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231 अपात्रों को थी राष्ट्रीय पारिवारिक योजना का लाभ देने की तैयारी

Thu, 20 Dec 2018 12:02 AM IST
pratapgarh Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 20 Dec 2018 12:02 AM IST
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231 ineligible to prepare for the benefit of the National Family Scheme
डेमो - फोटो : डेमो
 लेखपालों की लापरवाही और मनमानी के कारण जिले में 231 अपात्रों को भी राष्ट्रीय पारिवारिक योजना का लाभ देने की तैयारी थी। हालांकि समाज कल्याण विभाग के सत्यापन में इसकी पोल खुल गई। इससे 69,30,000 रुपये का दुरुपयोग होने से बच गया। राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के  तहत आवेदन करने वाले 231 लोग विभागीय जांच में अपात्र मिले, जबकि तहसीलों से जो रिपोर्ट आई थी, उसमें सभी को पात्र बताया गया था। समाज कल्याण अधिकारी ने एसडीएम को पत्र भेजकर लेखपालों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा था, मगर अभी तक इस दिशा में कोई पहल नहीं हुई।  
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गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों के मुखिया का निधन होने पर राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के तहत आश्रितों को 30,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। समाज कल्याण विभाग से संचालित इस योजना का लाभ 50 वर्ष की उम्र के मरने वाले लोगों के परिवारों को ही मिलता है। योजना के लिए आवेदक को आनलाइन आवेदन करना होता है और उसकी हार्डकापी विभाग में जमा करनी होती है। विभागीय अधिकारी राजस्व विभाग से सत्यापन कराने के  बाद योजना का लाभ देते हैं। जिले की विभिन्न तहसीलों से आई सत्यापन रिपोर्ट में 231 आवेदन ऐसे मिले हैं, जिन्होंने विभाग को गुमराह कर योजना का लाभ लेने का प्रयास किया।
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विभागीय लोगों की मानें तो इसमें अधिकांश लाभार्थी ऐसे थे, जो वृद्धावस्था की पेंशन ले रहे थे और उनकी मौत के बाद योजना का लाभ लेने के लिए परिवार वालों ने आवेदन कर दिया। कुछ ऐसे भी मामले देखने को मिले, जिनमें परिवार के मुखिया की मौत चार साल पहले हो गई थी और वह अब योजना का लाभ लेना चाह रहे थे। विभाग में योजना का लाभ लेने वाले आवेदकों की संख्या में बढ़ोतरी होने पर अफसरों ने अपने कर्मचारियों से सत्यापन कराने का फैसला किया। विभागीय कर्मचारी जब आवेदकों के घर पहुंचे श्तो इस खेल का खुलासा हुआ। फिलहाल जिले के 334 लाभार्थियों के खाते में तीस-तीस हजार रुपये भेजे जा चुके हैं।  
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राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के  लिए एक वर्ष के अंदर ही आवेदन करने पर लाभ मिलता है। अगर इससे अधिक समय बीत जाता है, तो आवेदक को योजना का लाभ नहीं दिया जाता है।  


केंद्र सरकार की ओर से बीपीएल परिवारों को विपदा की घड़ी में मिलने वाली तीस हजार रुपये की राशि गृहस्थी की गाड़ी चलाने के लिए दी जाती है। मगर विभाग में सक्रिय दलाल योजना का लाभ वास्तविक लोगों तक नहीं पहुंचने दे रहे हैं।


जिले के 156 आवेदकों को अभी भी योजना का लाभ मिलने का इंतजार है। आनलाइन आवेदन करने वाले इन लाभार्थियों को कभी सत्यापन नहीं होने और कभी बजट नहीं होने का बहाना बनाकर लौटा दिया जाता है।  



आनलाइन आवेदन करने के बाद आवेदकों की हार्डकापी का सत्यापन कराया जाता है। राजस्व विभाग का सत्यापन पहली बार फेल होने के  कारण लेखपालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए एसडीएम को पत्र लिखा गया है। अब सभी आवेदनों का विभागीय कर्मचारियों के सत्यापन के बाद ही योजना का लाभ दिया जा रहा है।  
एनएन द्विवेद्वी, जिला समाज कल्याण अधिकारी।
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