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अमृत योजना: कब शहरवासियों को मिलेगा पानी, जलनिगम-नगरपालिका को नहीं पता
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पीलीभीत। शासन की अमृत योजना शहर में दम तोड़ती नजर आ रही है। नगरपालिका और जल निगम ने किनारा करते हुए इसे बरेली जलनिगम की जिम्मेदारी बता दिया है। दोनों विभाग के अफसरों को ये भी नहीं पता है कि काम कब तक पूरा होगा। इसी की वजह से शहर में उखड़ी पड़ी सड़कों के बारे में भी अफसर अनभिज्ञ बने हुए हैं।
शहर की आबादी दो लाख का आंकड़ा पार करते हुई ढाई लाख तक पहुंच चुकी है मगर पेयजल आपूर्ति के संसाधन अभी तीन दशक पुराने हैं। इस व्यवस्था का 2018 में अमृत योजना के तहत कायाकल्प शुरू हुआ था। 3630.21 लाख की लागत से 69.33 किमी पानी की नई पाइप लाइन डाली जानी है। 12096 घरों में कनेक्शन देने हैं। इससे लोगों को शुद्ध पेयजल की आपूर्ति की जा सके। इसकी जिम्मेदारी नगरपालिका को दी गई थी। बाद में जलनिगम की ओर से एक संस्था को काम दे दिया गया। काम दो चरणों में शुरू हुआ था। तीन ओवरहैड टैैंक और एक अंडरग्राउंड टैंक बनाया गया था। इस कार्य को पूरा करने की तिथि 2021 थी। मगर काम पूरा नहीं हो पाया।
फिलहाल नगर पालिका ईओ वंदना शर्मा ने इसे जल निगम की एक्सईएन कुमकुम गंगवार की जिम्मेदारी बताते हुए पलड़ा झाड़ लिया है। जब कुमकुम गंगवार से जानकारी की गई, तो उन्होंने बरेली जल निगम की जिम्मेदारी बताते हुए खुद पर ग्रामीण क्षेत्र की जिम्मेदारी बता दी। ऐसे में जब शहर में कोई जिम्मेदार अफसर ही तय नहीं है तो काम कब और कैसे पूरा होगा, इस पर भी सवाल लग गया है। इस संबंध में बरेली जन निगम के एक्सईएन संजय कुमार से संपर्क करने की कोशिश की गई तो कई बार फोन लगाने के बाद भी उनका फोन रिसीव नहीं हो सका।
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पालिका की ओर से डीएम को भेजा जाएगा पत्र
शहर में पानी की पाइप लाइन तो डाल दी गई मगर अभी तक सड़कों को दुरुस्त नहीं किया गया। इससे राहगीरों को खासी दिक्कत होती है। जब ईओ से वार्ता की गई तो उन्होंने बताया कि अगर शहर में अगर कहीं सड़कें टूटी पड़ीं हैं तो डीएम से पत्राचार किया जाएगा। जल निगम को भी पत्र भेजा जाएगा। बताया कि कई बार पहले भी पत्र भेजे जा चुके है। मगर पानी की सप्लाई कब तक शुरू होगी। इस संबंध में उन्हें जानकारी नहीं है।
दशकों पुरानी लाइन से हो रही पानी की सप्लाई
शहर के अंदर 1955 में जलकल विभाग की स्थापना की गई थी। इसके बाद वर्ष 1980 में चार ओवरहेड टैंक व 11 नलकूप स्थापित किए। इसी संसाधनों से अभी तक पानी की सप्लाई हो रही है। जबकि पुरानी पानी की पाइप लाइन पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। लीकेज होने से गंदा पानी घरों में आपूर्ति हो रहा है। मगर अमृत योजना को लेकर कोई गंभीर नहीं है। शहरवासियों को भी अमृत योजना का पानी एक सपना लगने लगा है।
अमृत योजना के तहत चल रहे कार्य की जिम्मेदारी जल निगम की है। कार्य कब तक पूरा होगा। इस संबंध में जानकारी नहीं है। टूटी सड़कों को लेकर उच्चाधिकारियों से पत्राचार किया जाएगा। जल निगम को भी पत्र भेजा जाएगा। - वंदना शर्मा, ईओ नगर पालिका
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शहर की आबादी दो लाख का आंकड़ा पार करते हुई ढाई लाख तक पहुंच चुकी है मगर पेयजल आपूर्ति के संसाधन अभी तीन दशक पुराने हैं। इस व्यवस्था का 2018 में अमृत योजना के तहत कायाकल्प शुरू हुआ था। 3630.21 लाख की लागत से 69.33 किमी पानी की नई पाइप लाइन डाली जानी है। 12096 घरों में कनेक्शन देने हैं। इससे लोगों को शुद्ध पेयजल की आपूर्ति की जा सके। इसकी जिम्मेदारी नगरपालिका को दी गई थी। बाद में जलनिगम की ओर से एक संस्था को काम दे दिया गया। काम दो चरणों में शुरू हुआ था। तीन ओवरहैड टैैंक और एक अंडरग्राउंड टैंक बनाया गया था। इस कार्य को पूरा करने की तिथि 2021 थी। मगर काम पूरा नहीं हो पाया।
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फिलहाल नगर पालिका ईओ वंदना शर्मा ने इसे जल निगम की एक्सईएन कुमकुम गंगवार की जिम्मेदारी बताते हुए पलड़ा झाड़ लिया है। जब कुमकुम गंगवार से जानकारी की गई, तो उन्होंने बरेली जल निगम की जिम्मेदारी बताते हुए खुद पर ग्रामीण क्षेत्र की जिम्मेदारी बता दी। ऐसे में जब शहर में कोई जिम्मेदार अफसर ही तय नहीं है तो काम कब और कैसे पूरा होगा, इस पर भी सवाल लग गया है। इस संबंध में बरेली जन निगम के एक्सईएन संजय कुमार से संपर्क करने की कोशिश की गई तो कई बार फोन लगाने के बाद भी उनका फोन रिसीव नहीं हो सका।
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पालिका की ओर से डीएम को भेजा जाएगा पत्र
शहर में पानी की पाइप लाइन तो डाल दी गई मगर अभी तक सड़कों को दुरुस्त नहीं किया गया। इससे राहगीरों को खासी दिक्कत होती है। जब ईओ से वार्ता की गई तो उन्होंने बताया कि अगर शहर में अगर कहीं सड़कें टूटी पड़ीं हैं तो डीएम से पत्राचार किया जाएगा। जल निगम को भी पत्र भेजा जाएगा। बताया कि कई बार पहले भी पत्र भेजे जा चुके है। मगर पानी की सप्लाई कब तक शुरू होगी। इस संबंध में उन्हें जानकारी नहीं है।
दशकों पुरानी लाइन से हो रही पानी की सप्लाई
शहर के अंदर 1955 में जलकल विभाग की स्थापना की गई थी। इसके बाद वर्ष 1980 में चार ओवरहेड टैंक व 11 नलकूप स्थापित किए। इसी संसाधनों से अभी तक पानी की सप्लाई हो रही है। जबकि पुरानी पानी की पाइप लाइन पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। लीकेज होने से गंदा पानी घरों में आपूर्ति हो रहा है। मगर अमृत योजना को लेकर कोई गंभीर नहीं है। शहरवासियों को भी अमृत योजना का पानी एक सपना लगने लगा है।
अमृत योजना के तहत चल रहे कार्य की जिम्मेदारी जल निगम की है। कार्य कब तक पूरा होगा। इस संबंध में जानकारी नहीं है। टूटी सड़कों को लेकर उच्चाधिकारियों से पत्राचार किया जाएगा। जल निगम को भी पत्र भेजा जाएगा। - वंदना शर्मा, ईओ नगर पालिका