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बिना अनुमति निकाली गई थी विसर्जन यात्रा, घिरे अफसर
पीलीभीत
Updated Sun, 01 Oct 2017 11:50 PM IST
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पीलीभीत। गौहनिया जलाशय में मां दुर्गा मूर्ति विसर्जन के दौरान दो युवकों की डूबकर मौत होने के मामले में बंदोबस्त को लेकर लापरवाही के आरोप में घिरे पुलिस और प्रशासन की मुसीबत और बढ़ती दिखाई दे रही है। उच्चाधिकारियों तक मामला पहुंचने के बाद सामने आया है कि विसर्जन यात्रा बिना अनुमति निकाली गई थी। इसके बाद अब प्रशासनिक अफसर लापरवाही का ठींकरा पुलिस पर फोड़ने की तैयारी करने लगे हैं।
शहर के मुहल्ला मुहम्मद फारुख से शनिवार को मां दुर्गा की विशाल विसर्जन यात्रा निकाली गई थी। देर शाम गौहनिया चौराहा स्थित जलाशय पर मूर्ति विसर्जन के दौरान मुहल्ले के ही अमित शर्मा और नज्जू की डूबकर मौत हो गई थी। दुखद हादसे के बाद विसर्जन को लेकर बरती गई प्रशासनिक और पुलिस अफसरों की लापरवाही खुलकर सामने आ गई थी। इसको लेकर जिला अस्पताल पहुंचे शहर विधायक संजय सिंह गंगवार ने भी नाराजगी जताई। रात में दोनों के शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद रविवार सुबह अंतिम संस्कार कर दिया गया। उधर दूसरे दिन मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद अब जिला स्तर पर खलबली मच गई है। विसर्जन यात्रा बिना अनुमति कैसे निकल गई, इसको लेकर अफसर खुद की फंसती गर्दन को बचाने में जुट गए हैं। प्रशासनिक अधिकारी खुद की लापरवाही को टालकर हर बार की तरह इस मामले में भी ठीकरा पुलिस पर फोड़ने की तैयारी में जुट गए हैं, जबकि नवरात्र की शुरुआत से ही मुहल्ले में मां दुर्गा की मूर्ति स्थापित कर पूजन शुरू कर दिया गया था। इसकी जानकारी पुलिस से लेकर प्रशासनिक अफसरों को थी। यह भी तय था कि जब मूर्ति स्थापित की गई है, तो इसकी विसर्र्जन यात्रा भी निकाली जाएगी। अगर परमीशन नहीं थी फिर विसर्जन यात्रा को पहले क्यों नहीं रोका गया? प्रशासनिक अधिकारी इसको लेकर अनदेखी करते रहे और अब खुद को बचाने को एक दूसरे को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। इसके अलावा मुहल्ला खकरा से निकाली गई विसर्जन यात्रा में रूट को लेकर हुए विवाद में भी प्रशासनिक स्तर से लापरवाही बरती गई। इस रूट की अनुमति नहीं दी गई फिर उस रास्ते पर पुलिस -प्रशासनिक अफसरों की मौजूदगी में यात्रा चलती गई। हंगामा होने के बाद भी उन्हीं रास्तों से इसको निकाला गया। गनीमत रही कि इसको लेकर कोई विवाद की स्थिति सामने नहीं आई। पुलिस और प्रशासनिक अफसरों के बीच लापरवाही को लेकर शुरू हुई खींचतान चर्चा का विषय बनी है।
शहर के मुहल्ला मुहम्मद फारुख से शनिवार को मां दुर्गा की विशाल विसर्जन यात्रा निकाली गई थी। देर शाम गौहनिया चौराहा स्थित जलाशय पर मूर्ति विसर्जन के दौरान मुहल्ले के ही अमित शर्मा और नज्जू की डूबकर मौत हो गई थी। दुखद हादसे के बाद विसर्जन को लेकर बरती गई प्रशासनिक और पुलिस अफसरों की लापरवाही खुलकर सामने आ गई थी। इसको लेकर जिला अस्पताल पहुंचे शहर विधायक संजय सिंह गंगवार ने भी नाराजगी जताई। रात में दोनों के शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद रविवार सुबह अंतिम संस्कार कर दिया गया। उधर दूसरे दिन मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद अब जिला स्तर पर खलबली मच गई है। विसर्जन यात्रा बिना अनुमति कैसे निकल गई, इसको लेकर अफसर खुद की फंसती गर्दन को बचाने में जुट गए हैं। प्रशासनिक अधिकारी खुद की लापरवाही को टालकर हर बार की तरह इस मामले में भी ठीकरा पुलिस पर फोड़ने की तैयारी में जुट गए हैं, जबकि नवरात्र की शुरुआत से ही मुहल्ले में मां दुर्गा की मूर्ति स्थापित कर पूजन शुरू कर दिया गया था। इसकी जानकारी पुलिस से लेकर प्रशासनिक अफसरों को थी। यह भी तय था कि जब मूर्ति स्थापित की गई है, तो इसकी विसर्र्जन यात्रा भी निकाली जाएगी। अगर परमीशन नहीं थी फिर विसर्जन यात्रा को पहले क्यों नहीं रोका गया? प्रशासनिक अधिकारी इसको लेकर अनदेखी करते रहे और अब खुद को बचाने को एक दूसरे को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। इसके अलावा मुहल्ला खकरा से निकाली गई विसर्जन यात्रा में रूट को लेकर हुए विवाद में भी प्रशासनिक स्तर से लापरवाही बरती गई। इस रूट की अनुमति नहीं दी गई फिर उस रास्ते पर पुलिस -प्रशासनिक अफसरों की मौजूदगी में यात्रा चलती गई। हंगामा होने के बाद भी उन्हीं रास्तों से इसको निकाला गया। गनीमत रही कि इसको लेकर कोई विवाद की स्थिति सामने नहीं आई। पुलिस और प्रशासनिक अफसरों के बीच लापरवाही को लेकर शुरू हुई खींचतान चर्चा का विषय बनी है।
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