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सई तीरे बिखरी छठ की छटा
Updated Tue, 13 Nov 2018 11:27 PM IST
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सई तीरे बिखरी छठ की छटा
उमड़ा आस्था का सैलाब, पुत्र की सलामती के लिए अस्ताचलगामी सूर्य को अघ्र्य देकर मांगा आशीष
पूजा के लिए नदी में बनाया केले और गन्ने का मंडप
सूप में फल, फूल, मिष्ठान और दीपक जलाकर उतारी आरती
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। डाला छठ पर मंगलवार की शाम सई किनारे बेल्हा देवी तट पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। पुत्र की सलामती और परिवार की सुख- समृद्धि के लिए महिलाओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को अघ्र्य देकर आंचल फैलाकर आशीष मांगा। सई नदी के जल में खड़े होकर डूबते सूर्यदेव और छठ मइया को अघ्र्य दिया। सैकड़ों की संख्या में नदी में उतरीं व्रती महिलाओं ने सूप में मौसमी फल-फूल, मिष्ठान नारियल, ठेकुवा, पोहा, गन्ने का प्रसाद चढ़ाया। मनोकामना पूरी होने पर कोशी भरने की परंपरा निभाई गई। नदी में मेले और गन्ने से बनाए गए मंडप आकर्षक का केंद्र बने रहे। घाट पर देवी जागरण की धूम रही। सई नदी में तैरते दिए ऐेसे लग रहे थे, मानों तारे जमीं पर उतर आए हों। बेल्हा देवी तट पर देरशाम तक भारी भीड़ जमा रही।
बिहार प्रांत का मुख्यपर्व डाला छठ अब बेल्हा के प्रमुख त्योहारों में शामिल हो गया है। मंगलवार को सई तट पर उमड़ा सैलाब देखकर बेल्हा के लोगों की बढ़ती आस्था का आकलन किया जा सकता है। डीएम शंभु कुमार के पत्नी डॉ. स्निग्धा रश्मि के साथ बेल्हा देवी घाट पहुंचते ही सुरक्षा व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त हो गई। व्रती महिलाओं के साथ ही डॉ. स्निग्धा रश्मि ने भी अस्ताचलगामी सूर्य को अघ्र्य दिया और पूजा-अर्चना की। वैसे तो डाला छठ की शुरुआत तीन दिन पहले नहाय-खाय के साथ प्रारंभ हो गई थी। सोमवार को खरना के साथ निर्जला व्रत रखकर महिलाओं ने छठ पूजा की विधिवत शुरुआत की। मंगलवार को बेल्हादेवी मंदिर पर सई नदी के घाट पर छठ मइया की पूजा धूमधाम से गाजे-बाजे और आतिशबाजी के साथ हुई। दिन भर निर्जला व्रत रखने वाली महिलाएं गाजे-बाजे के साथ मंदिर पर पहुंची। सई नदी की बालू से कलश की स्थापना की गई। सूप में सारा सामान सजाकर सूर्य के डूबने का इंतजार करने लगी। सूर्य में लालिमा पडने लगी तो महिलाएं और पुरुष सूप हाथ में लेकर सई नदी में उतरने के बाद पश्चिम की तरफ मुंह करके खड़े हो गए। महिलाएं सूप लेकर पानी में परिक्रमा करने लगीं। पांच बार सूर्य की परिक्रमा कर बेटों और घरवालों से सूप पर अघ्र्य दिलवाया। महिलाओं ने डूबते सूर्य को अघ्र्य देकर आरती उतारी। घाट की पूजा संपन्न करने के बाद घर पहुंचकर कोशी भरने की पूजा हुई। बुधवार को रात में चार बजे सई नदी के घाट पर पहुंच कर नए फल,फूल इत्यादि से इसी तरह पूजा होगी। इस बार उगते सूर्य को अघ्र्य देकर उनकी पूजा की जाएगी।
इनसेट-
सैकड़ों महिलाओं ने भरी कोशी
मनौती पूरी होने से प्रसन्न व्रतधारी महिलाओं ने हंसी-खुशी मिट्टी से बनी कोशी भरकर छठ मइया को प्रसन्न किया। आज ही के दिन मनौती पूरी होने के बाद कोशी भरने की परंपरा निभाई गई। इसी तरह से मनौती पूरी होने पर महिलाएं मंदिर के प्रवेश द्वार से लेटकर घाट तक पहुंचीं।
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इनसेट-
देवी जागरण पर थिरके श्रद्धालु
मां बेल्हादेवी घाट पर आज के दिन देवी जागरण का विशेष आयोजन किया गया था। इस मौके पर आकेस्ट्रा में बज रहे देवी गीत की धुन पर छठ पूजा पर आए श्रद्धालु झूमते नजर आए। जयकारे की गूंज से पूरा बेल्हा घाट गुंजायमान रहा। घर से मंदिर आ रही महिलाओं की टोलियां रिक्शे और टेपों में भी छठ मइया का गीत गाती रहीं।
इनसेट-
केले और गन्ने का महत्व
मंडप में सजे केले और गन्ने का विशेष महत्व होता है। बिहार के पंडित रामनरेश पांडे ने बताया कि भगवान विष्णु की पूजा में केले के पत्ते का विशेष महत्व होता है। एकादशी में भगवान विष्णु शयन से उठते हैं। उगते और डूबते सूर्य की किरणों में भी उनका अंश माना जाता है। गन्ने को नई फसल के रूप में चढ़ाया जाता है। इसके पीछे अच्छी फसलों के पैदावार का तर्क बताया। इसलिए केले और गन्ने का महत्व है।
इनसेट-
सेल्फी लेने को लगी रही होड़
पूजा के समय सई नदी के तट पर सेल्फी लेने वालों की भारी भीड़ रही। पत्नी और बच्चों के संग पुरुष मोबाइल से सेल्फी लेते नजर आए। इसके लिए लोग नदी में भी कूदने से बाज नहीं आए। सज-धजकर पहुंचीं महिलाएं भी सेल्फी लेने की होड़ में पीछे नहीं रहीं। कभी वह बच्चों से फोटो खींचने को कहतीं तो कभी परिवार संग सेल्फी लेती रहीं।
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डीएम की फटकार के बाद चेते एडीएम
बेल्हा देवी घाट स्थित सई तट पर सोमवार तक साफ-सफाई नहीं होने पर मंगलवार को प्रभारी ईओ एडीएम को डीएम की फटकार मिलते ही नगरपालिका के कर्मचारी जेसीबी लेकर पहुंच गए। सुबह से प्रारंभ हुआ सफाई का अभियान दोपहर तक चलता रहा। हालांकि शाम को बेल्हा देवी घाट पहुंचे डीएम की नजरें पूरब की ओर पड़े कचरे की ओर बार-बार घूमती रहीं। हालांकि मौके पर वह कुछ भी नहीं बोले।
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सई तीरे बिखरी छठ की छटा
उमड़ा आस्था का सैलाब, पुत्र की सलामती के लिए अस्ताचलगामी सूर्य को अघ्र्य देकर मांगा आशीष
पूजा के लिए नदी में बनाया केले और गन्ने का मंडप
सूप में फल, फूल, मिष्ठान और दीपक जलाकर उतारी आरती
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। डाला छठ पर मंगलवार की शाम सई किनारे बेल्हा देवी तट पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। पुत्र की सलामती और परिवार की सुख- समृद्धि के लिए महिलाओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को अघ्र्य देकर आंचल फैलाकर आशीष मांगा। सई नदी के जल में खड़े होकर डूबते सूर्यदेव और छठ मइया को अघ्र्य दिया। सैकड़ों की संख्या में नदी में उतरीं व्रती महिलाओं ने सूप में मौसमी फल-फूल, मिष्ठान नारियल, ठेकुवा, पोहा, गन्ने का प्रसाद चढ़ाया। मनोकामना पूरी होने पर कोशी भरने की परंपरा निभाई गई। नदी में मेले और गन्ने से बनाए गए मंडप आकर्षक का केंद्र बने रहे। घाट पर देवी जागरण की धूम रही। सई नदी में तैरते दिए ऐेसे लग रहे थे, मानों तारे जमीं पर उतर आए हों। बेल्हा देवी तट पर देरशाम तक भारी भीड़ जमा रही।
बिहार प्रांत का मुख्यपर्व डाला छठ अब बेल्हा के प्रमुख त्योहारों में शामिल हो गया है। मंगलवार को सई तट पर उमड़ा सैलाब देखकर बेल्हा के लोगों की बढ़ती आस्था का आकलन किया जा सकता है। डीएम शंभु कुमार के पत्नी डॉ. स्निग्धा रश्मि के साथ बेल्हा देवी घाट पहुंचते ही सुरक्षा व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त हो गई। व्रती महिलाओं के साथ ही डॉ. स्निग्धा रश्मि ने भी अस्ताचलगामी सूर्य को अघ्र्य दिया और पूजा-अर्चना की। वैसे तो डाला छठ की शुरुआत तीन दिन पहले नहाय-खाय के साथ प्रारंभ हो गई थी। सोमवार को खरना के साथ निर्जला व्रत रखकर महिलाओं ने छठ पूजा की विधिवत शुरुआत की। मंगलवार को बेल्हादेवी मंदिर पर सई नदी के घाट पर छठ मइया की पूजा धूमधाम से गाजे-बाजे और आतिशबाजी के साथ हुई। दिन भर निर्जला व्रत रखने वाली महिलाएं गाजे-बाजे के साथ मंदिर पर पहुंची। सई नदी की बालू से कलश की स्थापना की गई। सूप में सारा सामान सजाकर सूर्य के डूबने का इंतजार करने लगी। सूर्य में लालिमा पडने लगी तो महिलाएं और पुरुष सूप हाथ में लेकर सई नदी में उतरने के बाद पश्चिम की तरफ मुंह करके खड़े हो गए। महिलाएं सूप लेकर पानी में परिक्रमा करने लगीं। पांच बार सूर्य की परिक्रमा कर बेटों और घरवालों से सूप पर अघ्र्य दिलवाया। महिलाओं ने डूबते सूर्य को अघ्र्य देकर आरती उतारी। घाट की पूजा संपन्न करने के बाद घर पहुंचकर कोशी भरने की पूजा हुई। बुधवार को रात में चार बजे सई नदी के घाट पर पहुंच कर नए फल,फूल इत्यादि से इसी तरह पूजा होगी। इस बार उगते सूर्य को अघ्र्य देकर उनकी पूजा की जाएगी।
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सैकड़ों महिलाओं ने भरी कोशी
मनौती पूरी होने से प्रसन्न व्रतधारी महिलाओं ने हंसी-खुशी मिट्टी से बनी कोशी भरकर छठ मइया को प्रसन्न किया। आज ही के दिन मनौती पूरी होने के बाद कोशी भरने की परंपरा निभाई गई। इसी तरह से मनौती पूरी होने पर महिलाएं मंदिर के प्रवेश द्वार से लेटकर घाट तक पहुंचीं।
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देवी जागरण पर थिरके श्रद्धालु
मां बेल्हादेवी घाट पर आज के दिन देवी जागरण का विशेष आयोजन किया गया था। इस मौके पर आकेस्ट्रा में बज रहे देवी गीत की धुन पर छठ पूजा पर आए श्रद्धालु झूमते नजर आए। जयकारे की गूंज से पूरा बेल्हा घाट गुंजायमान रहा। घर से मंदिर आ रही महिलाओं की टोलियां रिक्शे और टेपों में भी छठ मइया का गीत गाती रहीं।
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केले और गन्ने का महत्व
मंडप में सजे केले और गन्ने का विशेष महत्व होता है। बिहार के पंडित रामनरेश पांडे ने बताया कि भगवान विष्णु की पूजा में केले के पत्ते का विशेष महत्व होता है। एकादशी में भगवान विष्णु शयन से उठते हैं। उगते और डूबते सूर्य की किरणों में भी उनका अंश माना जाता है। गन्ने को नई फसल के रूप में चढ़ाया जाता है। इसके पीछे अच्छी फसलों के पैदावार का तर्क बताया। इसलिए केले और गन्ने का महत्व है।
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सेल्फी लेने को लगी रही होड़
पूजा के समय सई नदी के तट पर सेल्फी लेने वालों की भारी भीड़ रही। पत्नी और बच्चों के संग पुरुष मोबाइल से सेल्फी लेते नजर आए। इसके लिए लोग नदी में भी कूदने से बाज नहीं आए। सज-धजकर पहुंचीं महिलाएं भी सेल्फी लेने की होड़ में पीछे नहीं रहीं। कभी वह बच्चों से फोटो खींचने को कहतीं तो कभी परिवार संग सेल्फी लेती रहीं।
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डीएम की फटकार के बाद चेते एडीएम
बेल्हा देवी घाट स्थित सई तट पर सोमवार तक साफ-सफाई नहीं होने पर मंगलवार को प्रभारी ईओ एडीएम को डीएम की फटकार मिलते ही नगरपालिका के कर्मचारी जेसीबी लेकर पहुंच गए। सुबह से प्रारंभ हुआ सफाई का अभियान दोपहर तक चलता रहा। हालांकि शाम को बेल्हा देवी घाट पहुंचे डीएम की नजरें पूरब की ओर पड़े कचरे की ओर बार-बार घूमती रहीं। हालांकि मौके पर वह कुछ भी नहीं बोले।