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जिले में सहकारी बैंक की 25 शाखाओं में तालाबंदी

Sat, 26 Nov 2016 12:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़।
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़। Updated Sat, 26 Nov 2016 12:18 AM IST
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25 coperative bank closed
न्‍यूूज

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नोटबंदी के विरोध में शुक्रवार को जिला सहकारी बैंक के कर्मचारियों ने जिले की 25 शाखाओं में तालाबंदी कर प्रदर्शन किया। बैंक कर्मचारियों की मांग है कि राष्ट्रीयकृत बैंकों की तरह उन्हें भी रुपये जमा करने के लिए निर्देश जारी किए जाएं। कर्मचारियों ने चेताया है कि यह तो अभी सांकेतिक प्रदर्शन है, अगर केंद्र सरकार ने ठोस फैसला नहीं लिया तो सड़क पर उतरने को बाध्य होंगे। उधर, हजार और पांच सौ के पुराने नोट नहीं लिए जाने से उन लाखों ग्राहकों के सामने मुसीबत खड़ी हो गई है जिनका खाता सहकारी बैंक में है।

जिले के सहकारी बैंकों और साधन सहकारी समितियों पर पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट लेने पर 14 नवंबर से रोक लगा रखी है। इससे नाराज बैंक कर्मियों ने शुक्रवार को एक दिवसीय तालाबंदी कर विरोध प्रदर्शन किया। जिले में कोआपरेटिव बैंक की 25 शाखाएं और 172 साधन सहकारी समितियां है। शुक्रवार को इन बैंकों में दिनभर ताला लटकता रहा। मुख्यालय स्थित जिला सहकारी बैंक में एकत्रित कर्मचारियों ने आरबीआई के इस फैसले का विरोध करते हुए राष्ट्रीयकृत बैंकों की तरह उन्हें भी रुपये जमा करने की छूट मांगी है। केपी सिंह ने कहा कि जिला सहकारी बैंकों में पुराने नोट लेने से मना करने पर साधन सहकारी समितियों पर किसानों को खाद और बीज नहीं मिल रहा है। यह समितियों कोआपरेटिव बैंक से सम्बंधित होती हैं। कर्मचारियों ने चेताया कि जल्द ही कोई ठोस पहल नहीं की, तो आन्दोलन तेज किया जाएगा। इस मौके पर वीरेंद्र प्रताप सिंह, ज्ञानेंद्र सिंह, कमलेश सिंह, पंकज कुमार आदि लोग मौजूद रहे।
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हर खाते का दो हिसाब

नोटबंदी के बाद बैंकोें में जमा होने वाले पुराने नोटों का ब्यौरा भारतीय रिजर्व बैंक ने मांगा है। नौ नवंबर से 22 नवंबर तक पचास हजार से अधिक रुपये जमा करने वालों का डाटा मांगा गया है। इससे बैंक कर्मचारियों की परेशानी एक बार फिर बढ़ गई है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर की आधी रात से पांच सौ और एक हजार रुपये के पुराने नोटों को प्रचलन से बाहर कर दिया था। यह खबर आम होते ही दस नवंबर से पुराने नोट जमा करने के लिए बैंकों में भीड़ उमड़ पड़ी। ग्राहकों की भारी भीड़ को देखते हुए छुट्टी के दिनों में बैंकों को खोलकर रुपये जमा कराए गए। 22 नवंबर तक बैंक खातों में तेजी से धनराशि जमा हुई। भारतीय रिजर्व बैंक की नजर अब ऐसे लोगों पर है, जिन्होंने एक दिन में पचास हजार रुपये या इससे अधिक की धनराशि जमा की है। हालांकि सरकार ने यह घोषणा की है कि ढाई लाख रुपये तक खाते में होने पर किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी। मगर, ढाई से अधिक की धनराशि होने पर कार्रवाई संभव है। मगर इन दिनों आरबीआई ने सकुर्लर जारी कर सभी बैंकों से डाटा तलब किया है। इस आंकडे़ के  पीछे आरबीआई की क्या मंशा यह तो नहीं कहा जा सकता है, मगर इतना तो तय है कि ऐसे लोगों से आय का स्रोत की जानकारी मांगी जा सकती है।
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