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वोट कटवा बनेंगे निर्दलीय, पार्टी प्रत्याशियों की नींद उड़ी
Updated Mon, 13 Nov 2017 07:48 PM IST
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प्रतापगढ़। जिले में कई जगहों पर निर्दलीय प्रत्याशियों की संख्या पार्टी प्रत्याशियों से ज्यादा है, जो कई जगहों पर न जीतेंगे और न जीतने देंगे े इरादे से उतरे हैं। उन्होंने चुनाव प्रचार तेज कर दिया है। इनमे कुछ निर्दलीय जाति के आधार पर तो कई नागरिकों के हक के लिए संघर्ष का आधार बनाकर वोट मांग रहे हैं। जिससे राजनैतिक दलों के प्रत्याशियों की नींद उड़ी हुई है। ऐसे लोगों को मनाने का दौर चल रहा है लेकिन वे किसी की बात सुनने को तैयार नहीं हैं। उनका दावा है कि जनता उनके साथ है और वह हर हाल में चुनाव लड़ेंगे।
नगर निकाय चुनाव के लिए निर्वाचन आयोग ने 22 राजनैतिक दलों को मान्यता दी है। जिले में एक नगर पालिका और आठ नगर पंचायत है। कुंडा व मानिकपुर को छोड़कर अधिकतर नगर पंचायतों व नगर पालिका में राजनैतिक दलों ने अपने प्रत्याशी उतारे हैं। वहीं आम आदमी पार्टी व बहुजन मुक्ति मोर्चा ने भी अपने उम्मीदवार उतारे हैं। हालात यह है कि कई जगहों पर निर्दलीय प्रत्याशी पार्टी प्रत्याशियों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। कुल मिलाकर निकाय चुनाव में निर्दलीयों ने पार्टी के उम्मीदवारों का गणित गड़बड़ा दिया है।
चुनाव मैदान में उतरे निर्दलीय अपने वार्ड व आसपास के वार्डों पर असर डाल रहे हैं। खुद को बेहतर बताने के साथ ही वे नागरिकों के अधिकार के लिए किए गए संघर्ष को बयां कर रहे हैं तो कुछ जाति के आधार पर खुद को मजबूत मानते हुए चुनाव मैदान में उतरने के बाद मतदाताओं के घरों पर दस्तक दे रहे हैं। यहां तक कि समझाने वालों को वह टका सा जवाब दे रहे हैं। जिससे राजनैतिक दलों के कैंडीडेटों की नींद उड़ गई है। नाम वापसी के पहले दलों से बगावत कर चुनावी समर में कूदे निर्दल प्रत्याशियों को मनाने का दौर भी चला लेकिन वे कुछ भी सुनने को राजी नहीं हुए।
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नगर निकाय चुनाव के लिए निर्वाचन आयोग ने 22 राजनैतिक दलों को मान्यता दी है। जिले में एक नगर पालिका और आठ नगर पंचायत है। कुंडा व मानिकपुर को छोड़कर अधिकतर नगर पंचायतों व नगर पालिका में राजनैतिक दलों ने अपने प्रत्याशी उतारे हैं। वहीं आम आदमी पार्टी व बहुजन मुक्ति मोर्चा ने भी अपने उम्मीदवार उतारे हैं। हालात यह है कि कई जगहों पर निर्दलीय प्रत्याशी पार्टी प्रत्याशियों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। कुल मिलाकर निकाय चुनाव में निर्दलीयों ने पार्टी के उम्मीदवारों का गणित गड़बड़ा दिया है।
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चुनाव मैदान में उतरे निर्दलीय अपने वार्ड व आसपास के वार्डों पर असर डाल रहे हैं। खुद को बेहतर बताने के साथ ही वे नागरिकों के अधिकार के लिए किए गए संघर्ष को बयां कर रहे हैं तो कुछ जाति के आधार पर खुद को मजबूत मानते हुए चुनाव मैदान में उतरने के बाद मतदाताओं के घरों पर दस्तक दे रहे हैं। यहां तक कि समझाने वालों को वह टका सा जवाब दे रहे हैं। जिससे राजनैतिक दलों के कैंडीडेटों की नींद उड़ गई है। नाम वापसी के पहले दलों से बगावत कर चुनावी समर में कूदे निर्दल प्रत्याशियों को मनाने का दौर भी चला लेकिन वे कुछ भी सुनने को राजी नहीं हुए।
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