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प्रत्याशियों के गले का फांस बना खर्च
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प्रत्याशियों के गले का फांस बना खर्च
आज से निरीक्षण के लिए तलब किया गया है व्यय रजिस्टर
ऊहापोह की स्थिति में प्रत्याशी, किस खर्च को छुपाएं और किसे करे सार्वजनिक
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। लोकसभा चुनाव में कूदे प्रत्याशियों के लिए व्यय रजिस्टर गले की फांस बन गया है। जिले के सभी प्रत्याशियों से एक मई को खर्च का रजिस्टर तलब किया गया है। चुनाव मैदान में कूदे प्रत्याशी अंधाधुंध रुपये खर्च कर रहे हैं, मगर वह ऊहापोह की स्थिति में हैं कि वह कौन सा खर्च दिखाएं और किसे छुपाएं। फिलहाल उन्होंने लेखा-जोखा तैयार करने के लिए वकीलों को लगा रखा है।
लोकसभा चुनाव में कूदे प्रत्याशियों की जनसभा से नेताजी के गले में पड़ने वाली माला से लेकर नाश्ते तक के खर्च को जोड़ने के साथ ही दर भी निश्चित कर दी गई है। मगर प्रत्याशी हैं कि वह अपना खर्च कम दिखाने में लगे हुए हैं। प्रत्याशी चुनाव कार्यालयों पर होने वाले खर्च और सुबह-शाम चलने वाले भंडारे में बनने वाले व्यंजन भी छिपा रहे हैं। कुछ प्रत्याशियों ने चुनाव की घोषणा के दिन से ही भंडारा खोल रखा है। कार्यकर्ताओं को बगैर बैैनर और झंडे वाली गाड़ी, भोजन के अलावा जेब खर्च भी दिया जा रहा है। मगर यह सब खर्च में नहीं जोड़ा जा रहा है। अंधाधुंध होने वाले खर्च से जिला प्रशासन भले ही बेखबर है, मगर प्रेक्षकों की नजर टिकी हुई है। फिलहाल इस बात का खुलासा बुधवार को होगा। अभी प्रत्याशी वही खर्च रजिस्टर पर दिखा रहे हैं जिन गाड़ियों का पास जारी हुआ है और जिसे छिपाया नहीं जा सकता है।
इनसेट---------
70 लाख रुपये है खर्च की सीमा
लोकसभा चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों के खर्च की सीमा 70 लाख रुपये निश्चित की गई है। मगर प्रत्याशी बिल-वाउचर लगाने से बचने के लिए चुनाव में खर्च होने वाले रुपये को छिपाने में लगे हुए हैं।
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इनसेट--------
तीन चरण में दिखाना होगा खर्च का रजिस्टर
चुनाव मैदान में कूदने वाले प्रत्याशियों को तीन चरण में अपने खर्च का रजिस्टर दिखाना होगा। एक मई, पांच मई और दस मई को व्यय प्रेक्षक प्रत्याशियों के खर्च की जानकारी लेंगे।
वर्जन -----
चुनाव में खर्च होने वाले एक-एक रुपये का हिसाब प्रत्याशियों को देना है। उन्हें पूर्व में बताया जा चुका है। बुधवार को रजिस्टर तलब किया गया है। अगर कोई प्रत्याशी हीलाहवाली करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए चुनाव आयोग को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
दीपक बाबू , वरिष्ठ कोषाधिकारी।
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आज से निरीक्षण के लिए तलब किया गया है व्यय रजिस्टर
ऊहापोह की स्थिति में प्रत्याशी, किस खर्च को छुपाएं और किसे करे सार्वजनिक
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। लोकसभा चुनाव में कूदे प्रत्याशियों के लिए व्यय रजिस्टर गले की फांस बन गया है। जिले के सभी प्रत्याशियों से एक मई को खर्च का रजिस्टर तलब किया गया है। चुनाव मैदान में कूदे प्रत्याशी अंधाधुंध रुपये खर्च कर रहे हैं, मगर वह ऊहापोह की स्थिति में हैं कि वह कौन सा खर्च दिखाएं और किसे छुपाएं। फिलहाल उन्होंने लेखा-जोखा तैयार करने के लिए वकीलों को लगा रखा है।
लोकसभा चुनाव में कूदे प्रत्याशियों की जनसभा से नेताजी के गले में पड़ने वाली माला से लेकर नाश्ते तक के खर्च को जोड़ने के साथ ही दर भी निश्चित कर दी गई है। मगर प्रत्याशी हैं कि वह अपना खर्च कम दिखाने में लगे हुए हैं। प्रत्याशी चुनाव कार्यालयों पर होने वाले खर्च और सुबह-शाम चलने वाले भंडारे में बनने वाले व्यंजन भी छिपा रहे हैं। कुछ प्रत्याशियों ने चुनाव की घोषणा के दिन से ही भंडारा खोल रखा है। कार्यकर्ताओं को बगैर बैैनर और झंडे वाली गाड़ी, भोजन के अलावा जेब खर्च भी दिया जा रहा है। मगर यह सब खर्च में नहीं जोड़ा जा रहा है। अंधाधुंध होने वाले खर्च से जिला प्रशासन भले ही बेखबर है, मगर प्रेक्षकों की नजर टिकी हुई है। फिलहाल इस बात का खुलासा बुधवार को होगा। अभी प्रत्याशी वही खर्च रजिस्टर पर दिखा रहे हैं जिन गाड़ियों का पास जारी हुआ है और जिसे छिपाया नहीं जा सकता है।
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70 लाख रुपये है खर्च की सीमा
लोकसभा चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों के खर्च की सीमा 70 लाख रुपये निश्चित की गई है। मगर प्रत्याशी बिल-वाउचर लगाने से बचने के लिए चुनाव में खर्च होने वाले रुपये को छिपाने में लगे हुए हैं।
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तीन चरण में दिखाना होगा खर्च का रजिस्टर
चुनाव मैदान में कूदने वाले प्रत्याशियों को तीन चरण में अपने खर्च का रजिस्टर दिखाना होगा। एक मई, पांच मई और दस मई को व्यय प्रेक्षक प्रत्याशियों के खर्च की जानकारी लेंगे।
वर्जन -----
चुनाव में खर्च होने वाले एक-एक रुपये का हिसाब प्रत्याशियों को देना है। उन्हें पूर्व में बताया जा चुका है। बुधवार को रजिस्टर तलब किया गया है। अगर कोई प्रत्याशी हीलाहवाली करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए चुनाव आयोग को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
दीपक बाबू , वरिष्ठ कोषाधिकारी।