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सिपाहियों के सस्पेंड होते ही ठीक हुई कैदियों की तबियत
पीलीभीत।
Updated Thu, 09 Apr 2015 11:55 PM IST
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इलाज के बहाने जिला अस्पताल में भर्ती कैदियों की तबियत सिपाहियों के
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सस्पेंड होने के बाद एकाएक ठीक हो गई। 24 घंटे के अंदर ही तीन कैदियों को
अस्पताल से डिस्चार्ज कर वापस जेल भेज दिया गया।
जिला अस्पताल में पिछले कुछ माह से भर्ती दो हत्यारोपी सजायाफ्ता कैदी, एक हत्यारोपी विचाराधीन और एक धोखाधड़ी का आरोपी इलाज करा रहे हैं। तीनों जिला अस्पताल के जनरल बार्ड में भर्ती थे और उनकी सुरक्षा में पुलिस लाइन के सिपाही तैनात थे। बुधवार को एएसपी ने अचानक छापामार कर सुरक्षा की हकीकत परखी थी जिसमें सिपाही अपनी रायफलें रखकर गायब थे। इस पर एएसपी ने रायफलें कब्जे में लेकर तीन सिपाहियों को सस्पेंड कर दिया था। मामला सुर्खियों में आने पर प्रशासन ने इस पर संज्ञान लिया और भर्ती कैदियों के बारे में जानकारी शुरू की। इससे जेल और जिला अस्पताल प्रशासन सकते में आ गया। बृहस्पतिवार को सुबह कैदियों को अस्पताल से छुट्टी देने की प्रक्रिया शुरू की गई और दोपहर ढाई बजे तक तीन कैदी क्रमश: नसीमुद्दीन, रईस अहमद, अंसार अहमद को जेल वापस भेज दिया गया जबकि कोर्ट के आदेश पर पहले से इलाज करा रहे अशोक शर्मा को अभी अस्पताल में ही रखा गया है। तीन कैदियों की जिला अस्पताल से अचानक छुट्टी अस्पताल, प्रशासन एवं जेल में चर्चा में रही और लोग जेल अस्पताल के इस खेल पर चुटकी लेते देखे गए।
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कैदियों की छुट्टी पर उठे सवाल
-कैदियों को ऐसी कौन से बीमारी थी जिसका जेल अस्पताल में इलाज नहीं था।
-यदि कैदी इतने बीमार थे तो आईसीयू में भर्ती क्यों नहीं रखे गए।
-भर्ती के दौरान एक भी कैदी के ड्रिप आदि क्यों नहीं लगी थी
-जिला अस्पताल में जब मामूली गंभीर मरीजों को रेफर कर दिया जाता है कैदियों को कौन सा उपचार दिया जा रहा था।
-आखिर कैदियों की हालात में एक सुधार कैसे हो गया।
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डीएम ने जांच के आदेश
जिला अस्पताल में इलाज के नाम पर आराम फरमाने और उनकी सुरक्षा में लगे सिपाहियों की लापरवाही का मामला संज्ञान में आने पर डीएम ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं। डीएम ओएन सिंह ने बताया सीएमएस से कैदियों की बीमारी, इलाज और भर्ती होने के कारण आदि की रिपोर्ट मांगी गई है साथ ही सिपाहियों की ड्यूटी की भी जांच कराई जाएगी।
जिला अस्पताल में पिछले कुछ माह से भर्ती दो हत्यारोपी सजायाफ्ता कैदी, एक हत्यारोपी विचाराधीन और एक धोखाधड़ी का आरोपी इलाज करा रहे हैं। तीनों जिला अस्पताल के जनरल बार्ड में भर्ती थे और उनकी सुरक्षा में पुलिस लाइन के सिपाही तैनात थे। बुधवार को एएसपी ने अचानक छापामार कर सुरक्षा की हकीकत परखी थी जिसमें सिपाही अपनी रायफलें रखकर गायब थे। इस पर एएसपी ने रायफलें कब्जे में लेकर तीन सिपाहियों को सस्पेंड कर दिया था। मामला सुर्खियों में आने पर प्रशासन ने इस पर संज्ञान लिया और भर्ती कैदियों के बारे में जानकारी शुरू की। इससे जेल और जिला अस्पताल प्रशासन सकते में आ गया। बृहस्पतिवार को सुबह कैदियों को अस्पताल से छुट्टी देने की प्रक्रिया शुरू की गई और दोपहर ढाई बजे तक तीन कैदी क्रमश: नसीमुद्दीन, रईस अहमद, अंसार अहमद को जेल वापस भेज दिया गया जबकि कोर्ट के आदेश पर पहले से इलाज करा रहे अशोक शर्मा को अभी अस्पताल में ही रखा गया है। तीन कैदियों की जिला अस्पताल से अचानक छुट्टी अस्पताल, प्रशासन एवं जेल में चर्चा में रही और लोग जेल अस्पताल के इस खेल पर चुटकी लेते देखे गए।
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कैदियों की छुट्टी पर उठे सवाल
-कैदियों को ऐसी कौन से बीमारी थी जिसका जेल अस्पताल में इलाज नहीं था।
-यदि कैदी इतने बीमार थे तो आईसीयू में भर्ती क्यों नहीं रखे गए।
-भर्ती के दौरान एक भी कैदी के ड्रिप आदि क्यों नहीं लगी थी
-जिला अस्पताल में जब मामूली गंभीर मरीजों को रेफर कर दिया जाता है कैदियों को कौन सा उपचार दिया जा रहा था।
-आखिर कैदियों की हालात में एक सुधार कैसे हो गया।
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डीएम ने जांच के आदेश
जिला अस्पताल में इलाज के नाम पर आराम फरमाने और उनकी सुरक्षा में लगे सिपाहियों की लापरवाही का मामला संज्ञान में आने पर डीएम ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं। डीएम ओएन सिंह ने बताया सीएमएस से कैदियों की बीमारी, इलाज और भर्ती होने के कारण आदि की रिपोर्ट मांगी गई है साथ ही सिपाहियों की ड्यूटी की भी जांच कराई जाएगी।