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अफसरों के शिकंजे में आया 1.37 लाख रुपये का गबन करने वाला बाबू
Updated Tue, 18 Sep 2018 11:30 PM IST
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पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग में लंबे समय से अपना सिक्का चलाने वाला बाबू उस समय गबन की गिरफ्त में आ गया, जब विभाग में नए अफसर की तैनाती हो गई। विभागीय जांच पड़ताल में 1.37 लाख रुपये का गबन उजागर होते ही एफआईआर से बचने के लिए आनन-फानन में रुपये जमा तो कर दिए, मगर वह निलंबन की कार्रवाई से नहीं बच सका।
पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग में अफसरों के नाक में दम करने वाला बाबू आखिरकार शिकंजे में फंस गया है। लगभग 14 चौदह वर्ष से कुर्सी हथियाकर बैठे बाबू ने अफसरों को अपनी उंगली पर नचाता रहा। शहर का ही मूल निवासी चर्चित बाबू की करतूत से विकास भवन का प्रत्येक व्यक्ति परिचित है। पिछले लगभग दस सालों से विभाग में स्थाई अधिकारी की तैनाती नहीं हो पा रही थी। दरअसल में जो अधिकारी आता था, वह बाबू की जडे़ खोदने में लग जाता था, फिर क्या लिपिक फौरन उसका तबादला करवा देता था। मगर योगी सरकार के तबादला नीति में चर्चित बाबू फंस गया। विभाग में महिला अफसर की तैनाती होने के साथ ही इलाहाबाद के लिपिक की तैनाती कर दी गई।
बाबू कुछ समझ पाता इससे पहले इलाहाबाद से स्थानांतरित लिपिक ने विभाग की कमान संभाल ली। विभागीय डाटा का जब मिलान किया गया, तो पता चला कि पिछड़ावर्ग वित्त विकास निगम में जो धनराशि आई थी, उसे बैंक में जमा ही नहीं किया गया। 1.37 लाख रुपये के गबन का खुलासा होते ही बाबू एफआईआर से बचने के लिए आनन-फानन में रुपये जमा कर दिया। मगर तब तक यह खबर निदेशालय पहुंच चुकी थी, इससे बाबू शिवपूजन मिश्र को निलंबित कर दिया गया है।
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विभागीय जांच में खुलासा हुआ कि 1.37 रुपये का गबन किया गया था। हालांकि बाबू ने विभाग में यह धनराशि जमा कर दी है। विभाग अभी गहराई से मामले की जांच कर रहा है। फिलहाल शासन ने बाबू को निलंबित कर दिया है।
ज्योति त्रिवेदी, जिला पिछड़ावर्ग कल्याण अधिकारी
खेल की अभी और उधड़ेगी परतें
पिछड़ावर्ग कल्याण विभाग में बड़ी बारीकी से फाइलों की जांच हो रही है, मामला काफी पुराना है, इससे लगता है गबन की अभी और परतें उधड़ेगी। फिलहाल अधिकारी अभी कुछ बताने को तैयार नहीं हैं।
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पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग में अफसरों के नाक में दम करने वाला बाबू आखिरकार शिकंजे में फंस गया है। लगभग 14 चौदह वर्ष से कुर्सी हथियाकर बैठे बाबू ने अफसरों को अपनी उंगली पर नचाता रहा। शहर का ही मूल निवासी चर्चित बाबू की करतूत से विकास भवन का प्रत्येक व्यक्ति परिचित है। पिछले लगभग दस सालों से विभाग में स्थाई अधिकारी की तैनाती नहीं हो पा रही थी। दरअसल में जो अधिकारी आता था, वह बाबू की जडे़ खोदने में लग जाता था, फिर क्या लिपिक फौरन उसका तबादला करवा देता था। मगर योगी सरकार के तबादला नीति में चर्चित बाबू फंस गया। विभाग में महिला अफसर की तैनाती होने के साथ ही इलाहाबाद के लिपिक की तैनाती कर दी गई।
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बाबू कुछ समझ पाता इससे पहले इलाहाबाद से स्थानांतरित लिपिक ने विभाग की कमान संभाल ली। विभागीय डाटा का जब मिलान किया गया, तो पता चला कि पिछड़ावर्ग वित्त विकास निगम में जो धनराशि आई थी, उसे बैंक में जमा ही नहीं किया गया। 1.37 लाख रुपये के गबन का खुलासा होते ही बाबू एफआईआर से बचने के लिए आनन-फानन में रुपये जमा कर दिया। मगर तब तक यह खबर निदेशालय पहुंच चुकी थी, इससे बाबू शिवपूजन मिश्र को निलंबित कर दिया गया है।
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विभागीय जांच में खुलासा हुआ कि 1.37 रुपये का गबन किया गया था। हालांकि बाबू ने विभाग में यह धनराशि जमा कर दी है। विभाग अभी गहराई से मामले की जांच कर रहा है। फिलहाल शासन ने बाबू को निलंबित कर दिया है।
ज्योति त्रिवेदी, जिला पिछड़ावर्ग कल्याण अधिकारी
खेल की अभी और उधड़ेगी परतें
पिछड़ावर्ग कल्याण विभाग में बड़ी बारीकी से फाइलों की जांच हो रही है, मामला काफी पुराना है, इससे लगता है गबन की अभी और परतें उधड़ेगी। फिलहाल अधिकारी अभी कुछ बताने को तैयार नहीं हैं।