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बाबागंज, बिहार और कुंडा में डंप हैं शौचालय के करोड़ों
Updated Mon, 26 Nov 2018 11:17 PM IST
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बाबागंज, बिहार और कुंडा में डंप हैं शौचालय के करोड़ों रुपये
उपभोग की रिपोर्ट आने के पहले ही 12.69 करोड़ रुपये का मिला तोहफा
कागज पर तैयार हो रहा है लक्ष्य, 30 नवंबर को जिला घोषित होगा ओडीएफ
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। स्वच्छ भारत मिशन में लगे अधिकारी एक तरफ जहां जिले को ओडीएफ करने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं कुंडा, बाबागंज और बिहार विकास खंड के लगभग दो दर्जन गांवों में करोड़ों रुपये डंप हैं। आश्चर्य की बात तो यह रही कि इन ब्लाकों से शौचालय के लिए भेजी गई रकम की उपभोग रिपोर्ट आने के पहले ही प्रधानों को दिवाली के पहले 12.69 करोड़ रुपये का तोहफा दे दिया गया।
जिले को ओडीएफ करने के लिए शासन ने 526.36 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है। इसमें से लगभग पांच सौ करोड़ रुपये जिले को मिल भी चुके हैं। शासन से मिलने वाली यह धनराशि ग्राम पंचायतों में भेज दी गई है। जिले में शौचालय निर्माण में अधिकारी जो तेजी दिखा रहे हैं, वह वास्तविक रुप में धरातल पर देखने को नहीं मिल रही है। आलम यह है कि जिले में कागज पर शौचालय तैयार हो रहे हैं। अफसर भी इतने मेहरबान हैं कि लालच देने वाले प्रधानों के खाते में आवश्यकता से अधिक धनराशि भेजी जा रही है। विभाग के दावे की पोल बिहार, बाबागंज और कुंडा ब्लाक के राजस्व गांव खोल रहे हैं। इन ब्लाकों के ग्राम पंचायतों में करोड़ों रुपये भेज दिए गए हैं, मगर शौचालय देखने कोई नहीं जा रहा है। एक खंड प्रेरक ने विभाग को जो रिपोर्ट दी है, उससे इस मिशन में लगे सभी लोग हैरत में हैं। इन ब्लाकों में करोड़ों रुपये डंप होने के बावजूद दिवाली के पहले 12.69 करोड़ रुपये भेज दिए गए हैं। दबंग प्रधानों के आगे बेचारे कर्मचारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। इधर विभाग के मुखिया भी चुप्पी साधकर बैठे हुए हैं। हालांकि विभाग ने 30 नवंबर को ओडीएफ करने की तैयारी कर ली है।
इनसेट----------
हकीकत देखने गांव में नहीं जाते डीपीआरओ
शौचालय निर्माण के लिए रेवड़ी की तरह रुपये बांटने वाले डीपीआरओ शौचालय की हकीकत देखने कभी भी गांव नहीं जाते हैं। वास्तव में अगर गांव जाकर शौचालय निर्माण की वास्तविकता खंगाली जाय, तो असलियत सामने आ सकती है। मगर कर्मचारियों के बताने के बाद भी कोई पहल नहीं होती है।
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इनसेट-------
अनियमितता में 22 कर्मचारियों पर गिर चुकी है गाज
शौचालय की रकम डकारने में अभी तक 22 वीडीओ पर गाज गिर चुकी है, जबकि चार प्रधानों को पैदल किया जा चुका है। इसके बाद भी अनियमितता पर विराम नहीं लग रहा है। संडवाचंद्रिका, सदर, सांगीपुर, शिवगढ़, गौरा, आसपुर देवसरा में दो दर्जन से अधिक प्रधानों और सचिवों को अल्टीमेटम दिया गया है।
वर्जन----
शौचालय निर्माण में जहां भी अनियमितता मिलती है, उसकी जांच कराकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। इन ब्लाकों में अनियमितता की शिकायत मिली है, मामले की जांच हो रही है, दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
उमाकांत पांडेय, डीपीआरओ।
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उपभोग की रिपोर्ट आने के पहले ही 12.69 करोड़ रुपये का मिला तोहफा
कागज पर तैयार हो रहा है लक्ष्य, 30 नवंबर को जिला घोषित होगा ओडीएफ
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। स्वच्छ भारत मिशन में लगे अधिकारी एक तरफ जहां जिले को ओडीएफ करने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं कुंडा, बाबागंज और बिहार विकास खंड के लगभग दो दर्जन गांवों में करोड़ों रुपये डंप हैं। आश्चर्य की बात तो यह रही कि इन ब्लाकों से शौचालय के लिए भेजी गई रकम की उपभोग रिपोर्ट आने के पहले ही प्रधानों को दिवाली के पहले 12.69 करोड़ रुपये का तोहफा दे दिया गया।
जिले को ओडीएफ करने के लिए शासन ने 526.36 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है। इसमें से लगभग पांच सौ करोड़ रुपये जिले को मिल भी चुके हैं। शासन से मिलने वाली यह धनराशि ग्राम पंचायतों में भेज दी गई है। जिले में शौचालय निर्माण में अधिकारी जो तेजी दिखा रहे हैं, वह वास्तविक रुप में धरातल पर देखने को नहीं मिल रही है। आलम यह है कि जिले में कागज पर शौचालय तैयार हो रहे हैं। अफसर भी इतने मेहरबान हैं कि लालच देने वाले प्रधानों के खाते में आवश्यकता से अधिक धनराशि भेजी जा रही है। विभाग के दावे की पोल बिहार, बाबागंज और कुंडा ब्लाक के राजस्व गांव खोल रहे हैं। इन ब्लाकों के ग्राम पंचायतों में करोड़ों रुपये भेज दिए गए हैं, मगर शौचालय देखने कोई नहीं जा रहा है। एक खंड प्रेरक ने विभाग को जो रिपोर्ट दी है, उससे इस मिशन में लगे सभी लोग हैरत में हैं। इन ब्लाकों में करोड़ों रुपये डंप होने के बावजूद दिवाली के पहले 12.69 करोड़ रुपये भेज दिए गए हैं। दबंग प्रधानों के आगे बेचारे कर्मचारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। इधर विभाग के मुखिया भी चुप्पी साधकर बैठे हुए हैं। हालांकि विभाग ने 30 नवंबर को ओडीएफ करने की तैयारी कर ली है।
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हकीकत देखने गांव में नहीं जाते डीपीआरओ
शौचालय निर्माण के लिए रेवड़ी की तरह रुपये बांटने वाले डीपीआरओ शौचालय की हकीकत देखने कभी भी गांव नहीं जाते हैं। वास्तव में अगर गांव जाकर शौचालय निर्माण की वास्तविकता खंगाली जाय, तो असलियत सामने आ सकती है। मगर कर्मचारियों के बताने के बाद भी कोई पहल नहीं होती है।
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अनियमितता में 22 कर्मचारियों पर गिर चुकी है गाज
शौचालय की रकम डकारने में अभी तक 22 वीडीओ पर गाज गिर चुकी है, जबकि चार प्रधानों को पैदल किया जा चुका है। इसके बाद भी अनियमितता पर विराम नहीं लग रहा है। संडवाचंद्रिका, सदर, सांगीपुर, शिवगढ़, गौरा, आसपुर देवसरा में दो दर्जन से अधिक प्रधानों और सचिवों को अल्टीमेटम दिया गया है।
वर्जन----
शौचालय निर्माण में जहां भी अनियमितता मिलती है, उसकी जांच कराकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। इन ब्लाकों में अनियमितता की शिकायत मिली है, मामले की जांच हो रही है, दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
उमाकांत पांडेय, डीपीआरओ।