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Pilibhit News: ‘जब शक्तिशाली व्यक्ति पुलिस में हो तो गरीब न्याय के लिए बाट जोहता रहता है’
Tue, 04 Jul 2023 11:56 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Tue, 04 Jul 2023 11:56 PM IST
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पीलीभीत। वर्ष 2010 पुलिस हिरासत में दुष्कर्म के मामले के आरोपी की मौत होने के प्रकरण में विशेष न्यायाधीश एससीएसटी एक्ट महेशानंद झा ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाया है। अदालत ने कहा है कि न्यायिक प्रक्रिया की यह अजीब विडंबना है कि जब शक्तिशाली व्यक्ति पुलिस विभाग में कार्यरत हो तो गरीब व्यक्ति न्याय के लिए बाट जोहता रह जाता है। मामला लड़की भगाकर ले जाने के मामले में आरोपी को पकड़कर पीटने और पुलिस हिरासत में उसकी मौत का था। इसे पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने का बना दिया। 13 साल बाद अब पीड़ित पक्ष की लगातार पैरवी पर अदालत ने पुलिस वालों समेत छह लोगों के खिलाफ हत्या के जुर्म में मुकदमा चलाने के आदेश दिए हैं।
बरखेड़ा क्षेत्र से लड़की को बहला-फुसला कर भगा ले जाने के आरोप में 13 अगस्त 2010 को करोड़ चौकी इंचार्ज महेश बाबू शर्मा ने बरखेड़ा के ही कल्लियां गांव के रामपाल को गिरफ्तार किया था। लड़की गैर समुदाय की थी। लड़की बरामद होने के बाद रामपाल पर दुष्कर्म की धारा 376 और बढ़ा दी गई। रामपाल के भाई परमवीर का कहना है कि दरोगा और तीन सिपाहियों ने करोड़ चौकी में रखकर उसके भाई को जमकर पीटा। उनसे 25 हजार रुपये रिश्वत मांगी गई।
जब वह 20 हजार रुपये लेकर चौकी पहुंचे तो कहा कि पूरे रुपये लेकर नहीं आया तेरे भाई को मार देंगे। लड़की पक्ष ने भी पुलिस की मौजूदगी में चौकी में रामपाल को पीटा। पुलिस की पिटाई से जब रामपाल की तबीयत खराब हो गई तो उसे प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत में सुधार न होने पर उसे बरेली के एक मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। बाद में उसे जिला अस्पताल लाया गया, जहां उसकी मौत हो गई।
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शिकायत पर पुलिस ने क्रॉस केस बनाते हुए दरोगा महेश बाबू शर्मा, सिपाही रामप्रकाश, जितेंद्र सिंह, गोविंद सिंह मोहमद आरिफ, जहूर बख्श शेर बहादुर के विरुद्ध आत्महत्या के साक्ष्य छिपाने और एससीएसटी एक्ट में रिपोर्ट दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। न्यायालय में गवाही के दौरान वीरपाल ने मामला हत्या का होने का प्रार्थना पत्र दिया। इस पर आरोपियों ने आपत्ति दाखिल की।
न्यायालय ने सुनवाई के बाद अभियोजन का प्रार्थना पत्र स्वीकार कर सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप संशोधित करने के लिए 13 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया। इस मामले में पुलिस से न्याय न मिलते देख परमवीर हाईकोर्ट गया। 2012 में हाईकोर्ट ने भी माना कि इस मामले की गंभीरता को पुलिस ने कम कर दिया है। अदालत में पुलिस ने तमाम दलीलें दीं।
बताया कि चौकी में रामपाल नाड़े से फंदा बनाकर लटक गया था, लेकिन अदालत के इस सवाल का जवाब पुलिस वालों के पास नहीं था कि उसे सरकारी अस्पताल के बजाय निजी अस्पताल में क्यों ले गए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चोट का साफ जिक्र था। विशेष न्यायाधीश एससीएसटी एक्ट महेशानंद झा ने अपने फैसले में कहा कि करोड़ चौकी पर पुलिस वालों ने रामपाल के साथ काफी मारपीट की। जिससे उसके शरीर में चोट आई। उसके गले में फंदा डालकर खींचा गया। इससे वह मरणासन्न स्थिति में पहुंच गया।
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बरखेड़ा क्षेत्र से लड़की को बहला-फुसला कर भगा ले जाने के आरोप में 13 अगस्त 2010 को करोड़ चौकी इंचार्ज महेश बाबू शर्मा ने बरखेड़ा के ही कल्लियां गांव के रामपाल को गिरफ्तार किया था। लड़की गैर समुदाय की थी। लड़की बरामद होने के बाद रामपाल पर दुष्कर्म की धारा 376 और बढ़ा दी गई। रामपाल के भाई परमवीर का कहना है कि दरोगा और तीन सिपाहियों ने करोड़ चौकी में रखकर उसके भाई को जमकर पीटा। उनसे 25 हजार रुपये रिश्वत मांगी गई।
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जब वह 20 हजार रुपये लेकर चौकी पहुंचे तो कहा कि पूरे रुपये लेकर नहीं आया तेरे भाई को मार देंगे। लड़की पक्ष ने भी पुलिस की मौजूदगी में चौकी में रामपाल को पीटा। पुलिस की पिटाई से जब रामपाल की तबीयत खराब हो गई तो उसे प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत में सुधार न होने पर उसे बरेली के एक मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। बाद में उसे जिला अस्पताल लाया गया, जहां उसकी मौत हो गई।
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शिकायत पर पुलिस ने क्रॉस केस बनाते हुए दरोगा महेश बाबू शर्मा, सिपाही रामप्रकाश, जितेंद्र सिंह, गोविंद सिंह मोहमद आरिफ, जहूर बख्श शेर बहादुर के विरुद्ध आत्महत्या के साक्ष्य छिपाने और एससीएसटी एक्ट में रिपोर्ट दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। न्यायालय में गवाही के दौरान वीरपाल ने मामला हत्या का होने का प्रार्थना पत्र दिया। इस पर आरोपियों ने आपत्ति दाखिल की।
न्यायालय ने सुनवाई के बाद अभियोजन का प्रार्थना पत्र स्वीकार कर सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप संशोधित करने के लिए 13 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया। इस मामले में पुलिस से न्याय न मिलते देख परमवीर हाईकोर्ट गया। 2012 में हाईकोर्ट ने भी माना कि इस मामले की गंभीरता को पुलिस ने कम कर दिया है। अदालत में पुलिस ने तमाम दलीलें दीं।
बताया कि चौकी में रामपाल नाड़े से फंदा बनाकर लटक गया था, लेकिन अदालत के इस सवाल का जवाब पुलिस वालों के पास नहीं था कि उसे सरकारी अस्पताल के बजाय निजी अस्पताल में क्यों ले गए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चोट का साफ जिक्र था। विशेष न्यायाधीश एससीएसटी एक्ट महेशानंद झा ने अपने फैसले में कहा कि करोड़ चौकी पर पुलिस वालों ने रामपाल के साथ काफी मारपीट की। जिससे उसके शरीर में चोट आई। उसके गले में फंदा डालकर खींचा गया। इससे वह मरणासन्न स्थिति में पहुंच गया।