{"_id":"59808d474f1c1bb4728b45b4","slug":"21501596999-pratapgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"औद्योगिक क्षेत्र नहीं, इसे भूतों का डेरा कहिए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
औद्योगिक क्षेत्र नहीं, इसे भूतों का डेरा कहिए
Updated Tue, 01 Aug 2017 07:46 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रतापगढ़। बजबजाती नालियां और जगह-जगह कच्चे रास्ते में भरा पानी औद्योगिक क्षेत्र सुखपालनगर की पहचान है। न बिजली का पता है न पेयजल का। जगह-जगह गंदगी फैली रहती है। अफसरों के साथ प्रतिमाह होने वाली उद्योग बंधु की बैठक में समस्या के समाधान पर जोर दिया जाता है, लेकिन बैठक खत्म होते ही समस्याओं को लेकर हुई चर्चा फाइलों में कैद हो जाती है।
शहर से करीब चार किमी दूर सुखपाल नगर को औद्योगिक क्षेत्र घोषित किया गया है। नाम तो औद्योगिक क्षेत्र है, मगर सुविधाएं गांव से भी बदतर हैं। बरसात में इस इलाके में लोग खड़ा होना भी नहीं चाहते हैं। औद्योगिक क्षेत्र में पक्के रास्ते और नालियों का निर्माण नहीं होने से गंदगी फैली रहती है। बरसात और उद्योग इकाईयों से निकलने वाला पानी जहां संक्रामक बीमारियों को दावत दे रहा है, वहीं दुर्गंध से लोगों को नाक ढककर आना-जाना पड़ रहा है। बताया जाता है कि औद्योगिक क्षेत्र में अभी तक बाउंड्री तक निर्माण नहीं किया गया है। इससे इकाईयों में जहां चोरी की घटनाएं आए दिन होती रहती हैं, वहीं असुरक्षित महसूस करते हैं। सुखपालनगर में छुट्टा जानवरों की चहलकदमी ज्यादा है। दरवाजा खुला देखकर मवेशी इकाईयों में घुस जाते हैं और उत्पात मचाते हैं। औद्योगिक क्षेत्र में व्यापारियों को चौबीस घंटे बिजली और साफ पानी नहीं मिलने से इकाईयां ठप हो रही हैं। गोल्डेन फ्लोर मिल, प्रभा कुक्कुट पालन, मोबीन नमकीन फैक्ट्री, अभय राइस मिल पर ताला लग गया है। कई इकाईयों में ताला लगने वाला है।
औद्योगिक क्षेत्र में व्यापारी दस वर्षों से विद्युत उपकेंद्र और पुलिस चौकी की मांग कर रहे हैं। मगर अभी तक इस दिशा में कोई पहल नहीं हुई है। उपकेंद्र नहीं होने से शहर से भी बदतर स्थिति बिजली आपूर्ति की रहती है।
विज्ञापन
औद्योगिक क्षेत्र में जलनिकासी की समस्या गंभीर है। इसके निराकरण के लिए पहल जारी है। नाली का निर्माण कराने के लिए शासन से धनराशि की मांग की गई है, जल्द ही निर्माण कराया जाएगा। -आरएस यादव, महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र, प्रतापगढ़।
विज्ञापन
शहर से करीब चार किमी दूर सुखपाल नगर को औद्योगिक क्षेत्र घोषित किया गया है। नाम तो औद्योगिक क्षेत्र है, मगर सुविधाएं गांव से भी बदतर हैं। बरसात में इस इलाके में लोग खड़ा होना भी नहीं चाहते हैं। औद्योगिक क्षेत्र में पक्के रास्ते और नालियों का निर्माण नहीं होने से गंदगी फैली रहती है। बरसात और उद्योग इकाईयों से निकलने वाला पानी जहां संक्रामक बीमारियों को दावत दे रहा है, वहीं दुर्गंध से लोगों को नाक ढककर आना-जाना पड़ रहा है। बताया जाता है कि औद्योगिक क्षेत्र में अभी तक बाउंड्री तक निर्माण नहीं किया गया है। इससे इकाईयों में जहां चोरी की घटनाएं आए दिन होती रहती हैं, वहीं असुरक्षित महसूस करते हैं। सुखपालनगर में छुट्टा जानवरों की चहलकदमी ज्यादा है। दरवाजा खुला देखकर मवेशी इकाईयों में घुस जाते हैं और उत्पात मचाते हैं। औद्योगिक क्षेत्र में व्यापारियों को चौबीस घंटे बिजली और साफ पानी नहीं मिलने से इकाईयां ठप हो रही हैं। गोल्डेन फ्लोर मिल, प्रभा कुक्कुट पालन, मोबीन नमकीन फैक्ट्री, अभय राइस मिल पर ताला लग गया है। कई इकाईयों में ताला लगने वाला है।
विज्ञापन
औद्योगिक क्षेत्र में व्यापारी दस वर्षों से विद्युत उपकेंद्र और पुलिस चौकी की मांग कर रहे हैं। मगर अभी तक इस दिशा में कोई पहल नहीं हुई है। उपकेंद्र नहीं होने से शहर से भी बदतर स्थिति बिजली आपूर्ति की रहती है।
विज्ञापन
औद्योगिक क्षेत्र में जलनिकासी की समस्या गंभीर है। इसके निराकरण के लिए पहल जारी है। नाली का निर्माण कराने के लिए शासन से धनराशि की मांग की गई है, जल्द ही निर्माण कराया जाएगा। -आरएस यादव, महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र, प्रतापगढ़।