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जिले में 2570 जगहों पर जलेगी होलिका 18-14-35
Updated Wed, 28 Feb 2018 06:24 PM IST
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जिले में 2570 जगहों पर जलेगी होलिका
प्रशासन अलर्ट, पुलिस और राजस्व विभाग के कर्मचारी रखेंगे नजर
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़।
जिले में गुरुवार को 2570 जगहों पर होलिका दहन किया जाएगा। पुलिस और प्रशासन के लोग किसी भी तरह की अप्रिय वारदात से बचने के लिए इस पर नजर रखेंगे।
रंगों के पर्व होली के ठीक एक दिन पहले शहर और ग्रामीण इलाकों में वर्षों से होलिका दहन की परंपरा है। बसंत पंचमी से ही होलिका स्थलों पर लोग लकड़ियां एकत्रित करना प्रारंभ कर देते हैं। गुरुवार की शाम 6.58 बजे से प्रदोषकाल प्रारंभ होकर रात 1.30 बजे तक रहेगा। इस अवधि में जिले भर की होलिकाओं में आग प्रज्वलित की जाएगी। जिला प्रशासन के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में कुल 2,570 स्थानों पर होलिका का दहन होता है। इसमें शहर में लगभग 126 स्थानों पर होलिका दहन होता है। होलिका दहन के पूर्व विधि-विधान से अग्निदेव की पूजा-अर्चना करके आग प्रज्वलित की जाती है। होलिका दहन के बाद लोग काफी देर तक जमा रहते हैं। इस वर्ष होलिका दहन को लेकर जिला प्रशासन अलर्ट है। पुलिस प्रशासन को सख्त हिदायत दी गई है कि होलिका दहन के लिए कोई नया स्थान चिह्नित न किया जाए। विवादों से बचने के लिए पुराने स्थानों पर ही होलिका दहन किया जाए। राजस्व विभाग के कर्मचारियों को ग्रामीण इलाकों में दौरा कर ऐसे विवादों को निपटाने को कहा गया है।
इनसेट--------
होलिका एकत्रित करने के लिए लगती है होड़
ग्रामीण इलाकों में होलिका के लिए लकड़ी एकत्रित करने की होड़ लगी रहती है। होलियारे सड़क के किनारे स्थित पेड़ों को निशाना बनाकर होलिका के हवाले कर देते हैं। इससे लाखों रुपये की वन संपदा को नुकसान भी पहुंचता है।
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प्रशासन अलर्ट, पुलिस और राजस्व विभाग के कर्मचारी रखेंगे नजर
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़।
जिले में गुरुवार को 2570 जगहों पर होलिका दहन किया जाएगा। पुलिस और प्रशासन के लोग किसी भी तरह की अप्रिय वारदात से बचने के लिए इस पर नजर रखेंगे।
रंगों के पर्व होली के ठीक एक दिन पहले शहर और ग्रामीण इलाकों में वर्षों से होलिका दहन की परंपरा है। बसंत पंचमी से ही होलिका स्थलों पर लोग लकड़ियां एकत्रित करना प्रारंभ कर देते हैं। गुरुवार की शाम 6.58 बजे से प्रदोषकाल प्रारंभ होकर रात 1.30 बजे तक रहेगा। इस अवधि में जिले भर की होलिकाओं में आग प्रज्वलित की जाएगी। जिला प्रशासन के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में कुल 2,570 स्थानों पर होलिका का दहन होता है। इसमें शहर में लगभग 126 स्थानों पर होलिका दहन होता है। होलिका दहन के पूर्व विधि-विधान से अग्निदेव की पूजा-अर्चना करके आग प्रज्वलित की जाती है। होलिका दहन के बाद लोग काफी देर तक जमा रहते हैं। इस वर्ष होलिका दहन को लेकर जिला प्रशासन अलर्ट है। पुलिस प्रशासन को सख्त हिदायत दी गई है कि होलिका दहन के लिए कोई नया स्थान चिह्नित न किया जाए। विवादों से बचने के लिए पुराने स्थानों पर ही होलिका दहन किया जाए। राजस्व विभाग के कर्मचारियों को ग्रामीण इलाकों में दौरा कर ऐसे विवादों को निपटाने को कहा गया है।
इनसेट--------
होलिका एकत्रित करने के लिए लगती है होड़
ग्रामीण इलाकों में होलिका के लिए लकड़ी एकत्रित करने की होड़ लगी रहती है। होलियारे सड़क के किनारे स्थित पेड़ों को निशाना बनाकर होलिका के हवाले कर देते हैं। इससे लाखों रुपये की वन संपदा को नुकसान भी पहुंचता है।
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