय ने 3 करोड़ रुपये जब्त कर सरकार के खाते में ट्रांसफर कर दिए हैं। चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी अपने खर्च का ब्यौरा आवेदन के साथ कार्यालय में जमा नहीं कर सके। जिसके चलते उनकी जमानत राशि विभाग ने नहीं लौटाई।
साल के आखिरी माह में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव प्रस्तावित है। जिसके लिए गांवों में अभी से ही बिगुल बज गया है। वर्ष 2015 में हुए बीडीसी सदस्य, प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य के साथ ही जिला पंचायत सदस्य पद के लिए चुनाव हुआ था। जिसमे बड़ी संख्या में प्रत्याशी मैदान में उतरे थे। वर्ष 2016 में जिला पंचायत अध्यक्ष व क्षेत्र पंचायत प्रमुख का चुनाव हुआ था। यहां भी प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव मैदान में उतरने वाले प्रत्याशियों को चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित जमानत राशि जमा करना होता है। जीतने वाले प्रत्याशी के अलावा कुल वैद्य मतों में 1/5 प्रतिशत मत से कम पाने की जमानत धनराशि जब्त कर ली जाती है। इससे अधिक मत प्राप्त करने वालों की जमानत धनराशि नगरीय निकाय व पंचायत चुनाव कार्यालय द्वारा आवेदन करने के बाद वापस कर दिया जाता है। जमानत धनराशि वापस करने के लिए जीते हुए उम्मीदवारों को भी खर्च का विवरण देना होता है।
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प्रधान, बीडीसी सदस्य, ग्राम पंचायत से लेकर ब्लाक प्रमुख चुने जाने वाले अधिकांश लोगों ने अपनी जमानत धनराशि वापसी के लिए आवेदन ही नहीं किया। ऐसी दशा में नगरीय निकाय/ पंचायत कार्यालय द्वारा 3,02,33500 रुपये जब्त किया जा चुका है। सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी एसके बर्नवाल ने बताया कि जमानतराशि वापसी के लिए अधूरा आवेदन पत्र कुछ लोगों ने दिया था। बहुत से प्रत्याशियों ने जमानत राशि वापसी का कोई प्रयास ही नहीं किया। जिसके चलते जमानत धनराशि जब्त कर ली गई है।
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