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Pilibhit News: 18 करोड़ के काम तबाह, अब तीन करोड़ से फिर होगा सुधार कार्य

Thu, 27 Mar 2025 12:11 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 27 Mar 2025 12:11 AM IST
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Work worth 18 crores destroyed, now repair work will be done with 3 crores
गांव चंदिया हजारा के समीप बाढ़ से बचाव कार्य को नदी में उतारी गई मशीन।स्रोत: ग्रामीण
पूरनपुर। शारदा नदी की बाढ़ और कटान से क्षेत्र को बचाने के लिए गांव चंदिया हजारा के समीप तीन करोड़ रुपये की लागत से 900 मीटर में ठोकरें बनाई जाएंगी। एक करोड़ रुपये जारी होने पर जियो बैग और मशीनें चंदिया हजारा पहुंच गई हैं। बुधवार को काम शुरू कर मशीनों को नदी में उतार दिया गया। पूर्व में 18 करोड़ से कराए गए बचाव कार्य काम नहीं आए, तीन करोड़ के काम से क्षेत्र में शारदा नदी की तबाही कैसे रुकेगी यह सोचकर लोग चिंतित हैं।
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शारदा नदी क्षेत्र में हर साल तबाही मचाती है। पिछले कुछ सालों से नदी गांव चंदिया हजारा, राहुलनगर, कॉलोनी नंबर छह में तबाही मचा रही है। क्षेत्र को बाढ़ और कटान से बचाने के लिए पिछले साल करीब नौ करोड़ रुपये की लागत से जियो बैग और परकोपाइन लगाने के साथ इतने ही बजट से नदी का डोजिंग चेनेलाइजेशन कराया गया था। जिस स्थान तक परकोपाइन लगाई गई थी, लोग उसके आगे गांव राहुलनगर तक बाढ़ बचाव कार्य की मांग कर रहे थे। पिछले साल ही नदी के उफनाने से 18 करोड़ की लागत से हुए काम क्षेत्र में तबाही नहीं रोक सके। नौ करोड़ की लागत से बनाया गया डौला पहली बाढ़ में ही कई स्थानों से क्षतिग्रस्त हो गया था। 55 किसानों की 200 एकड़ जमीन फसलों समेत नदी में समा गई थी।
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जमीन का मालिकाना हक न होने से किसानों को अब तक मुआवजा के नाम पर एक धेला तक नहीं मिला। चंदिया हजारा के समीप 0जिस स्थान तक बचाव कार्य हुए थे। अब फिर उसके आगे 900 मीटर बचाव कार्य कराने के लिए तीन करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए है। एक करोड़ रुपये की धनराशि अवमुक्त होने पर गांव चंदिया हजारा में जियो बैग, मशीनें पहुंचना शुरू हो गई हैं। एसडीओ बाढ़ खंड डीएन शुक्ला ने बताया कि तीन करोड़ की लागत से नौ सौ मीटर में कटर बनेंगे। 15-15 मीटर के कटर बनाने के साथ परकोपाइन लगाई जाएगी। इससे क्षेत्र में बाढ़ और कटान को कुछ हद तक रोका जा सकेगा। बताया कि शीघ्र ही दो-तीन दिन में काम शुरू करा दिया जाएगा।
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नगरिया नकटहा से शारदा सागर डैम तक हों बचाव कार्य

नदी किनारे तीन करोड़ रुपये से शुरू होने वाले बचाव कार्य को लेकर क्षेत्र के लोग असमंजस में है। उनका तर्क है कि नदी रुख बदल सकती है। पिछले साल नदी रुख बदलकर गांव की ओर बहने लगी। टुकड़ों में बचाव कार्य होने से एक गांव की ओर बचाव होने पर नदी दूसरे गांवों की ओर तबाही मचाएगी। हर साल कराए जाने वाले 10-12 करोड़ के काम ठिकाने लगते रहेंगे। लोगों का कहना है कि नेपाल ने अपनी ओर ठोकर बनाकर पानी को भारत की ओर छोड़ रखा है। बनवसा बैराज से रिलीज होने वाले पानी की तो जानकारी हो जाती है। मगर नेपाल से आने वाला पानी तबाही मचा देता है। नेपाल का पानी रोका जाए। नगरिया नकटहा से शारदा सागर डैम तक एक साथ बचाव कार्य हों।
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