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अब नहीं फुंकेंगे उपकें द्र के ट्रांसफार्मर
Updated Sun, 26 Aug 2018 11:44 PM IST
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प्रतापगढ़। उपकेंद्र के ट्रांसफार्मर फुंकने के चलते परेशान रहने वाले शहरियों के लिए राहत भरी खबर है। शहर के विद्युत उपकेंद्रों में लगे बड़े क्षमता वाले ट्रांसफार्मर अब 33 हजार की लाइन के फाल्ट के चलते नहीं फुंकेंगे। ट्रांसफार्मर को सुरक्षित करने के लिए बिजली विभाग सभी उपकेंद्रों पर कंट्रोल पैनल लगाने जा रहा है। इससे ओवरलोड और अन्य तकनीकी खामियों के चलते ट्रांसफार्मरों को फुंकने से बचाया जाएगा। इससे अब शहरियों को लंबी कटौती की मार नहीं झेलनी पड़ेगी।
प्रदेश सरकार शहर में 24 व गांवों में 18 घंटे बिजली आपूर्ति का दावा कर रही है। मगर हकीकत इससे परे है। शहरियों को रोजना बिजली कटौती से परेशान होना पड़ता है। सबसे ज्यादा लोकल फाल्ट दर्द देता है। गर्मी के दिनों में अंधड़ व बारिश के दौरान कटौती से परेशानी और बढ़ जाती है। लोड अधिक होने पर ट्रांसफार्मर फुंकने लगते हैं। हालांकि शहर में ट्राली ट्रांसफार्मर के जरिए इस समस्या पर काबू पा लिया जाता है। घंटे-दो घंटे बाद आपूर्ति शुरू हो जाती है। मगर जब उपकेंद्र पर लगा मेन ट्रांसफार्मर फुंकता है तो विद्युत विभाग असहाय हो जाता है।
गर्मी के दिनों में अंधड़ व बारिश के दौरान यह खराबी आए दिन हुआ करती है। विभाग की मानें तो उपकें द्र के मेन ट्रांसफार्मर का जुड़ाव 33 हजार की लाइन से सीधे होता है। अंधड़ के दौरान पेड़ गिरने व किसी अन्य कारण से जब भी 33 हजार की लाइन में बड़ा या छोटा फाल्ट होता है तो इसका असर सीधे उपकेंद्र के मेन ट्रांसफार्मर पर होता है। फाल्ट होने पर ट्रांसफार्मर में झटका लगता है। इस तरह बार- बार हादसों से ट्रांसफार्मर में खामियां आती हैं, जिससे फिर ट्रांसफार्मर फुंकना शुरू हो जाता है।
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दरअसल मेन ट्रांसफार्मर के फाल्ट को दुरुस्त करने में 24 से लेकर 48 घंटे का समय लगता है। इसके चलते लंबी कटौती से शहरी परेशान हो उठते है। अब शहरियों को इससे निजात मिल जाएगी। विभाग अब उपकेंद्र के मेन ट्रांसफार्मर को बचाने के लिए कंट्रोल पैनल लगा रहा है। अब 33 हजार की लाइन में चाहे छोटा फाल्ट हो या फिर बड़ा। उसका असर सीधे मेन ट्रांसफार्मर पर नहीं पड़ेगा। पहले उसका प्रभाव कंट्रोल पैनल पर पड़ेगा। जिससे मुख्य ट्रांसफार्मर पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। एसडीओ बाबागंज अजीत कुमार यादव ने बताया कि बाबागंज व दहिलामऊ में कंट्रोल पैनल लगा दिया गया है। इसका असर दिख रहा है। शहर के अन्य उपकेंद्रों की यदि क्षमता वृद्धि होगी तो वहां भी लगाया जाएगा।
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प्रदेश सरकार शहर में 24 व गांवों में 18 घंटे बिजली आपूर्ति का दावा कर रही है। मगर हकीकत इससे परे है। शहरियों को रोजना बिजली कटौती से परेशान होना पड़ता है। सबसे ज्यादा लोकल फाल्ट दर्द देता है। गर्मी के दिनों में अंधड़ व बारिश के दौरान कटौती से परेशानी और बढ़ जाती है। लोड अधिक होने पर ट्रांसफार्मर फुंकने लगते हैं। हालांकि शहर में ट्राली ट्रांसफार्मर के जरिए इस समस्या पर काबू पा लिया जाता है। घंटे-दो घंटे बाद आपूर्ति शुरू हो जाती है। मगर जब उपकेंद्र पर लगा मेन ट्रांसफार्मर फुंकता है तो विद्युत विभाग असहाय हो जाता है।
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गर्मी के दिनों में अंधड़ व बारिश के दौरान यह खराबी आए दिन हुआ करती है। विभाग की मानें तो उपकें द्र के मेन ट्रांसफार्मर का जुड़ाव 33 हजार की लाइन से सीधे होता है। अंधड़ के दौरान पेड़ गिरने व किसी अन्य कारण से जब भी 33 हजार की लाइन में बड़ा या छोटा फाल्ट होता है तो इसका असर सीधे उपकेंद्र के मेन ट्रांसफार्मर पर होता है। फाल्ट होने पर ट्रांसफार्मर में झटका लगता है। इस तरह बार- बार हादसों से ट्रांसफार्मर में खामियां आती हैं, जिससे फिर ट्रांसफार्मर फुंकना शुरू हो जाता है।
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दरअसल मेन ट्रांसफार्मर के फाल्ट को दुरुस्त करने में 24 से लेकर 48 घंटे का समय लगता है। इसके चलते लंबी कटौती से शहरी परेशान हो उठते है। अब शहरियों को इससे निजात मिल जाएगी। विभाग अब उपकेंद्र के मेन ट्रांसफार्मर को बचाने के लिए कंट्रोल पैनल लगा रहा है। अब 33 हजार की लाइन में चाहे छोटा फाल्ट हो या फिर बड़ा। उसका असर सीधे मेन ट्रांसफार्मर पर नहीं पड़ेगा। पहले उसका प्रभाव कंट्रोल पैनल पर पड़ेगा। जिससे मुख्य ट्रांसफार्मर पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। एसडीओ बाबागंज अजीत कुमार यादव ने बताया कि बाबागंज व दहिलामऊ में कंट्रोल पैनल लगा दिया गया है। इसका असर दिख रहा है। शहर के अन्य उपकेंद्रों की यदि क्षमता वृद्धि होगी तो वहां भी लगाया जाएगा।