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आपबीती: बाघ से बचे युवक ने बताई दहशत की कहानी, बोला-मुझ पर पंजा मारा लेकिन हेलमेट ने बचा लिया
Mon, 12 Jul 2021 11:47 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, पीलीभीत
अमर उजाला नेटवर्क, पीलीभीत
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 12 Jul 2021 11:47 PM IST
सार
बिलसंडा ब्लॉक के गांव दियोरिया निवासी विकास उर्फ दिक्षु ने बताया कि रविवार को सुबह 11 बजे गांव के कंधई लाल ने उससे कहीं बाहर चलने की बात कही थी। इस पर वह, कंधई और गांव का ही सोनू एक ही बाइक पर सवार होकर पहले अपनी एक रिश्तेदारी में गए और उसके बाद शाहजहांपुर के पुवायां के जलालपुर में कंधई लाल की ससुराल पहुंचे। शाम होते ही तीनों गांव दियोरिया के लिए चल दिए।
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विकास उर्फ दिक्षु
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पीलीभीत के दियोरिया रेंज में रविवार शाम बाघ हमले की घटना में एक मात्र जीवित बचे विकास उर्फ दिक्षु ने पेड़ पर चढ़कर तो अपनी जान तो बचा ली। मगर उसके चेहरे पर साथियों की मौत और बाघ का खौफ देखा जा सकता है।
विकास ने बताया कि बाघ ने उसके सिर पर पंजे से प्रहार किया था, मगर हेलमेट से उसकी जान बच गई। सुबह पेड़ से उतरने के बाद वह बोलने की स्थिति में नहीं था। करीब दो बजे के बाद उसने आंखों देखी बताई।
बिलसंडा ब्लॉक के गांव दियोरिया निवासी विकास उर्फ दिक्षु ने बताया कि रविवार को सुबह 11 बजे गांव के कंधई लाल ने उससे कहीं बाहर चलने की बात कही थी। इस पर वह, कंधई और गांव का ही सोनू एक ही बाइक पर सवार होकर पहले अपनी एक रिश्तेदारी में गए और उसके बाद शाहजहांपुर के पुवायां के जलालपुर में कंधई लाल की ससुराल पहुंचे। शाम होते ही तीनों गांव दियोरिया के लिए चल दिए।
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घुंघचाई-दियोरिया मार्ग पर दियोरिया जंगल के पास पहुंचते ही वन चौकी पर एक वनकर्मी ने बाइक को रोककर आगे बाघ होने की बात कही थी, मगर जल्दी गांव पहुंचने के चलते हम तीनों आगे बढ़ गए। बाइक जंगल के अंदर करीब 15 मिनट ही चली होगी कि मार्ग के एक साइड में दो बाघ बैठे दिखाई दिए। हड़बड़ाहट में बाइक बाघों से कुछ दूरी पर रोक ली। इसके बाद जब संभल पाते कि एक बाघ ने बाइक पर छलांग लगा दी।
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विकास ने बताया कि बाघ ने उसके सिर पर पंजे से प्रहार किया था, मगर हेलमेट से उसकी जान बच गई। सुबह पेड़ से उतरने के बाद वह बोलने की स्थिति में नहीं था। करीब दो बजे के बाद उसने आंखों देखी बताई।
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बिलसंडा ब्लॉक के गांव दियोरिया निवासी विकास उर्फ दिक्षु ने बताया कि रविवार को सुबह 11 बजे गांव के कंधई लाल ने उससे कहीं बाहर चलने की बात कही थी। इस पर वह, कंधई और गांव का ही सोनू एक ही बाइक पर सवार होकर पहले अपनी एक रिश्तेदारी में गए और उसके बाद शाहजहांपुर के पुवायां के जलालपुर में कंधई लाल की ससुराल पहुंचे। शाम होते ही तीनों गांव दियोरिया के लिए चल दिए।
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घुंघचाई-दियोरिया मार्ग पर दियोरिया जंगल के पास पहुंचते ही वन चौकी पर एक वनकर्मी ने बाइक को रोककर आगे बाघ होने की बात कही थी, मगर जल्दी गांव पहुंचने के चलते हम तीनों आगे बढ़ गए। बाइक जंगल के अंदर करीब 15 मिनट ही चली होगी कि मार्ग के एक साइड में दो बाघ बैठे दिखाई दिए। हड़बड़ाहट में बाइक बाघों से कुछ दूरी पर रोक ली। इसके बाद जब संभल पाते कि एक बाघ ने बाइक पर छलांग लगा दी।
जिससे बाइक समेत हम तीनों गिर पड़े। बाइक सोनू चला रहा था, जबकि सबसे पीछे मैं हेलमेट लगाए बैठा हुआ था। इसी बीच दूसरे बाघ ने मेरे सिर पर पंजे से वार किया, लेकिन हेलमेट लगा होने के कारण मैं बच गया और भागने लगा। कुछ ही दूरी पर एक पेड़ पर मैं चढ़ गया, जबकि सोनू और कंधई रोड पर दौड़ने लगे। पीछे से बाघों ने दौड़ना शुरू कर दिया। एक बाघ ने सबसे पहले सोनू पर हमला कर उसे मार डाला।
इसी बीच कंधई भी मौका पाकर एक पेड़ पर चढ़ ही रहा था कि बाघ ने उसे भी नीचे खींचकर मार डाला। डर के कारण मैंने अपनी आंखें बंद कर ली और चुपचाप पेड़ पर बैठा रहा। इस बीच बाघ पूरी रात वहीं मंडराते रहे। गनीमत यह रही है कि बाघों को यह अहसास नहीं हुआ कि मैं पेड़ पर हूं। अगर उन्हें पता चल जाता तो मैं भी जिंदा नहीं बच पाता।
मैंने पूरी रात जागकर पेड़ पर काटी। सुबह कुछ लोग उधर से गुजरे तो मैंने उन्हें आवाज दी। जब वह लोग पास आए तो मैंने उन्हें पूरी बात बताई। उन लोगों ने हिम्मत बंधाई तब मैं पेड़ से नीचे उतरा और इन्हीं लोगों के साथ घर आ गया। घटना के बाद बेहद डरे सहमे विकास ने बताया कि वह बहुत कम ही जंगल मार्ग से गया। मैं खुद जिंदा कैसे हूं, मुझे खुद विश्वास नहीं हो रहा है। रात का माजरा देख मुझे यकीन हो गया था कि यह बाघ मुझे भी ढूंढकर मार देंगे, मगर ऊपर वाले ने मुझे बचा लिया।
इसी बीच कंधई भी मौका पाकर एक पेड़ पर चढ़ ही रहा था कि बाघ ने उसे भी नीचे खींचकर मार डाला। डर के कारण मैंने अपनी आंखें बंद कर ली और चुपचाप पेड़ पर बैठा रहा। इस बीच बाघ पूरी रात वहीं मंडराते रहे। गनीमत यह रही है कि बाघों को यह अहसास नहीं हुआ कि मैं पेड़ पर हूं। अगर उन्हें पता चल जाता तो मैं भी जिंदा नहीं बच पाता।
मैंने पूरी रात जागकर पेड़ पर काटी। सुबह कुछ लोग उधर से गुजरे तो मैंने उन्हें आवाज दी। जब वह लोग पास आए तो मैंने उन्हें पूरी बात बताई। उन लोगों ने हिम्मत बंधाई तब मैं पेड़ से नीचे उतरा और इन्हीं लोगों के साथ घर आ गया। घटना के बाद बेहद डरे सहमे विकास ने बताया कि वह बहुत कम ही जंगल मार्ग से गया। मैं खुद जिंदा कैसे हूं, मुझे खुद विश्वास नहीं हो रहा है। रात का माजरा देख मुझे यकीन हो गया था कि यह बाघ मुझे भी ढूंढकर मार देंगे, मगर ऊपर वाले ने मुझे बचा लिया।