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1371 महिलाओं को नहीं मिला जननी सुरक्षा का लाभ 17-51-44
Updated Tue, 06 Jun 2017 07:56 PM IST
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1371 महिलाओं को नहीं मिला जननी सुरक्षा का लाभ
जिम्मेदार बन बैठे अंजान, प्रसूता हो रहीं परेशान
शिकायत के बाद भी नहीं किया जा रहा भुगतान
अमर उजाला ब्यूरो।
प्रतापगढ़। स्वास्थ्य विभाग की लचर व्यवस्था के चलते बेल्हा की 1371 प्रसूताओं को जननी सुरक्षा योजना का लाभ नहीं मिल सका। इससे परेशान होकर प्रसूताएं व उनके परिवार के लोग बराबर अस्पताल का चक्कर काट रहे हैं। वहीं प्रसव पीड़ा के दौरान गर्भवती महिलाओं की मदद करने वाली आशाओं को मिलने वाला 600 रुपये 1549 आशाओं को विभाग के ओर से नहीं दिया गया। बजट विभाग के खाते में डंप है।
शासन की ओर से प्रसव के बाद महिलाओं को जननी सुरक्षा योजना का लाभ दिया जाता है। शहरी प्रसूताओं के लिए एक हजार तो गांव की प्रसूताओं के लिए14 सौ रुपये शासन की ओर से दिया जाता है। इस योजना का लाभ प्रसूता के डिस्चार्ज होने के 24 घंटे के अंदर देने का आदेश है। मगर जिले में शासन के आदेश का कोई असर नहीं पड़ रहा। मार्च से अब तक सरकारी अस्पताल में प्रसव के बाद 1371 प्रसूताओं के खाते में पैसा नहीं भेजा गया है। इसके चलते 19 लाख रुपये के करीब अभी स्वास्थ्य विभाग के खाते में डंप पड़ा हुआ है। बैंक की ओर से बढ़ रहे ब्याज का फायदा स्वास्थ्य विभाग के आलाधिकारी उठा रहें हैं। वहीं प्रसूता अपने हक के लिए अस्पताल का चक्कर काट रहीं हैं। शासन की ओर से जितने का उन्हें प्रोत्साहन राशि मिलना है उससे ज्यादा वे किराया देने में खर्च कर दे रहीं हैं। यही हाल आशा बहूओं का है। सुरक्षित प्रसव कराने पर आशा बहूओं को शासन की ओर से 600 रुपये दिया जाता है। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की मानें तो 1549 आशाओं ने सुरक्षित प्रसव सरकारी अस्पतालों में कराया है। शासन की ओर से उन्हें प्रति प्रसव 6 सौ रुपये तीन माह से नहीं दिया जा रहा है। इससे 1549 आशा बहू परेशान है। आशाआें का कुल नौ लाख 29 हजार रुपये स्वास्थ्य विभाग अपने खाते में डंप कर रखा है। आशा बहूओं ने कई बार इसकी शिकायत जिम्मेदार अधिकारियों से की। मगर उनका ध्यान प्रसूताओं व आशा बहुओं की समस्या की ओर नहीं गया।
इनसेट
कम्प्यूटर ऑपरेटर की कमी के चलते हो रही परेशानी
सरकारी अस्पतालों में भले ही एक कम्प्यूटर ऑपरेटर नियुक्त किये गए हैं, मगर उनपर इतनी जिम्मेदारी थोप दी गई है कि वे काम नहीं कर पा रह हैं। एक ऑपरेटर से अस्पताल का पूरा ब्यौरा कम्प्यूटर पर अपलोड कराया जाता है। उनसे समय-समय पर एक-एक रुपये का हिसाब तैयार करके शासन को भेजा जाता है। इसके चलते वे आशाओं का मेहनाता और प्रसूताओं को मिलने वाला प्रोत्साहन राशि का नाम नहीं फीड कर पाते हैं।
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वर्जन
कुछ महिलाए प्रसव होने के बाद घर चली जाती हैं। वे अपना बैंक पास बुक के साथ अन्य कागजात कार्यालय में जमा नहीं करतीं। जल्द प्रसूताओं के खाते में जननी सुरक्षा योजना का लाभ भेज दिया जाएगा और आशाओं का भुगतान कर दिया जाएगा।
यूके पांडेय, सीएमओ
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जिम्मेदार बन बैठे अंजान, प्रसूता हो रहीं परेशान
शिकायत के बाद भी नहीं किया जा रहा भुगतान
अमर उजाला ब्यूरो।
प्रतापगढ़। स्वास्थ्य विभाग की लचर व्यवस्था के चलते बेल्हा की 1371 प्रसूताओं को जननी सुरक्षा योजना का लाभ नहीं मिल सका। इससे परेशान होकर प्रसूताएं व उनके परिवार के लोग बराबर अस्पताल का चक्कर काट रहे हैं। वहीं प्रसव पीड़ा के दौरान गर्भवती महिलाओं की मदद करने वाली आशाओं को मिलने वाला 600 रुपये 1549 आशाओं को विभाग के ओर से नहीं दिया गया। बजट विभाग के खाते में डंप है।
शासन की ओर से प्रसव के बाद महिलाओं को जननी सुरक्षा योजना का लाभ दिया जाता है। शहरी प्रसूताओं के लिए एक हजार तो गांव की प्रसूताओं के लिए14 सौ रुपये शासन की ओर से दिया जाता है। इस योजना का लाभ प्रसूता के डिस्चार्ज होने के 24 घंटे के अंदर देने का आदेश है। मगर जिले में शासन के आदेश का कोई असर नहीं पड़ रहा। मार्च से अब तक सरकारी अस्पताल में प्रसव के बाद 1371 प्रसूताओं के खाते में पैसा नहीं भेजा गया है। इसके चलते 19 लाख रुपये के करीब अभी स्वास्थ्य विभाग के खाते में डंप पड़ा हुआ है। बैंक की ओर से बढ़ रहे ब्याज का फायदा स्वास्थ्य विभाग के आलाधिकारी उठा रहें हैं। वहीं प्रसूता अपने हक के लिए अस्पताल का चक्कर काट रहीं हैं। शासन की ओर से जितने का उन्हें प्रोत्साहन राशि मिलना है उससे ज्यादा वे किराया देने में खर्च कर दे रहीं हैं। यही हाल आशा बहूओं का है। सुरक्षित प्रसव कराने पर आशा बहूओं को शासन की ओर से 600 रुपये दिया जाता है। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की मानें तो 1549 आशाओं ने सुरक्षित प्रसव सरकारी अस्पतालों में कराया है। शासन की ओर से उन्हें प्रति प्रसव 6 सौ रुपये तीन माह से नहीं दिया जा रहा है। इससे 1549 आशा बहू परेशान है। आशाआें का कुल नौ लाख 29 हजार रुपये स्वास्थ्य विभाग अपने खाते में डंप कर रखा है। आशा बहूओं ने कई बार इसकी शिकायत जिम्मेदार अधिकारियों से की। मगर उनका ध्यान प्रसूताओं व आशा बहुओं की समस्या की ओर नहीं गया।
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इनसेट
कम्प्यूटर ऑपरेटर की कमी के चलते हो रही परेशानी
सरकारी अस्पतालों में भले ही एक कम्प्यूटर ऑपरेटर नियुक्त किये गए हैं, मगर उनपर इतनी जिम्मेदारी थोप दी गई है कि वे काम नहीं कर पा रह हैं। एक ऑपरेटर से अस्पताल का पूरा ब्यौरा कम्प्यूटर पर अपलोड कराया जाता है। उनसे समय-समय पर एक-एक रुपये का हिसाब तैयार करके शासन को भेजा जाता है। इसके चलते वे आशाओं का मेहनाता और प्रसूताओं को मिलने वाला प्रोत्साहन राशि का नाम नहीं फीड कर पाते हैं।
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कुछ महिलाए प्रसव होने के बाद घर चली जाती हैं। वे अपना बैंक पास बुक के साथ अन्य कागजात कार्यालय में जमा नहीं करतीं। जल्द प्रसूताओं के खाते में जननी सुरक्षा योजना का लाभ भेज दिया जाएगा और आशाओं का भुगतान कर दिया जाएगा।
यूके पांडेय, सीएमओ