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सतर्क रहिए: कुंडा से लेकर पट्टी तक घूम रहे तेंदुए

Sun, 10 Feb 2019 08:26 PM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 10 Feb 2019 08:26 PM IST
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सतर्क रहिए: कुंडा से लेकर पट्टी तक घूम रहे तेंदुए
कुंडा से लेकर पट्टी तक घूम रहे तेंदुए
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तराई में छिपे हैं तेंदुए संग चीते, लोगों के जीवन के लिए बन सकते हैं खतरा
बाघराय व विहार के लोगों में आज भी रहता है खौफ, सरायबहेलिया में दर्जनों लोगों पर कर चुके हैं हमला
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। विंध्य की पहाड़ियों के खुले जंगलों से भटककर आए तेंदुए अब कुंडा से लेकर पट्टी तक फैल चुके हैं। ऐसे में अब लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। तेंदुए अब इलाकों में खौफ का पर्याय बन चुके हैं। जाड़े के दिनों में रास्ता भटककर पहुंचे तेंदुओं ने जिले के वनीय इलाकों को अपना ठौर बना रखा है। अभी तक दो तेंदुए ग्रामीणों के आक्रोश का शिकार बन चुके हैं, जबकि एक को वन विभाग की टीम ग्रामीणों के सहयोग से दबोच चुकी है। वन विभाग भी मानता है कि जिले में तेंदुए से लेकर चीता तक जंगलों में मौजूद है।
यूपी से सटे मध्य प्रदेश के विंध्य, शिवालिक की पहाड़ियों के बीच खुले जंगलों में रहने वाले तेंदुए अब प्रयागराज, मिर्जापुर से होते हुए मैदानी इलाकों में भी आ गए हैं। मध्य प्रदेश के रीवा और मानिकपुर के आसपास के जंगलों में भी इनकी अच्छी संख्या है। वहां खनन के कारण तेंदुओं को भटकना पड़ रहा है। तेंदुआ घूमंतू जानवर है। यह बीच जंगल में कभी नहीं रहता। गंगा के किनारे से होकर प्रतापगढ़ तक भी पहुंच रहे हैं। अब तो कुंडा से लेकर पट्टी तक तेंदुओं की धमका सुनाई पड़ती है। जिले में तराई व घने जंगलों में वन्य जीवों का ठिकाना है। इसमें तेंदुए के साथ ही चीता ने भी ठौर बना रखा है। बाघराय इलाके मेें तो पिछले दो सालों से तेंदुओं की आहट से लोगों ने खौफ में कई रातें जागकर गुजारीं। अब तेंदुए ने कुशफरा समेत आसपास के गांव के लोगों की नींद उड़ा कर रख दी है। मौके से ग्रामीणों ने दो तेंदुओं को भागते हुए देखा था। वन विभाग की टीम को भी जायजा लेने के दौरान बकुलाही नदी के किनारे जंगलों में चीता व तेंदुए के पंजों के निशान मिले हैं। वन विभाग की मानें तो जिले के तराई इलाकों में तेंदुए व चीता के ठौर बनाने के लक्षण मिला है। चूंकि गजेहड़ा जंगल, कुशफरा जंगल और चिलबिला में वन्य जीवों के रुकने के लिए अनुकूल माहौल है। नगर कोतवाली के सरायबहेलिया में भिंडी के खेत में सात साल पहले दर्जन भर लोगों पर तेंदुआ हमला कर चुका है। हालांकि वह रात में भाग निकला और वन विभाग की टीम हाथ मलते रह गई। तेंदुओं से लोगों को सावधान रहने की जरूरत है।
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यूपी में तेंदुआ पकड़ने के मात्र 21 स्पेशलिस्ट
ट्रैैकुलाइज कर तेंदुए को पकड़ने की ट्रेनिंग वन विभाग के सभी कर्मचारियों को नहीं दी जाती है। दरअसल तेंदुए को बेहोश कर पकडने के लिए जायनाजीन लिक्विड गन के सहारे उसकी शरीर में पहुंचाया जाता है। यह पूरी तरह से प्रतिबंधित है। जायनाजीन केवल नेशनल पार्क और सेंचुरी के डाक्टरों के पास होता है। आम आदमी के हाथ में आने पर इसके दुरुपयोग की आशंका रहती है। यही कारण है कि तेंदुआ दिखने पर उन्हें पकडने के लिए बाहर से लोगों को बुलाना पड़ता है। प्रदेश में इसके लिए सिर्फ 21 प्रशिक्षित लोग है। टे्रकुलाइज गन से 70 मीटर तक निशाला साधा जाता है।
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बंदर, कुत्ता और सुअर का मांस प्रिय भोजन
तेंदुओं का प्रिय भोजन कुत्ता, बंदर और सुअर का मांस है। भोजन के लिए वह इन्हीं जानवरों पर निर्भर होते हैं। कुत्तों के शिकार करने के चक्कर में वह आबादी वाले क्षेत्रों में आ जाते हैं। वन विभाग की मानें तो एक वयस्क तेंदुए की खुराक 20 किलो मांस होती है। यह सप्ताह में एक बार शिकार करते हैं और तीन दिनों तक वहीं मांस खाते हैं।
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बिना भूख के भी करते हैं शिकार
शेर के मुकाबले तेंदुआ लालची होता है। शेर भूख लगने के बाद किसी जानवर का शिकार करने के बाद फिर दोबारा जानवर पर हमला नहीं बोलता। जबकि तेंदुआ किसी भी वक्त जानवर पर हमला बोल देता है। यह शिकार करने के बाद रुकता भी नहीं है। तुरंत निकल जाता है। करीब 6 से 7 सात किमी जाने के बाद दूसरा शिकार करता है।
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तेंदुए के साथ चलते हैं शावक
तेंदुआ ऐसा जानवर है जिसे बच्चे को जन्म देने के लिए भी बहुत स्थान की जरूरत नहीं होती है। वह कहीं भी बच्चों को जन्म दे देते हैं। शुरू में वह शावकों नको मुंह में दबाकर इधर-उधर करते हैं। एक महीने के बाद शावक चलना शुरु कर देते हैं। तब तेंदुए इन्हें साथ लेकर चलते हैं।

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अब तक 10 तेंदुए आ चुके हैं सामने
जिले में अब तक 10 तेंदुए सामने आ चुके हैं। हालांकि उनके देखे जाने और चहलकदमी को लेकर पिछले डेढ़ सालों से हर दिन हल्ला मच रहा है। पहली बार तेंदुआ सराय बहेलिया में सात साल पहले दिखा और दर्जन भर लोगों को घायल कर दिया था। इसके बाद बाघराय बाजार में 10 नवंबर 2017 को तेंदुआ देखा गया था। वह एक आदमी के घर में घुस गया। जिसे वन विभाग की टीम ने टे्रकुलाइज कर पकड़ा था। इस दौरान उसने कई ग्रामीणों पर हमला बोला था। 11 दिसंबर को बाघराय के बूढेपुर गांव में तेदुआ दिखा। उसने हमला बोलकर पांच लोगों को घायल कर दिया था। वह एक सूखे कुएं में गिर गया। ग्रामीणों ने उसे पुआल डालकर जिंदा जला दिया। अब मानधाता के कुशफरा में एक तेंदुए को ग्रामीणों ने मार डाला। जबकि दो भाग निकले। इसके पहले राजगढ़ इलाके में भी तेंदुआ देखा जा चुका है।
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