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प्रधानों ने रिबोर करा दिए नल, अटक गई धनराशि 18-58-23
Updated Wed, 09 Aug 2017 07:48 PM IST
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प्रधानों ने रिबोर करा दिए नल, अटक गई धनराशि
शासन के निर्देश पर रिबोर कराया, पैसे के लिए खड़ी हुई परेशानी
अमर उजाला ब्यूरो
कुंडा। गर्मी में हैंडपंपों के रिबोर के लिए आदेश तो शासन ने कर दिया, लेकिन अब उसकी आईडी जनरेट करने में आनाकानी हो रही है। इसके चलते प्रधानों को गांव में कराए गए नलों के रिबोर का पैसा नहीं मिल पा रहा है। इसके चलते प्रधानों के सामने फिर से परेशानी खड़ी हो गई है। सिर्फ कुंडा ब्लाक में ही 800 से अधिक रिबोर नलों के कराए गए हैं।
पूर्व में ग्रामसभा से लेकर हर विभाग में नल लगवाने की जिम्मेदारी जलनिगम की थी। यह विभाग गांव में नलों को लगवा तो देता था लेकिन उसका रख रखाव करने में अक्षम रहता था। इसके चलते गर्मी में अगर कोई नल पानी छोड़ देता था तो वह नल बेकार ही रहता था। इसके चलते इस बार मई में प्रधानों को ही नल का रिबोर करवाने का शासनादेश जारी हो गया। शासनादेश हुआ तो गांव के प्रधानों को शक्ति मिली और गांव में खराब पड़े नलों को रिबोर कराना शुरू कर दिया गया। इसके चलते सभी प्रधानों ने 8 से 10 नलों का रिबोर करवा दिया। गर्मी खत्म हुई और बरसात में नलों की स्थिति ठीक हो गई। उधर, प्रधानों ने जिन नलों का रिबोर कराया था उसकी धनराशि के लिए बिल लगाया। बावजूद इसके बीडीओ ने बताया कि अभी इसकी आईडी जनरेट नहीं हो पाई है और इसकी धनराशि देर से निकलेगी। अब ब्लाक से इस तरह के जवाब सुनकर प्रधानों के सामने समस्या खड़ी हो गई है। जिन गांवों में प्रधानों ने अपने खर्चे पर गांवों में पानी की समस्या का समाधान किया था उनके लाखों रुपये फंस गए हैं। यही नहीं दुकानदार भी उनसे नल सहित अन्य सामानों का पैसा मांग रहे हैं।
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शासन के निर्देश पर रिबोर कराया, पैसे के लिए खड़ी हुई परेशानी
अमर उजाला ब्यूरो
कुंडा। गर्मी में हैंडपंपों के रिबोर के लिए आदेश तो शासन ने कर दिया, लेकिन अब उसकी आईडी जनरेट करने में आनाकानी हो रही है। इसके चलते प्रधानों को गांव में कराए गए नलों के रिबोर का पैसा नहीं मिल पा रहा है। इसके चलते प्रधानों के सामने फिर से परेशानी खड़ी हो गई है। सिर्फ कुंडा ब्लाक में ही 800 से अधिक रिबोर नलों के कराए गए हैं।
पूर्व में ग्रामसभा से लेकर हर विभाग में नल लगवाने की जिम्मेदारी जलनिगम की थी। यह विभाग गांव में नलों को लगवा तो देता था लेकिन उसका रख रखाव करने में अक्षम रहता था। इसके चलते गर्मी में अगर कोई नल पानी छोड़ देता था तो वह नल बेकार ही रहता था। इसके चलते इस बार मई में प्रधानों को ही नल का रिबोर करवाने का शासनादेश जारी हो गया। शासनादेश हुआ तो गांव के प्रधानों को शक्ति मिली और गांव में खराब पड़े नलों को रिबोर कराना शुरू कर दिया गया। इसके चलते सभी प्रधानों ने 8 से 10 नलों का रिबोर करवा दिया। गर्मी खत्म हुई और बरसात में नलों की स्थिति ठीक हो गई। उधर, प्रधानों ने जिन नलों का रिबोर कराया था उसकी धनराशि के लिए बिल लगाया। बावजूद इसके बीडीओ ने बताया कि अभी इसकी आईडी जनरेट नहीं हो पाई है और इसकी धनराशि देर से निकलेगी। अब ब्लाक से इस तरह के जवाब सुनकर प्रधानों के सामने समस्या खड़ी हो गई है। जिन गांवों में प्रधानों ने अपने खर्चे पर गांवों में पानी की समस्या का समाधान किया था उनके लाखों रुपये फंस गए हैं। यही नहीं दुकानदार भी उनसे नल सहित अन्य सामानों का पैसा मांग रहे हैं।
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