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नाम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जैसी भी मरीजों को नहीं मिल रही सहूलियत
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चौबीस घंटे का दावा, 12 घंटे भी नहीं संचालित हो रहे कई सीएचसी
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों जैसी भी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं मरीजों को
पर्वतपुर, मंदाह, गड़वारा और पृथ्वीगंज सीएचसी में लटकता रहता है ताला
संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। शासन की तरफ से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में चौबीस घंटे स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने का दावा किया जाता है, लेकिन जिले के छह सीएचसी का कायदे से 12 घंटे भी सं चालन नहीं हो रहा है। महज चार से पांच घंटे महज ओपीडी का संचालन हो रहा है। इससे मरीज परेशान हो रहे हैं। विभाग के जिम्मेदार अधिकारी अनजान बने रहते हैं।
मानधाता विकास खंड के पर्वतपुर में 30 बेड के सामुदायिक स्वास्थ्य केद्र की स्थापना हुई है। सीएचसी होते हुए भी इसे पीएचसी से अटैच किया गया है। मानधाता प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को 24 घंटे तो पर्वतपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को कागजों पर केवल आठ घंटे ही संचालित किया जा रहा है। जबकि पर्वतपुर के आसपास सब सेंटर की भी स्थापना नहीं हुई है। इससे लोगों को परेशान होना पड़ता है। पर्वतपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में महज दंत चिकित्सक ही आते हैं। अन्य चिकित्सक गायब रहते हैं। यहां स्वीपर तक की तैनाती नहीं है। डेंटल की गैरमौजूदगी में वार्ड ब्वॉय विजय यादव के भरोसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का संचालन होता है। शनिवार को दोपहर बारह बजे तक महज दंत चिकित्सक मौजूद थे। अन्य चिकित्सकों का पता नहीं था। स्थानीय लोगों ने बताया कि दोपहर एक बजे तक डॉक्टर भी चले जाते हैं। ऐसे में दोपहर बाद यदि किसी की हालत बिगड़ती है तो मजबूरन मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता है। शनिवार को दोपहर करीब एक बजे पूर्व जिला पंचायत सदस्य नरेंद्र सिंह, मंथन सोमवंशी, कुलदीप सिंह, विक्रम देवा, सुरेंद्र कुमार, अनुराग सिंह, प्रशांत मिश्र समेत दर्जनों मरीज इलाज के लिए पर्वतपुर सीएचसी पहुंचे, लेकिन डॉक्टर नहीं थे। इससे नाराज ग्रामीणों ने प्रधान राजेंद्र प्रताप सिंह बबऊ के नेतृत्व में नारेबाजी शुरू कर दी। ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों से सप्ताह भर में नियमित ओपीडी व प्रसव व्यवस्था नहीं चालू होने पर अनशन की चेतावनी दी है।
इनसेट------------
मंदाह में भी डॉक्टरों की नियमित तैनाती नहीं
किशुनगंज। स्थानीय बाजार में मंदाह के नाम से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का संचालन हो रहा है। यहां नियमित एक भी चिकित्सक की तैनाती नहीं की गई है। स्थानीय लोगों ने बताया कि तीन महीने के लिए कोनी कंधई निवासी फार्मासिस्ट प्रदीप ट्रेनिंग पर आए थे। प्रशिक्षण पूरा हो गया। अब उनके भरोसे 30 बेड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का संचालन हो रहा है। यहां तैनात डॉक्टर सुबह दस बजे आते हैं और दोपहर एक से दो बजे के बीच कोहड़ौर सीएचसी चले जाते हैं। इससे लाखों की लागत से बनकर तैयार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हाथी का दात साबित हो रहा है। इससे ग्रामीणों में आक्रोश है। सीएमओ से कई बार ग्रामीण शिकायत कर चुके हैं, मगर उनका ध्यान इस अस्पताल की ओर नहीं पड़ रहा है।
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गड़वारा में फार्मासिस्ट के भरोसे हो रहा संचालन
गड़वारा में लाखों की लागत से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और चिकित्सकों के साथ कर्मचारियों के रहने के लिए आवास बने हैं। यहां महज एक दांत के डॉक्टर कभी-कभार आते हैं। फार्मासिस्ट अकेले अस्पताल का संचालन करता है। सुबह नौ बजे आता है ओर दोपहर दो बजे तक वह भी घर चला जाता है। मरीजों की हालत बिगड़ने पर संडवाचंद्रिका सीएचसी य फिर मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर देता है। 30 बेड का अस्पताल होते हुए भी लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
इनसेट------------
लक्ष्मणपुर सीएचसी में दोपहर दो बजे लटक जाता है ताला
लक्ष्मणपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भी बुरा हाल है। दोपहर दो बजे के बाद सीएचसी में ताला लटक जाता है। ऐसे में गंभीर मरीजों को परेशान होना पड़ता है। इलाज कराने के लिए झोलाछाप या फिर मेडिकल कॉलेज अथवा लालगंज सीएचसी के चक्कर काटने पड़ते हैं। जबकि इस सीएचसी में सात चिकित्सकों की तैनाती की गई है। यही हाल सीएचसी कहला और पृथ्वीगंज बाजार का भ्हैैै । इन अस्पतालों के खुलने और बंद होने का कोई समय तय नहीं है।
वर्जन----------
डॉक्टरों की कमी है। इसलिए नए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का संचालन 24 घंटे नहीं हो पा रहा है। यदि चिकित्सक समय से अस्पताल नहीं पहुंच रहे हैं और मरीजों के इलाज में कोताही बरत रहे हैं तो जांच करवाकर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखा जाएगा।
डॉक्टर सीपी शर्मा, एसीएमओ
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चौबीस घंटे का दावा, 12 घंटे भी नहीं संचालित हो रहे कई सीएचसी
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों जैसी भी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं मरीजों को
पर्वतपुर, मंदाह, गड़वारा और पृथ्वीगंज सीएचसी में लटकता रहता है ताला
संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। शासन की तरफ से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में चौबीस घंटे स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने का दावा किया जाता है, लेकिन जिले के छह सीएचसी का कायदे से 12 घंटे भी सं चालन नहीं हो रहा है। महज चार से पांच घंटे महज ओपीडी का संचालन हो रहा है। इससे मरीज परेशान हो रहे हैं। विभाग के जिम्मेदार अधिकारी अनजान बने रहते हैं।
मानधाता विकास खंड के पर्वतपुर में 30 बेड के सामुदायिक स्वास्थ्य केद्र की स्थापना हुई है। सीएचसी होते हुए भी इसे पीएचसी से अटैच किया गया है। मानधाता प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को 24 घंटे तो पर्वतपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को कागजों पर केवल आठ घंटे ही संचालित किया जा रहा है। जबकि पर्वतपुर के आसपास सब सेंटर की भी स्थापना नहीं हुई है। इससे लोगों को परेशान होना पड़ता है। पर्वतपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में महज दंत चिकित्सक ही आते हैं। अन्य चिकित्सक गायब रहते हैं। यहां स्वीपर तक की तैनाती नहीं है। डेंटल की गैरमौजूदगी में वार्ड ब्वॉय विजय यादव के भरोसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का संचालन होता है। शनिवार को दोपहर बारह बजे तक महज दंत चिकित्सक मौजूद थे। अन्य चिकित्सकों का पता नहीं था। स्थानीय लोगों ने बताया कि दोपहर एक बजे तक डॉक्टर भी चले जाते हैं। ऐसे में दोपहर बाद यदि किसी की हालत बिगड़ती है तो मजबूरन मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता है। शनिवार को दोपहर करीब एक बजे पूर्व जिला पंचायत सदस्य नरेंद्र सिंह, मंथन सोमवंशी, कुलदीप सिंह, विक्रम देवा, सुरेंद्र कुमार, अनुराग सिंह, प्रशांत मिश्र समेत दर्जनों मरीज इलाज के लिए पर्वतपुर सीएचसी पहुंचे, लेकिन डॉक्टर नहीं थे। इससे नाराज ग्रामीणों ने प्रधान राजेंद्र प्रताप सिंह बबऊ के नेतृत्व में नारेबाजी शुरू कर दी। ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों से सप्ताह भर में नियमित ओपीडी व प्रसव व्यवस्था नहीं चालू होने पर अनशन की चेतावनी दी है।
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मंदाह में भी डॉक्टरों की नियमित तैनाती नहीं
किशुनगंज। स्थानीय बाजार में मंदाह के नाम से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का संचालन हो रहा है। यहां नियमित एक भी चिकित्सक की तैनाती नहीं की गई है। स्थानीय लोगों ने बताया कि तीन महीने के लिए कोनी कंधई निवासी फार्मासिस्ट प्रदीप ट्रेनिंग पर आए थे। प्रशिक्षण पूरा हो गया। अब उनके भरोसे 30 बेड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का संचालन हो रहा है। यहां तैनात डॉक्टर सुबह दस बजे आते हैं और दोपहर एक से दो बजे के बीच कोहड़ौर सीएचसी चले जाते हैं। इससे लाखों की लागत से बनकर तैयार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हाथी का दात साबित हो रहा है। इससे ग्रामीणों में आक्रोश है। सीएमओ से कई बार ग्रामीण शिकायत कर चुके हैं, मगर उनका ध्यान इस अस्पताल की ओर नहीं पड़ रहा है।
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गड़वारा में फार्मासिस्ट के भरोसे हो रहा संचालन
गड़वारा में लाखों की लागत से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और चिकित्सकों के साथ कर्मचारियों के रहने के लिए आवास बने हैं। यहां महज एक दांत के डॉक्टर कभी-कभार आते हैं। फार्मासिस्ट अकेले अस्पताल का संचालन करता है। सुबह नौ बजे आता है ओर दोपहर दो बजे तक वह भी घर चला जाता है। मरीजों की हालत बिगड़ने पर संडवाचंद्रिका सीएचसी य फिर मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर देता है। 30 बेड का अस्पताल होते हुए भी लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
इनसेट------------
लक्ष्मणपुर सीएचसी में दोपहर दो बजे लटक जाता है ताला
लक्ष्मणपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भी बुरा हाल है। दोपहर दो बजे के बाद सीएचसी में ताला लटक जाता है। ऐसे में गंभीर मरीजों को परेशान होना पड़ता है। इलाज कराने के लिए झोलाछाप या फिर मेडिकल कॉलेज अथवा लालगंज सीएचसी के चक्कर काटने पड़ते हैं। जबकि इस सीएचसी में सात चिकित्सकों की तैनाती की गई है। यही हाल सीएचसी कहला और पृथ्वीगंज बाजार का भ्हैैै । इन अस्पतालों के खुलने और बंद होने का कोई समय तय नहीं है।
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डॉक्टरों की कमी है। इसलिए नए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का संचालन 24 घंटे नहीं हो पा रहा है। यदि चिकित्सक समय से अस्पताल नहीं पहुंच रहे हैं और मरीजों के इलाज में कोताही बरत रहे हैं तो जांच करवाकर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखा जाएगा।
डॉक्टर सीपी शर्मा, एसीएमओ